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<title>مكس رومانسيات وحكايات سكس - https://mixrt.com/</title>
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<description> خلاصات آخر المواضيع النشطه في :مكس رومانسيات وحكايات سكس - Hindi Sex Stories | قصص السكس الهنديه - का संग्रह जो आपको अन्दर तक उत्तेजित कर देगा. वो Indian Sex Stories जो आपको धीरे धीरे अंजाम तक पहुचायेगी.</description>
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<pubDate>Thu, 15 Oct 2026 03:09:41 +0300</pubDate>
<item><title> ये चूत मांगे सेक्स- 3</title>
<description>हॉट गर्ल्स नीड सेक्स स्टोरी में लड़की को जब पति से लंड का पूरा सुख नहीं मिला तो उसने यह आनन्द बाहर तलाशना शुरू किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कहानी का दूसरा भाग: गोवा में फुल न्यूड लड़कियों की मसाज़ &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब आगे हॉट गर्ल्स नीड सेक्स स्टोरी: &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लंच लेकर दोनों उदयपुर लेक की ओर चल दिए। &lt;br /&gt; बहुत खूबसूरत समा था। &lt;br /&gt; चूँकि शादियों का सीजन था तो हर ओर नव विवाहित जोड़े एक दूसरे में खोए घूम रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली को भी अपने पुराने दिन याद आ गए। &lt;br /&gt; उसने विनय को छेड़ते हुए कहा यार तुम्हारा मन नहीं करता रीना के पास जाने का? मैं तुम्हारी जगह होती तो नौकरी छोड़ देती। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय हंस दिया बोला कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। रीना को अपनी शादी से नहीं बल्कि अपने कैरियर से प्यार है। मां-पिताजी की वजह से सतना रुकना तो केवल एक बहाना है। मुझे बहुत बुरा लगता है पर मैंने भी ऐसी जिंदगी को अपनी नियति मान लिया है। और फिर सर और आप जैसे दोस्त मिलते कहां हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके मुंह से आप सुनते ही रूपाली ने एक धौल लगाया उसके तो हंसते हुए विनय बोला सॉरी रमोला! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली उससे लिपटते हुए झूल सी गई उसके ऊपर। &lt;br /&gt; अब दोनों एक दूसरे के हाथ में हाथ लिए घूम रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय रूपाली को भी अच्छा दोस्त मानता था और उससे अभिजीत ने कह रखा था कि रूपाली मेरी वजह से बहुत अपसेट रहती है तो हर तरीके से उसे खुश रखना। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उससे कह ही दिया अभिजीत तो अब केवल व्यापार के लिए जीता है मेरे लिए तो उस पर समय ही नहीं। मेरी भावनाओं को भी वो नहीं समझता। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय बोला भगवान हर जोड़ी इसी तरह बनाता है। मेरी मां बार-बार रीना से कहती हैं कि वो मेरे पास हफ्ते-दस दिन रुक जाए पर उसे अपने कैरियर की इतनी सनक है कि वो काम छोड़ती ही नहीं। मुझे भी खराब लगता है पर अब मैंने कहना ही छोड़ दिया। सोच लिया कि शायद यही मेरे भाग्य में है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उसका हाथ कस के पकड़ लिया और बोली कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा। हम दोनों की कहानी एक सी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली एक आइसक्रीम वेंडर पर रुकी और आइसक्रीम ली। &lt;br /&gt; विनय बोला मेरा मन नहीं है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने चलते-चलते अपनी स्टिक से ही उसे भी खिला दी। &lt;br /&gt; ऐसा पहली बार हो रहा था विनय के साथ। &lt;br /&gt; पर उसे भी रूपाली का साथ बहुत अच्छा लग रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस समय रूपाली उसकी दोस्त थी एमडी नहीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लेक में बोटिंग करके और डिनर लेकर देर रात तक दोनों होटल पहुंचे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने विनय से कहा चेंज करके मेरे रूम में आ जाना; ड्रिंक लेंगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने अभिजीत और रूपाली के साथ कभी एक-आध बार ड्रिंक ली थीं पर वो बात अलग थी। &lt;br /&gt; आज जब रूपाली अकेली थी तो उसे कुछ अटपटा लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली समझ गई उसने हंसते हुए कहा इट्स योर एमडीज़ ऑर्डर! &lt;br /&gt; कहकर वो खिलखिलाकर हंस दी बोली चिल यार! अभी न तुम्हें नींद आएगी न मुझे। और कल सुबह उठने की कोई जल्दी भी तो नहीं है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूम में जाकर रूपाली ने शावर लिया और हल्का सा मेकअप करके शॉर्ट्स और टॉप पहन ली। &lt;br /&gt; उसका जिस्म महक रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूम में उसने हल्का सा म्यूजिक लगा लिया और लाइट धीमी कर लीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी उसका मोबाइल बजा। &lt;br /&gt; अभिजीत था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर बात करके रूपाली ने उसे कह दिया कि वो अभी सोने जा रही है। &lt;br /&gt; साथ ही विनय को फोन कर दिया कि वो उसका इंतजार कर रही है और यदि अभिजीत का फोन आए तो कह दे कि मैं तो सो गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर में विनय आ गया। &lt;br /&gt; उसने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनी थीं। &lt;br /&gt; वो कुछ असहज था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उसे हलके से हग किया और कहा यार मूड अच्छा रखो! आखिर उदयपुर आए हैं कोई तीर्थ स्थान नहीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय को बिठाते हुए रूपाली बोली अब तुमसे क्या छिपाना। तुम तो जानते ही हो कि कितना प्यार करती हूँ अभिजीत से पर मुझे क्या मिला। व्यापार तो मेरे पिताजी का भी बहुत बड़ा है। पर मुझे कुछ और भी चाहिए था। अब अभिजीत वो भी मुझे नहीं दे रहा। अब मैंने मन बना लिया कि अपनी खुशी खुद ढूंढूंगी। और यही राय मैं तुमको भी दे रही हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय मुस्कुरा दिया। &lt;br /&gt; रूपाली ने उससे पेग बनाने को कहा और मेज पर रखे फ्राइड नमकीन काजू-बादाम का पैकेट खोल लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब दोनों आपस में खुल गए थे। &lt;br /&gt; विनय की दुखती रग को दबा दिया था रूपाली ने। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने विनय का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा चलो डांस करते हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोनों म्यूजिक पर थिरकने लगे। &lt;br /&gt; रूपाली काफी नजदीक आ गई थी विनय के। &lt;br /&gt; उसके जिस्म से आती मदमस्त खुशबू विनय को दीवाना कर रही थी। &lt;br /&gt; उसके हाथ रूपाली के कंधे पर थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय को लगा कि कहीं वो दोनों बहक न जाएं तो उसने रूपाली से कहा चलो ड्रिंक खत्म कर लें। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब दोनों खुलकर बात कर रहे थे। &lt;br /&gt; रूपाली ने गोवा की मसाज का जिक्र कर दिया पर अपनी बात छिपाते हुए प्रिया की बात बता दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय भी बहकते हुए बोला पिछले महीने जब मैं और सर थाईलैंड गए थे तो हम दोनों ने ही मसाज ली थी। हालांकि सर ने मना किया था किसी से भी जिक्र करने का। पर तुमसे पता नहीं क्यों बता दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली को अभिजीत की बेवफाई अच्छी नहीं लगी। &lt;br /&gt; कम से कम उसने वो सब तो नहीं किया था जो प्रिया कर आई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने विनय से पूछा तुम्हें रीना के साथ बेवफाई क्यों की? &lt;br /&gt; विनय बोला वो क्या कर रही है मेरे साथ? मेरी भी तो जिस्मानी जरूरतें हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने विनय को गले लगा लिया बोली तुम्हारी कोई गलती नहीं है। पर मैंने तो अभिजीत को कभी मना नहीं किया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रात के 11 बज गए थे। &lt;br /&gt; रूपाली तो सोफे पर अधलेटी हो गई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय भी अपने रूम में जाने के लिए उठा। &lt;br /&gt; रूपाली ने उसकी ओर हाथ बढ़ाया मुझे भी बेड पर पहुंचा दो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसका हाथ थामा तो रूपाली उसके कंधे से लिपटती-लटकती बेड तक पहुंची और फिर उसे खींचती हुई बेड पर जा गिरी। &lt;br /&gt; उसने विनय को ताबड़-तोड़ चूमना शुरू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय पहले तो सकपकाया पर जल्दी ही वो भी रूपाली का साथ देने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोनों के जिस्म आपस में गुत्थम-गुत्था हो रहे थे। &lt;br /&gt; विनय की हिम्मत आगे बढ़ने की नहीं हो रही थी और रूपाली को कोई डर था नहीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने ही पहल की और विनय की टी-शर्ट उतार दी। &lt;br /&gt; वो उसके निप्पल्स को चूमने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बस इतना बहुत था विनय के लौंडे में आग लगाने को। &lt;br /&gt; विनय ने भी रूपाली की टी-शर्ट उतार दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने नीचे कुछ नहीं पहना था उसके मांसल कबूतर बाहर आ गए। &lt;br /&gt; विनय ने उन्हें दबोच लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली खुद अपने हाथ से पकड़कर मम्मे विनय के मुंह में ठूंसने लगी। &lt;br /&gt; रूपाली कसमसाते हुए विनय से बोली लाइट बंद कर दो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय झटपट उठा और स्विच ऑफ करके आ गया। &lt;br /&gt; कमरे में बहुत हल्की रोशनी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब बाकी रहे कपड़े भी फटाफट उतर गए और दो तड़पते सुलगते जिस्म एक होने को लिपट गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने जिस बेवफाई को आज तक बचा रखा था वो आज करने का मन बना कर ही आई थी। &lt;br /&gt; उसी की पहल में उसने हाथ नीचे किया और विनय का लंड पकड़ लिया और लगी सहलाने। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक बार तो रूपाली के मुंह से कसमसाते हुए निकला भी विनय क्या हम ये सही कर रहे हैं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय चुप रहा तो रूपाली खुद ही बोली मैंने बहुत सोचा फिर यही सही है तय किया। हमें भी हक है अपनी खुशियां ढूंढने का। अब ज्यादा सोचो नहीं और मुझे प्यार करो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने हाथ नीचे किया तो रूपाली की मखमली रेशमी फांकों पर जा पहुंचाया। &lt;br /&gt; रूपाली की चूत पानी बहा रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली फिर कसमसाई और विनय से खुशामद करती हुई बोली चूसो इसे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय नीचे हुआ। &lt;br /&gt; रूपाली ने अपनी टांगें खोल दीं और अपने हाथों से अपनी फांकें चौड़ा दीं। &lt;br /&gt; विनय ने बड़े आहिस्ता से उसकी फांकों को चाटा और फिर जीभ धीरे-धीरे अंदर घुसाई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली मछली की तरह तड़प गई। &lt;br /&gt; ये अहसास उसे आज बहुत दिनों बाद हो रहा था। &lt;br /&gt; विनय की जीभ पूरी उसकी गुफा में अंदर पहुंच चुकी थी। &lt;br /&gt; रूपाली मचल रही थी। &lt;br /&gt; उसने अपने मम्मे अपने हाथों से दबा रखे थे। &lt;br /&gt; वो उन्हें मसल रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली भी विनय का लंड चूसना चाह रही थी। &lt;br /&gt; उसने आहें निकालते हुए विनय से कहा मुझे भी तुम्हारा चूसना है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय 69 हो गया। &lt;br /&gt; रूपाली ने ढेर सारा थूक लंड पर लपेटा और ऊपर की चमड़ी को पीछे करते हुए लंड को मुंह में ले लिया और लगी लप-लप चूसने। &lt;br /&gt; विनय को ऐसा लगने लगा कि वो रूपाली के मुंह में ही छूट जाएगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने रूपाली से अपने को छुड़ाया और फिर सीधे होकर रूपाली की टांगें चौड़ाईं। &lt;br /&gt; अब रूपाली की मखमली चूत उसके सामने थी। &lt;br /&gt; थूक से सराबोर। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने रूपाली की टांगों को टखने से पकड़ा और ऊपर पंखे की ओर करके अपने लंड को उसकी चूत के पास ले गया। &lt;br /&gt; रूपाली भी बेकरार थी उसका लंड अंदर लेने के लिए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने कुछ पल अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर इधर-उधर मसला। &lt;br /&gt; रूपाली की आहें निकल रही थीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो तड़पती हुई बोली अब मत तरसाओ! करो अंदर। पर करना धीरे-धीरे। अब मुझे आदत खत्म हो गई है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने अब देर न करते हुए अपने लंड को उसकी गुफा में घुसा दिया। &lt;br /&gt; ज़रा सा इशारा पाते ही लंड सीधा दरक गया रूपाली की चूत में। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब विनय लगा धक्के लगाने। &lt;br /&gt; रूपाली भी उचक-उचक कर उसका साथ दे रही थी और उसे उकसा रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने अब अपने हाथ रूपाली के मम्मों पर टिका लिए। &lt;br /&gt; वो उन्हें मसलता हुआ धक्के लगा रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली तो अब गाली-गलौच पर उतर आई थी। &lt;br /&gt; वो उसे देसी भाषा में उकसा रही थी आज मेरी गर्मी निकाल दो! फाड़ दो मेरी चूत को! देखूं तुम्हारी लंड में कितना दम है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली कसमसा रही थी ऊपर आने के लिए। &lt;br /&gt; पर विनय से उसे कस के जकड़ा हुआ था अपने नीचे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी अचानक रूपाली को होश आया कि विनय ने कंडोम तो लगाया ही नहीं है। &lt;br /&gt; बिना कंडोम के तो वो अभिजीत को भी नहीं करने देती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने पूरा दम लगाकर विनय को अपने ऊपर से हटाया। &lt;br /&gt; विनय कुछ समझ पाता इससे पहले उसके लंड ने उसका साथ छोड़ दिया। &lt;br /&gt; उसका गाढ़ा ढेर सारा वीर्य रूपाली के पेट और मम्मों पर गिर गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने हैरानी से पूछा ये क्या किया? &lt;br /&gt; रूपाली बोली बिना प्रोटेक्शन के कर रहे थे हम लोग। कुछ गड़बड़ हो जाती तो… &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय का मूड खराब हो गया बोला यार सारा मजा खराब कर दिया। सुबह दवाई ले लेतीं। &lt;br /&gt; रूपाली ने उसे चूमते हुए कहा कोई बात नहीं। अभी खड़ा कर देती हूँ इसे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने पास रखे टॉवेल से पहले उसके लंड को पोंछा। &lt;br /&gt; फिर इंटरकॉम पर कॉफी शॉप में दो कॉफी का ऑर्डर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय चौंका इस समय तुमने दो कॉफी मंगाई हैं? मैं तुम्हारे कमरे में हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली हंसी कौन सा अभिजीत कॉफी लेकर आएगा? जब वेटर आए तुम वॉशरूम में चले जाना। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब दोनों वॉशरूम में आ गए और शावर लेने लगे। &lt;br /&gt; दोनों चिपटे हुए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब विनय का मूड ठीक हो गया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; नहाते-नहाते रूपाली ने दो बार उसके लंड को चूसा। &lt;br /&gt; तभी डोर बेल बजी। रूपाली ने बाथरोब लपेटा और डोर खोल कर वेटर से कॉफी ली और फिर विनय को बुलाया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय भी टॉवेल लपेट कर आया। &lt;br /&gt; क्योंकि गाउन तो एक ही था वॉशरूम में। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने कॉफी विनय को दी और अपना गाउन उतारकर नंगी ही उसकी गोदी में जा बैठी। &lt;br /&gt; अब कोई शर्म तो बची नहीं थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कॉफी की चुस्कियां लेते-लेते रूपाली ने विनय से कहा मुझे मालूम है कि तुम सोच रहे हो कि ये हमने क्या किया। हमने कुछ नहीं किया केवल अपनी जिस्मानी आग ठंडी की। सोचो अगर हम ये काम बाजार में या किसी मसाज पार्लर में करते जैसा कि तुम दोनों ने थाईलैंड में किया वो रिस्की था। उससे बीमारी भी आ सकती थी। मैं ये नहीं कहती कि हम ये सब रोज करेंगे। पर अगर हम दोनों को सूट किया तो जब मौका मिलेगा तब करेंगे। मैं तो तुम्हारे और अभिजीत के अलावा किसी और से कभी नहीं करूंगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसे चिपटा लिया और उसके मम्मे चूमते हुए बोला मेरा भी वादा है कि तुम्हारे और रीना के अलावा किसी और से नहीं करूंगा। पर किसी भी हालत में इसकी भनक अभिजीत को नहीं पड़नी चाहिए वरना वो इतना पावरफुल है कि हम दोनों को मार देगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली जोर से हंसी बोली लगी शर्त! अगले हफ्ते वो ही तुम्हें मेरे पास भेजेगा। मुझे मालूम है कितना बड़ा मर्द है वो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब विनय का लंड दोबारा तन चुका था। &lt;br /&gt; कॉफी भी खत्म हो चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने अपने पर्स से कंडोम निकालकर विनय को दिया। &lt;br /&gt; विनय ने आश्चर्यचकित होते हुए उसे लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने बात संभाली अभिजीत के साथ जब भी बाहर जाती हूँ तो पर्स में तो ये हमेशा ही रहता है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब होंठ से होंठ मिलाए दोनों बेड पर फिर लिपट गए। &lt;br /&gt; विनय उसके मम्मों को बारी-बारी से चूस रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उसके लंड को टटोला। &lt;br /&gt; वो पूरी मजबूती से खड़ा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने पास रखी क्रीम से थोड़ी क्रीम अपनी फांकों पर लगाई और फिर विनय से कंडोम पहनने को कहा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ऊपर आना चाहती थी पर विनय को चुदाई की बारीकी मालूम थी। &lt;br /&gt; उसने पहले सोचा कि पहले रूपाली को गर्म कर लूं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसलिए उसने कंडोम पहने लंड को रूपाली की चूत के आसपास मसलते हुए एक झटके में ही चूत में घुसेड़ा और पेलम-पेल शुरू की। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली तो जैसे भूखी बैठी थी उसने अपने लंबे नाखून विनय की पीठ पर गड़ा दिए और झूल गई। &lt;br /&gt; विनय की चुदाई एक्सप्रेस फुल स्पीड पर थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली को तो ऊपर आना था। &lt;br /&gt; उसने विनय से कहा अब मैं ऊपर आती हूँ तुम नीचे आ जाओ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय उसके ऊपर से हटा और फिर नीचे लेट गया। &lt;br /&gt; रूपाली मटकती हुई उसके ऊपर चढ़ बैठी और फिर अपने हाथ से उसका लंड अपनी फांकों के बीच सेट किया और फिर नीचे होती गई। &lt;br /&gt; लंड सीधा उसकी चूत में घुस गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली की आह निकली। &lt;br /&gt; फिर उसने घुड़सवारी शुरू कर दी। &lt;br /&gt; उसके मम्मे हवा में लहरा रहे थे। &lt;br /&gt; विनय बीच-बीच में उन्हें लपक लेता। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली अब हांफ रही थी। &lt;br /&gt; उसके मुंह से थूक निकल रहा था। &lt;br /&gt; वो थक गई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसे वापस नीचे पलटा और फिर उसकी चूत में लंड घुसा कर फाइनल शॉट लगाने लगा। &lt;br /&gt; कुछ ही झटकों में विनय खलास हो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने मुस्कुराते हुए उसका कंडोम उतारा और डस्टबिन में डाल दिया। &lt;br /&gt; दोनों ऐसे ही बिना कपड़ों के लिपट कर सो गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सुबह जल्दी ही विनय उठा और कपड़े पहन कर अपने रूम में चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दिन में उन लोगों ने अपने बाकी काम निपटाए। &lt;br /&gt; काम पूरा हो चुका था। &lt;br /&gt; फ्लाइट अगले दिन सुबह की थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रात को रूपाली ने पहले तो कोई प्रोग्राम बनाया नहीं। &lt;br /&gt; हालांकि दोनों बहुत सहज थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; डिनर के बाद विनय ने रूपाली से कहा चलो कॉफी शॉप में बैठते हैं। &lt;br /&gt; रूपाली मुस्कुराई नहीं मैं तो थक गई हूँ। नहाकर सोऊंगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय का लंड तो उफान मार रहा था। &lt;br /&gt; पर उसकी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो रूपाली से कह सकता कि मेरा मन सेक्स का है। &lt;br /&gt; वो भी मन मारकर अपने रूम में चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी रूपाली का फोन आया। &lt;br /&gt; वो जोर-जोर से हंस रही थी। बोली जब मन था तो कहा क्यों नहीं? कैसा बच्चों जैसा मुंह फुला लिया। अब आ जाओ! पहले साथ-साथ नहाएंगे। फिर कॉफी पियेंगे। और फिर… हाँ अपने कपड़े और बाथरूम गाउन साथ लेते आना। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय खिल उठा। &lt;br /&gt; उसने अपना टॉवेल बाथरोब और एक नाइट ड्रेस ली और रूपाली के रूम में पहुंच गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली तो कपड़े उतार चुकी थी। &lt;br /&gt; उसने केवल टॉवेल लपेटा हुआ था। &lt;br /&gt; विनय के रूम में आते ही उसने मुस्कुराते उसे हग किया और बोली चलो पहले शावर लेते हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने फटाफट कपड़े उतारे और दोनों शावर के नीचे खड़े हो गए। &lt;br /&gt; दोनों के जिस्म आपस में लिपटे हुए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली को आज वो ही तड़प महसूस हो रही थी जैसी उसने और अभिजीत ने यूरोप से वापस आती रात को होटल में महसूस की थी। &lt;br /&gt; रूपाली आज की रात के हर पल को जीना चाहती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शावर लेकर दोनों ने बाथरोब को लपेटा और बाहर आ गए कॉफी पीने। &lt;br /&gt; रूपाली के कहने पर विनय ने सिगरेट भी जला दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आज रूपाली बहुत शांत थी। &lt;br /&gt; उसे वो खुशी मिल गई थी जिसे पाने के लिए वो तरस रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने बहुत शांत होकर विनय से कहा देखो मुझे गलत मत समझना। मैं अभी भी अभिजीत से बहुत प्यार करती हूँ। पर मेरी भी जिस्मानी जरूरतें थीं। अगर वो तुमसे पूरी नहीं करती तो मुझे ये अफसोस होता कि मैंने गोवा में क्यों मौका छोड़ दिया। अब मैं शांत हूँ। तुम्हारे साथ मुझे बहुत अच्छा लगा। जब भी हमें मौका मिलेगा और हम दोनों चाहेंगे तब ये फिर हो सकेगा। पर अब सेक्स के लिए वो तड़प नहीं होगी कि हम किसी स्तर तक भी गिर जाएं। मैं तो कहती हूँ कि ये सामाजिक व्यवस्था बहुत अच्छी है बजाय इसके कि हम कोठे पर या मसाज पार्लर में अपनी जिस्मानी जरूरत पूरी करें। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कहते-कहते रूपाली विनय से लिपट गई और जोर-जोर से रोने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसे सीने से लगाया और पुचकारा और चूमा। &lt;br /&gt; रूपाली उससे ये कहते और जोर से लिपट गई मुझे आज रात भर इतना प्यार दो कि फिर मुझे कभी प्यार के लिए तरसना न पड़े! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसे गोदी में उठाया। &lt;br /&gt; उसका बाथरोब एक तरफ जा पड़ा था। &lt;br /&gt; रूपाली ने उसके होंठों से अपने होंठ मिला रखे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने आहिस्ता से रूपाली को बेड पर लिटाया और खुद नीचे खड़ा रहा। &lt;br /&gt; रूपाली उसे देखकर मुस्कुरा रही थी। &lt;br /&gt; हल्की नीली रोशनी में उसका नग्न जिस्म दमक रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने उसकी टांगें पकड़ कर उसे नीचे की ओर खींचा और फिर उसकी टांगों के बीच अपनी जीभ घुसा दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली की चूत महक रही थी। &lt;br /&gt; आज रूपाली ने उसे डियो से महका रखा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय पूरी जीभ अंदर घुसा कर उसकी चूत चूस रहा था। &lt;br /&gt; उसका एक हाथ ऊपर होकर उसके मम्मे मसल रहा था। &lt;br /&gt; बल्कि खुद रूपाली अपने मम्मे मसल रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली की आहें निकलने लगीं। &lt;br /&gt; उसकी चूत अब लंड चाहती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने आहें निकालते हुए विनय से कहा अब मत तड़पाओ और अंदर आ जाओ! &lt;br /&gt; विनय ने नीचे खड़े-खड़े ही उसकी टांगें चौड़ाते हुए अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। &lt;br /&gt; हाँ उसने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने कहा ऊपर क्यों नहीं आ रहे? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय मुस्कुराया और फिर धीरे से रूपाली की टांगें चौड़ाते हुए ऊपर कर दीं। &lt;br /&gt; अब उसके सामने रूपाली की चमकती-दमकती चूत थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; विनय ने आहिस्ता से तेज करते हुए एक ही झटके में अपना लंड घुसेड़ दिया उसकी चूत में। &lt;br /&gt; रूपाली की आह निकल गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब विनय ने धीरे-धीरे पेल लगाते हुए फिर फुल स्पीड पकड़ ली। &lt;br /&gt; नीचे खड़े होने से उसके घुटनों को बेड की सपोर्ट मिल रही थी जिस कारण से उसके धक्के दमदार हो रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हर धक्के पर रूपाली की आह निकलती। &lt;br /&gt; ऐसे धक्के वो भी पहली बार खा रही थी। &lt;br /&gt; उसे मजा आ रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने विनय को उकसाया यार मजा आ गया! थोड़ी स्पीड और बढ़ाओ! &lt;br /&gt; विनय ने और जोश से चुदाई को स्पीड दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब रुकने की स्थिति नहीं थी। &lt;br /&gt; धक्के दमदार थे तो विनय भी जल्दी ही पस्त हो गया। &lt;br /&gt; उसका होने को था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने आगे झुकते हुए अपना माल खाली कर दिया और रूपाली के मम्मे मुंह में लेकर चूसते हुए उसी के ऊपर निढाल सा हो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उसे चिपटा लिया अपने से। &lt;br /&gt; अब दोनों बेड पर आ गए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रूपाली ने उसे चूमते हुए कहा आज की रात मेरी जिंदगी की बेस्ट रातों से एक रहेगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले दिन दोनों फ्लाइट से वापस अहमदाबाद आ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सबसे पहला काम जो रूपाली ने किया वो था प्रिया को फोन। &lt;br /&gt; पर उसने बस इतना ही कहा यार मैंने बहुत सोचा तू सही है। जो सीधी तरह से नहीं मिलता उसके लिए टेढ़ी उंगली करनी ठीक है। &lt;br /&gt; प्रिया बोली ढूंढूं तेरे लिए कोई? &lt;br /&gt; रूपाली हंसी तू है न मेरे लिए। बता कब आ रही है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो दोस्तो कैसी लगी आपको मेरी कहानी ‘ये चूत मांगे सेक्स? &lt;br /&gt; हॉट गर्ल्स नीड सेक्स स्टोरी पर अपने विचार लिखिएगा मुझे मेरी मेल आईडी पर&lt;br /&gt;</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:28:03 +0300</pubDate>
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<item><title>चाची की कसी चूत को चोदकर ढीला किया- 1</title>
<description>न्यूड चाची स्टोरी में मैं अपनी सेक्सी चाची से खुलकर बात कर लेता थाएक बार मैं घर आया तो घर में कोई नहीं थामैं चाची के कमरे में गया तो बाथरूम खुला था और चाची नंगी नहा रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो मेरा नाम अजय है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ&lt;br /&gt; मेरी उम्र अब 23 साल है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये मेरी पहली सेक्स कहानी है जो मैं आज आपको बताने जा रहा हूँ&lt;br /&gt; आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह घटना एक साल पुरानी है&lt;br /&gt; उस वक्त मैं अपने घर वापिस आया हुआ था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; न्यूड चाची स्टोरी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं दिखने में भी काफी सही हूँ&lt;br /&gt; मैं रोज जिम जाता हूँ जिसकी वजह से मेरे शरीर को देखकर लड़की तो क्या कोई शादीशुदा भाभी तक मेरी ओर खिंची चली आती है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मेरा लंड भी 8 इंच लम्बा है तो एक बार जिसकी चुत में घुस गया वह दुबारा मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती है&lt;br /&gt; मेरा लंड एकदम काला नाग है किसी नीग्रो की तरह&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस सेक्स कहानी में मैंने अपनी हसीन जिस्म वाली चाची को मैंने किस तरह से अपने लौड़े की महबूबा बनाया उसे लिखा है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची हमारे घर से थोड़ी ही दूरी पर है पर वे शादी की वजह से अभी हमारे घर में ही थीं&lt;br /&gt; रात को वे अपने घर में सोने चली जाती हैं क्योंकि उधर सामान आदि की देखभाल भी जरूरी है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनका नाम रेचल है&lt;br /&gt; वे 38 साल की हैंउनका भरा हुआ जिस्म एकदम गोरा है और वे किसी पोर्न स्टार से कम नहीं दिखती हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका कारण भी है क्योंकि उनके 38 इंच के बड़े बड़े दूध से भरे थन एकदम मस्त हैं&lt;br /&gt; गांड के ऊपर 34 की एकदम चिकनी गहरी नाभि वाली कमर और बड़े बड़े मटकों के जैसे आकार वाले चर्बीदार हिलते हुए 42 इंच के चूतड़ हैं&lt;br /&gt; मेरी चाची को देख कर किसी मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाएगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये बात उन दिनों की है जब मैं बाहर पढ़ाई किया करता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन मुझे मेरे घर से फोन आया कि मेरे ताऊ के लड़के की शादी फिक्स हो गयी हैअगले पंद्रह दिन में ही शादी है और काम बहुत ज्यादा हैजल्दी आने को कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं भी उस वक़्त फ्री ही था क्योंकि मेरी परीक्षाएं खत्म हो गयी थीं&lt;br /&gt; मैं अपने घर के लिए रवाना हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले ही दिन मैं अपने घर आ गया&lt;br /&gt; पर जब मैं घर में आया तो वहां कोई नहीं था सिर्फ मेरी सेक्सी चाची ही थीं&lt;br /&gt; उनके अलावा और कोई नहीं था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं अन्दर गया तो मैंने देखा कि यहां तो कोई नहीं है&lt;br /&gt; पर मुझे कहीं से कुछ आवाज सुनाई दे रही थी जैसे कोई बाथरूम में नहा रहा है और नहाने के साथ साथ वह गाना भी गुनगुना रहा है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे ये आवाज कुछ जानी पहचानी सी लगी&lt;br /&gt; फिर जब मैं उस आवाज के थोड़ा करीब को गया तो मैंने देखा कि घर में कोई के ना होने के कारण मेरी चाची एक कमरे के बाथरूम का दरवाजा खोलकर नहा रही हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनकी पायल व चूड़ियों की आवाज भी आ रही थी&lt;br /&gt; चाची को पहले से ही बजने वाली पायलें पहनना पसंद हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने काफी बार देखा था कि वे जब नहाने जाती थीं तो उनकी पायलें ही बता देती थीं कि वे नहा रही हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैंने हिम्मत करके कुछ और अन्दर को जाकर देखा तो पाया कि चाची मेरी तरफ अपनी गांड करके अपनी चूचियों को मसल रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उफ़ दोस्तो … मैं वह पल आपको लिख कर नहीं बता सकता … क्या मस्त उठी हुई गांड थी चाची की! &lt;br /&gt; मुझे तो बस ऐसा लग रहा था जैसे मेरे सामने खुद एंजेला वाइट खड़ी हो एकदम गोरी जांघें मांस से भरी हुईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं तो न्यूड चाची को देखता ही रह गया&lt;br /&gt; मेरे मन में काम वासना ने घर कर लिया था और ना जाने कब मेरा हाथ मेरे लंड के ऊपर जाकर उसको मसलने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा मन कर रहा था कि अभी यहीं चाची को कुतिया बनाकर बेहरमी से चोद दूँ पर मैंने खुद पर नियंत्रण बनाए रखा और वहां से दबे पांव बाहर निकल आया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर में चाची भी बाहर आ गईं&lt;br /&gt; उफ्फ़ यार … उन कपड़ों मैं भी चाची क्या मस्त पटाखा माल लग रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने चुस्त सलवार सूट पहना हुआ था जिसका गला काफी गहरा था&lt;br /&gt; नीचे पजामी थी जो उनकी गांड से एकदम टाइट चिपकी हुई थी&lt;br /&gt; उन्हें देख कर मेरी हालत फिर से खराब होने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मुझे देख कर एकदम से खुश हो गईं और मेरा हाल चाल पूछने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझसे बोलीं- तू बैठ जा … थक गया होगामैं तेरे लिए कुछ ठंडा लाती हूँ&lt;br /&gt; ये कह कर चाची किचन में चली गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनकी ठुमकती गांड देख कर मेरे अन्दर तो अब एक अलग ही हवसी दानव जग चुका था&lt;br /&gt; मैं भी चाची के पीछे पीछे चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझे देखती हुई बोलीं- तू चल कर आया है तो थक गया होगा बेटा वहीं आराम से बैठ कर टीवी देख&lt;br /&gt; मैंने भी सोचा कि आज चाची के साथ थोड़ी मस्ती कर लेता हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी और चाची की पहले से ही काफी अच्छी जमा करती थी&lt;br /&gt; हम दोनों काफी देर देर तक बातें किया करते थे; मतलब मेरी चाची मेरे साथ एकदम खुली हुई थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने इसी का फायदा उठाते हुए उनसे कहा- जब इतनी सुंदर लड़की मेरे साथ हो तो कैसे अकेला छोड़ दूँ! &lt;br /&gt; मैं हंस दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी ये बात सुनकर चाची भी मुस्करा दीं और बोलीं- हट बेशरम अब तू बड़ा हो गया हैअपनी चाची से ऐसे बोलेगा क्या! वैसे भी अब मेरी उम्र हो गयी है तू अपनी उम्र की लड़कियों को ढूंढ और उनसे ही फ़्लर्ट कर&lt;br /&gt; यह सब कह कर वे भी हंस दीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनकी बात सुनकर मैं बोला- चाची अगर में किसी लड़की को आपके बाजू में खड़ा कर दूँतब भी कोई आप दोनों में फर्क नहीं बता पाएगा कि आपकी उम्र कितनी हैसब यही बोलेंगे कि दो सहेलियां खड़ी हैं … सच कह रहा हूँ चाची आप अभी भी काफी जवान हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची अपनी आंखें झुकाती हुई मुस्कुराईं और बोलीं- तुझे बड़ा पता है इन सबके बारे में! वहां पढ़ने गया था या ये सब सीखने? &lt;br /&gt; मैंने कहा- चाची गया तो पढ़ने ही था पर आपकी याद ने पढ़ने नहीं दियारात रात भर बस आहें ही भरता रहा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बात पर चाची ने मेरी तरफ देखा और बोलीं- चल भाग इधर से मैं उधर ही चाय लाती हूँतू बहुत बिगड़ गया है बेटा … तेरा कुछ इलाज करना पड़ेगा … हम्म&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सुनकर मैं हंस दिया और चुपचाप बाहर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अभी मैं कुछ कहता कि इतनी देर में सब लोग वापस आ गए&lt;br /&gt; मैंने सबके पैर छुए और थोड़ी देर उनके साथ बातचीत करके अन्दर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा मन नहीं लग रहा था उस दिन का सोच सोच कर अब मेरी आंखों के आगे चाची की गांड और उनका वह गोरा व मस्त जिस्म आ रहा था जिसके कारण मेरा लंड इतना टाइट हो गया था मानो अभी फट जाएगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं अपने लौड़े को शांत करने ऊपर वाले स्टोर रूम में चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऊपर का यह स्टोर रूम बंद ही रहता था&lt;br /&gt; वहां पर पुराना सामान रखा रहता है&lt;br /&gt; मैं पहले वहीं मुट्ठी मारा करता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर एक खाट पड़ी थी&lt;br /&gt; मैं वहां जाकर अपने लंड को हिलाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी आंखों के सामने न्यूड चाची का सेक्सी बदन ही बार बार आ रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उफ़ दोस्तो झड़ने से इतना ज्यादा माल पहले कभी मेरे लौड़े से नहीं निकला था जितना आज चाची के नंगे जिस्म को देख कर आ गया था&lt;br /&gt; मैं जैसे ही उस रूम से बाहर निकला तो पसीने से पूरा लथपथ हो गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने देखा कि चाची ऊपर आकर रस्सी से सूखे कपड़े उतार कर ले जा रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने मुझे देख कर रोका और पूछा- यहां क्या कर रहा है तू … और इतना पसीने में क्यों? &lt;br /&gt; उसी वक्त उनकी नजर मेरी टांगों के बीच जा पड़ी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे कच्छे पर माल की बूंदें गिरी हुई थीं तो उनका हल्का सा धब्बा दिख रहा था&lt;br /&gt; मेरे लंड में अभी भी तनाव था&lt;br /&gt; चाची सब कुछ भांप चुकी थीं कि मामला क्या था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे बोलीं- चल नीचे चल कर खाना खाते हैं&lt;br /&gt; मैं चाचा के बारे में बताना भूल गया था कि मेरे चाचा बाहर जॉब करते हैं तो वे 6 महीने में ही एक बार आ पाते हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बार भी वे आकर जल्दी चले गए थे&lt;br /&gt; मेरी चाची उनके बिना घर में अकेली ही रहती हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने और चाची ने खाना खाया&lt;br /&gt; उसी वक्त मेरी मादरचोद नजरें बार बार चाची के उन बड़े बड़े मम्मों पर जा रही थीं जो मेरे लौड़े की मम्मी चोदने पर तुले हुए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा लंड मेरे शॉर्ट्स में ही कड़क होने लगा और हल्का हल्का दिखने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मेरी हालत को देख कर समझ गयी थीं कि इस बार ये लौंडा उनकी चूत में अपना माल झाड़ कर ही वापिस जाएगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब मेरी नजरें चाची की नजरों से टकराईं तो मैंने देखा कि चाची मुझे किसी कातिलाना और कामुक आंखों से देख रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे बोलीं- मैं तेरे लिए बनाना शेक बना कर लाती हूँतूने स्टोर रूम में बहुत मेहनत की है … और क्या पता कि आज रात भी करनी पड़ जाएआज तू मेरे घर में सोने आ जाना&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उफ़ दोस्तो … एक तो चाची की वह कातिलाना मुस्कान और ऊपर से मेरे दिल और लंड को खुश करने वाली बात सुनकर तो मैं एकदम से सातवें आसमान पर आ गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; रात में मैं चाची के घर आ गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मेरे लिए केले का शेक बनाकर लाईं&lt;br /&gt; मैंने देखा कि चाची मेरे लिए गिलास ऐसे ला रही थीं … जैसे आज हमारी सुहागरात हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझे गिलास देकर बाहर जाने लगीं और जाते जाते बोलीं- इसे पीकर मेरे ही रूम में आ जाना सोने के लिए! &lt;br /&gt; ये सुनकर तो मैं और भी खुशी से उछल पड़ा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने जल्दी से गिलास खत्म किया और चाची के कमरे में चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उस टाइम एक सिर्फ अंडरवियर पहनी थी&lt;br /&gt; वह वी-शेप वाली फ्रेंची थी&lt;br /&gt; उसमें से मेरा तनतनाता हुआ 8 इंच का लंड साफ साफ दिख रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे लौड़े को देख कर कोई भी महिला खुद को रोक नहीं सकती थी&lt;br /&gt; फ्रेंची के ऊपर से मैंने एक शॉर्ट पहना हुआ था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बिंदास चाची के रूम में घुसता चला गया&lt;br /&gt; अन्दर आते ही मैंने अपनी गांड से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पर मैंने देखा कि चाची तो उधर हैं ही नहीं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मुझे वही आवाज पुनः सुनाई पड़ी जो उस दिन चाची के नहाते समय आ रही थी&lt;br /&gt; मैं देखा चाची अन्दर थीं और वे शायद कपड़े बदल रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं कमरे में ही बैठा रहा और उनके आने का इंतजार करने लगा&lt;br /&gt; जैसे ही चाची ने रूम में कदम रखा आह क्या ही बताऊं … वह नजारा सोचते और लिखते हुए मेरे लंड की हर एक नस टाइट हो गयी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची एटम बम लग रही थीं&lt;br /&gt; उन्होंने एक रेशमी सी हल्के कपड़े वाली नाइटी पहन रखी थी जिसमें से उनके अन्दर की रेड कलर की ब्रा दिख रही थी और ब्रा के अन्दर कसे हुए दूध स्पष्ट दिख रहे थेनीचे नजर गई तो उनकी गहरी नाभि के नीचे एक छोटी सी डोरी से बंधी एक लाल रंग की पैंटी पहन रखी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा तो देख कर लंड उछाल मारने लगा&lt;br /&gt; वे इठलाती हुई मेरे करीब आकर बोलीं- क्या देख रहा है? ऐसे कभी कोई औरत नहीं देखी तूने? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने इसका जवाब उनकी आंखों में आंखें डालकर दिया- देखी तो बहुत हैं मगर ऐसी अप्सरा पहली बार देख रहा हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सुनते ही चाची के गाल किसी टमाटर की तरह शर्म से लाल हो गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो उस रात चाची की बंद चुत को किस तरह से मैंने चोद चोद कर ढीला किया वह सब सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; न्यूड चाची स्टोरी पर आप मुझे अपने मेल व कमेंट्स जरूर लिखें.</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:27:24 +0300</pubDate>
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<item><title> डांस प्रैक्टिस के बहाने मिली कुंवारी चूत</title>
<description>न्यू पुसी सेक्स कहानी में मेरी एक दोस्त की कॉलेज मेंहमें एक डांस कॉम्पीटिशन करना थावो मेरे घर प्रक्टिस के लिए आईउस सेक्सी लड़की को देख मेरा मन विचलित हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; नमस्कार दोस्तो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ। &lt;br /&gt; यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं सबसे पहले अपने बारे में बता देता हूँ— मेरी हाइट 55″ है और मैं दिखने में भी अच्छा हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह न्यू पुसी सेक्स कहानी 2 साल पहले की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक बार मेरे कॉलेज में कोई कॉम्पटिशन था। &lt;br /&gt; मुझे और मेरी एक दोस्त को कपल डांस करना था तो हम लोग प्रैक्टिस करने लगे। &lt;br /&gt; लेकिन हम लोग अच्छे से नहीं कर पा रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो एक दिन उसने बोला मैं तुम्हारे फ़्लैट पर आ जाऊँगी वहाँ करते हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस समय मैं घर से दूर फ़्लैट लेकर रहता था। &lt;br /&gt; अगले दिन वो मेरे फ़्लैट पर आई। &lt;br /&gt; वो एकदम अप्सरा लग रही थी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वैसे आपको उसके बारे में बता दूँ उसकी हाइट 53″ थी और मस्त फ़िगर था। &lt;br /&gt; वो दूध की तरह सफ़ेद थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हालाँकि उसके बूब्स थोड़े छोटे थे पर उसके चूतड़ बहुत बड़े थे एक बार देखने के बाद कोई भी पागल हो जाए! और उसका कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस दिन वो ब्लैक जींस और वाइट क्रॉप टॉप पहनी थी उसकी नाभि दिख रही थी। &lt;br /&gt; मैं देखते ही पागल हो गया मुश्किल से होश सम्भाला था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसको अंदर बुलाया और कोल्डड्रिंक पीने को दी। &lt;br /&gt; फिर उसको अपने रूम में ले गया जहाँ म्यूज़िक सिस्टम था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उससे पूछा कि कौन सा गाना चलाऊँ? &lt;br /&gt; उसने बोला कोई भी चला दो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो मेरे दिमाग़ में शरारत सूझी और मैंने ‘मोहब्बत बरसा देना तू सावन आया है चला दिया। &lt;br /&gt; उसने मेरी तरफ़ देखा और स्माइल कर दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम दोनों क़रीब आ गये और कपल की तरह उसने मेरी कमर में हाथ डाल लिया और मैंने उसकी कमर में। फिर एक हाथ पकड़ लिया और धीरे-धीरे डांस करने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसको देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए बोला मेरे पैरों पर खड़ी हो जाओ! &lt;br /&gt; वो एक बार तो शरमाई फिर एकदम से आकर मेरे पैरों पर खड़ी हो गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बूब्स मेरी चेस्ट से टच कर रहे थे और मेरा लंड उसकी चूत पर टच कर रहा था। &lt;br /&gt; शायद उसको मेरे लंड का अहसास हो गया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम एक दूसरे के ऊपर अपनी गरम साँसें छोड़ रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसको घूम जाने को बोला। &lt;br /&gt; वो बिना कुछ बोले घूम गयी उसके अंदर भी वासना जाग गयी थी। &lt;br /&gt; मेरा लंड उसके चूतड़ों के बीच फँस गया था और मैंने अपने हाथ उसके पेट पर रख दिए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने भी अपने हाथों को मेरे हाथ पर रख दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं धीरे-धीरे अपना हाथ उसके पेट पर चलाने लगा उसकी नाभि पर उँगली घुमाने लगा। &lt;br /&gt; उसकी तरफ़ से कोई विरोध न देखते हुए मेरी हिम्मत बढ़ गयी और हाथ थोड़ा अंदर की तरफ घुमाने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने स्पोर्ट्स ब्रा पहनी थी। &lt;br /&gt; मैं उसके बूब्स को टच करने लगा एक हाथ से और दूसरे हाथ से नाभि के नीचे घुमाने लगा। &lt;br /&gt; उसको भी बहुत मज़ा आ रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने अपने होंठ उसकी नेक पर रख दिए और चूमने लगा। &lt;br /&gt; वो एकदम से सिहर गयी और कसके पकड़ लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं किस करने लगा और काटने लगा साथ में एक हाथ उसके बूब्स पे घुमा रहा था और दूसरा उसकी जींस में डाल दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर ऐसे रहने के बाद वो घूम गयी और होंठ पर अपने होंठ रख दिए और हम लिप्स किस करने लगे। &lt;br /&gt; मैंने उसको किस करते-करते गोदी में उठाया और पास में रखी हुई टेबल पर बैठा दिया और उसकी टाँगें फैलाकर बीच में खड़ा हो गया और किस करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; 5-10 मिनट तक किस करने के बाद मैं नीचे आया और टॉप में से उसके बूब्स दबाने लगा और ऊपर की तरफ़ से किस करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसके टॉप को निकाल दिया। &lt;br /&gt; ब्रा में से उसके बूब्स हाफ़ बाहर दिखने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा और चूमने लगा। &lt;br /&gt; फिर मैंने उसकी ब्रा को उतार फेंका और अपने कपड़े भी उतार दिए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसके बूब्स चूसने लगा और निप्पल्स पर बाइट काटने लगा और दूसरे वाले को हाथ से दबा रहा था। &lt;br /&gt; बीच-बीच में उसके निप्पल्स को पिंच कर रहा था उसको मीठा दर्द हो रहा था। &lt;br /&gt; ऐसे ही 5 मिनट तक चलता रहा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसको वहाँ से उठाया और बेड पर ले गया और लेटा दिया। &lt;br /&gt; और पेट पर किस करने लगा और करते-करते नीचे आ गया और उसकी पैंट उतार फेंकी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस दिन उसने काली पैंटी पहन रखी थी&lt;br /&gt; क्या नजारा था वो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बैठ गया और पैंटी के ऊपर से किस करने लगा। &lt;br /&gt; फिर उसकी पैंटी को उतार दिया और चूत की साइड में किस करने लगा और काटने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; साइड में किस करते हुए उसके चूत के दाने को हाथ से रगड़ने लगा। &lt;br /&gt; फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी और किस करने लगा और नीचे से लेकर ऊपर तक चाटते हुए ले गया और चूत के दाने को भी चाटने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो बिल्कुल गरम हो चुकी थी। &lt;br /&gt; फिर मैं खड़ा हुआ और फ़्रीज़ के पास गया और फ़्रीज़ में से आइस क्यूब निकाली और उसके पेट पर रख दिया। &lt;br /&gt; फिर उस आइस क्यूब को होंठों से पकड़कर उसके शरीर पर घुमाने लगा—पहले उसके बूब्स पर फिर उसके होंठों के पास गया और आइस क्यूब को रखे हुए ही हम किस करने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर आइस क्यूब को रगड़ते हुए नीचे तक लाया और चूत पर रखकर चाटने लगा। &lt;br /&gt; वो इतना गरम हो चुकी थी कि झड़ गयी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसको अपना लंड चूसने का इशारा किया&lt;br /&gt; लेकिन वो मना करने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बड़ी मुश्किल से मैंने उसको मनाया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पहले तो उसने लंड पर किस की और फिर अच्छे से चूसने लगी। &lt;br /&gt; मुझे बहुत मज़ा आ रहा था पहली बार कोई मेरा लंड चूस रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर ज़्यादा देर ना करते हुए मैंने उसको लेटाया और चूत पर अपना लंड रब करने लगा। &lt;br /&gt; वो बड़ी मस्त आवाज़ें निकाल रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने थोड़ा झटका दिया और थोड़ा सा लंड अंदर गया न्यू पुसी सेक्स के कारण उसकी दर्द के मारे चीख निकल गयी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका भी फ़र्स्ट टाइम था वो सील पैक थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मैंने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए उसकी चीख अंदर दब गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने एकदम से झटका मारा और सारा लंड अंदर चला गया! &lt;br /&gt; मैं उसको मज़े से चोदने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर में दर्द कम होने के बाद वो भी मेरा साथ देने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर 5 मिनट तक उसको चोदने के बाद मैंने उसको डॉगी पोज़िशन में आने को बोला इस पोज़िशन में आओ! &lt;br /&gt; और उसकी चूत में लंड पेल दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सारा कमरा थाप-थाप की आवाज़ से गूँजने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चोदते-चोदते मैं उसके चूतड़ों पर चांटे मार रहा था उसके चूतड़ बिल्कुल लाल हो गये। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर अपने लंड को निकाला और लेट गया और उसको ऊपर आने का इशारा किया। &lt;br /&gt; वो मेरे लंड पर आकर बैठ गयी और उछलने लगी मैं उसके बूब्स दबाता रहा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर 20 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये। &lt;br /&gt; उस दिन हमने 3 बार चुदाई की। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम कॉलेज में जब तक रहे खूब मज़े किए। &lt;br /&gt; कॉलेज के बाद फिर हम कभी नहीं मिले। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो दोस्तो! ये थी मेरी पहली चुदाई की कहानी। कोई गलती हुई हो तो माफ़ करना पहली बार लिख रहा हूँ। &lt;br /&gt; और मुझे मेल करके बताएं कि कैसी लगी मेरी न्यू पुसी सेक्स कहानी! &lt;br /&gt;</description>
<link>https://mixrt.com/t2723</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:26:47 +0300</pubDate>
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<item><title>चाची की कसी चूत को चोदकर ढीला किया- 2</title>
<description>मेरी पहली सच्ची सेक्सी चाची फक स्टोरी में मैंने अपनी भरी पूरी माल जैसी दूधारू चाची को अपनी वासना का आभास करवाकर अपने लंड से उनकी चूत की गर्मी मिटाई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो मैं अजय राजपूत आपको वापस अपनी प्यासी चाची की चुदाई की कहानी में स्वागत करता हूँ&lt;br /&gt; कहानी के पहले भाग &lt;br /&gt; जवान सेक्सी चाची को नंगी देखा &lt;br /&gt; में अब तक आपने पढ़ लिया था कि चाची मुझसे चुदवाने के लिए मुझे अपने कमरे में बुला चुकी थीं और मैं उनके रूप की तारीफ कर रहा था जिससे वे शर्मा गई थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब आगे सेक्सी चाची फक स्टोरी: &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर चाची मुझे देखती हुई वासना भरी आवाज में बोलीं- अजय आज ये अप्सरा तेरी हैअगर इसे तूने खुश कर दिया तो तू ही मेरा देवता रहेगा हमेशा! &lt;br /&gt; ये सुनते ही मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा दोस्तो … मैं जो सुनना चाहता था वह सुनते ही मैंने उनको उनकी चिकनी गोरी कमर से पकड़ कर अपनी और खींच लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनके होंठों के नजदीक अपने होंठ ले जाकर बोला- चाची आपको कैसे पता है कि मैं इस सुख को पाने के लिए ही आपके पीछे पड़ा हूँ! &lt;br /&gt; वे गाली देती हुई बोलीं- भोसड़ी के जब से आया है तभी से कभी मुठ मार रहा है … तो कभी मेरे चूचे घूर रहा हैक्या मुझे पता नहीं चलेगा कि तुझे और तेरे लंड को क्या चाहिए? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सुनते ही मैंने उन्हें बांहों में भर लिया और उनके रसीले गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को चूसते हुए अपने एक हाथ से उनके चर्बीदार चूतड़ को मसलने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे भी मेरे होंठों को खाने लगी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों की गर्म सांसें बता रही थीं कि हम दोनों ही कितने ज्यादा प्यासे हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची एकदम जवान लौंडिया के जैसे मेरे होंठों से चिपकी हुई थीं&lt;br /&gt; कभी वे मेरी जीभ को चूसतीं तो कभी मैं उनकी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों का थूक एक दूसरे के मुँह में ऐसे आ जा रहा था जैसे मधुमक्खी शहद से चिपकी होती है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कम से कम 15 मिनट की चूमा-चाटी के बाद चाची का एक हाथ मेरे कड़क लंड पर आ गया जो किसी हथौड़े से कम नहीं था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लंड की सख्ती देख कर चाची ने मुझे बिस्तर पर धक्का देते हुए मेरे शॉर्ट को उतार दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने मेरा वी-शेप वाली फ्रेंची को देखा तो वे चौंक गईं क्योंकि उसमें मेरा लंड इतना तनाव में था कि किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पहले तो चाची कुछ नहीं बोलीं&lt;br /&gt; वे मेरी फ्रेंची के ऊपर से ही मेरे लंड की सुगंध को सूंघने लगीं और एकदम से चाटने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने मेरे लौड़े को चड्डी के ऊपर से ही तब तक चाटा जब तक वह पूरा थूक से सन न गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उफ़ … चाची की जुबान कच्छे के ऊपर से इतनी मस्त चल रही थी कि मैं बस यही सोचने लगा था कि मेरे नंगे लौड़े का हश्र होगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सब सोच सोच कर मेरा तो हाल बेहाल हो गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी चाची ने मेरी चड्डी को अपने मुँह से खींचते हुए नीचे उतार दिया मेरे 8 इंच के तने हुए लौड़े को चड्डी की कैद से आजाद कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लंड किसी तम्बू के बांस की तरह खड़ा हो गया था और गुस्से से फनफना रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची लंड का ये रूप देख कर हैरान हो गई थीं और वे अपनी आंखें खोल कर चौंक गयी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे उसे अपने बालिश्त से नापती हुई बोलीं- भेनचोद रंडी के … साले इतने दिन से कहां था तू इस दानव जैसे लंड को अपनी रंडी चाची से कहां छुपा रखा था? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची के मुँह से इस तरह की भाषा को सुनते ही मेरा जानवर और ज्यादा ऐंठ गया और मैं उनके एक दूध को मसलते हुए बोला- कुतिया साली रांड … लगता है काफी चुदासी होकर भटक रही है लंड के लिए … आज मेरा ये लंड तेरी टांगों के बीच जाकर तेरी सारी गर्मी निकाल देगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची ने मेरे मुँह से यह सब सुना तो वे लपक कर मेरे लौड़े को अपने मुँह में लेने लगीं&lt;br /&gt; मैं भी अपना लंड उनके हलक तक जबरदस्ती डालने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे किसी जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी थीं और मेरी जांघों को भींच रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मेरे लंड को अपने मुँह के अन्दर से निकालने की कोशिश कर रही थीं&lt;br /&gt; मगर मेरी जोरदार पकड़ ने चाची को मुँह से लंड नहीं निकलने दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनके मुँह को अपने लंड की लंबाई का अंदाजा करवा कर ही अपने लंड को बाहर किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे लौड़े की चोट उनके गले के अंतिम छोर तक लग रही थी तो उनके मुँह से सिर्फ थूक बहा जा रहा था और वे किसी रंडी की तरह हांफती हुई कुतिया लग रही थी&lt;br /&gt; वे जोर जोर से सांस लेती हुई बोलीं- साले रंडी के जने जान से मारेगा क्या अपनी चाची को! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं ये सुनते हुए उनके मुँह के करीब गया ओर होंठों को चूसते हुए बोला- साली छिनाल … मैं तो बस ये दिखा रहा था कि मेरा लंड कितना बड़ा है! &lt;br /&gt; मेरे मुँह से ये सुनते ही चाची बोलीं- साले तेरा लंड तेरे चाचा से बहुत बड़ा हैतेरे चाचा का तो इससे आधा भी नहीं है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह कह कर चाची ने वापिस मेरे लंड को अपने मुँह की गहराई में भर लिया और गुप्प घुप्प करके चूसने चाटने लगीं&lt;br /&gt; उफ़ यार क्या मस्त लंड चाट रही थीं चाची … किसी उम्दा किस्म की रंडी की तरह … ऐसा लग रहा था जैसे वे पहले किसी कोठे पर काम करती रही हों&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची के 20 मिनट लंड चूसने के बाद में अपनी चरम सीमा पर आ गया&lt;br /&gt; मैंने चाची को बिना बताए उनके मुँह में ही अपना सरा माल झाड़ दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने भी मेरे वीर्य को ऐसे पिया जैसे कोई गन्ने का रस पी रही होंउन्होंने वीर्य की एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लंड चूस कर वे मेरे बगल में लेट गईं और अपनी चिकनी बगल की महक सुंघाने लगीं&lt;br /&gt; उस गंध को सूंघ कर मैं थोड़ी ही देर बाद पुनः गर्म होने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैं चाची के ऊपर चढ़ गया और उनके बड़े बड़े मम्मों से खेलते हुए ऐसे चूसने लगा था जैसे मेरे आगे कोई बड़े बड़े रसीले आम लटके हों जिनमें से ढेर सारा रस निकल रहा हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दूध चूसने के बाद मैं नीचे को सरका और मेरी जुबान चाची की नाभि में चलने लगी&lt;br /&gt; मैं उसे खूब मस्ती से चाटने लगा&lt;br /&gt; चाची के पूरे जिस्म मैं एक अलग ही किस्म का करंट दौड़ने लगा था&lt;br /&gt; वे बिस्तर पर पूरी नागिन के जैसे मचलने लगी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनके मुँह से मदभरी सिसकारियां निकलने लगी थीं ‘उफ्फ़ आह चाट अजय आह साले तूने ये सब कहां से सीखा मेरे राजा… इतना मस्त मजा देता है तू तो … तेरे चाचा ने आज तक कभी ऐसे नहीं कियाआज से इस जिस्म पर सिर्फ तेरा हक़ है … चाट अपनी चाची का जिस्म आह! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सुनते सुनते मैं पागलों की तरह नाभि चाटते हुए उनकी भट्टी जैसी गर्म लावा टपकती चूत में अपनी लम्बी जुबान को रगड़ने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उफ्फ् … उनकी उस चूत का स्वाद अभी भी मेरे मुँह में ही आ रहा है … क्या मस्त नमकीन स्वाद था यार जैसे मै कोई स्ट्रॉबेरी खा रहा हूँ या उसका जूस पी रहा हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसे ही उनकी चूत को दस मिनट चाटने के बाद चाची की चूत ने इतना गाढ़ा लावा छोड़ा मेरे मुँह में कि मजा ही आ गया&lt;br /&gt; मैं उस रस को पूरा पी गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर चाची ने मेरा सर अपनी चूत में एकदम से दबा रखा था&lt;br /&gt; वे अपने दोनों पैरों को अकड़ाती हुई मुझे दबाने लगी थीं और अचानक से वे निढाल हो गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पर मैं कहां रुकने वाला था&lt;br /&gt; मेरा लौड़ा तो चाची की चूत के रस की महक से एकदम तन गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने झट से पोज बनाया और अपने 8 इंच के लंड को चाची की उस नरम चुदासी चूत के छेद में रगड़ने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची भी लंड की गर्मी से पुनः गर्म होने लगीं&lt;br /&gt; वे बोलीं- अब मत तड़पाओ राजा अपनी इस प्यासी रंडी चाची की आग को बुझा दो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सुनते ही मेरे अन्दर जोश बढ़ गया और मैंने अपने लंड का टोपा चाची की चूत में घुसेड़ दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अभी चाची सुपारे की मोटाई को समझ पातीं कि मैंने दूसरे झटके में अपना पूरा लंड चाची की टाइट चूत में पेल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा समूचा लंड चाची की चूत में जाते ही उनकी आंख से आंसू निकल आए&lt;br /&gt; और वे जोर से चीखती हुई मुझे गाली देने लगीं- आह भोसड़ी के मर गयी मादरचोद रंडी के जने … आह निकाल अपना लंड आह बहुत दर्द हो रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझे पीछे धकेलने लगीं पर मेरे अन्दर तो अब हवस का जानवर जाग चुका था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था&lt;br /&gt; बल्कि चाची के होंठों को चूसते हुए उन्हें प्यार करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर धीरे धीरे चाची खुद अपनी गांड हिलाती हुई मेरा लंड चूत में लेने लगीं&lt;br /&gt; उनकी हरकत से मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया&lt;br /&gt; अब मैंने भी अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची के दोनों चूचों को चूसते हुए मैं अपनी स्पीड बढ़ाने लगा जैसे जैसे मेरी स्पीड बढ़ने लगी … चाची की भी सिसकारियां तेज होती गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझे अपना आशिक़ समझ कर मुझे चूमने लगीं और मेरा लंड भी पूरा जोश में आ गया था&lt;br /&gt; मैंने अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए चाची की चूत को इस बेकदरी से चोदा कि वे दस मिनट के अन्दर मेरे लंड पर झड़ गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा लंड अभी भी सांड के लंड के जैसे अकड़ा हुआ था और उनकी चूत का भोसड़ा करने में लगा रहा&lt;br /&gt; कभी मैं उन्हें उठा कर चोदने लगता तो कभी पटक कर उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें चोदने लगता&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची हांफती हुई मुझसे बोलीं- मेरे बस की और नहीं हैअब रहम कर मुझे छोड़ दे कमीने&lt;br /&gt; मैंने कहा- अभी क्या हुआ चाची? अभी तो मेरे लंड ने आधी चुदाई भी नहीं की है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे बोलीं- साले आधा घंटा से चोद रहा है और मैं इतनी देर में दो बार झड़ चुकी हूँ&lt;br /&gt; मगर सेक्सी चाची फक करते हुए मेरा अभी तक नहीं हुआ था तो मैंने भी देरी ना करते हुए जैसे ही अपनी स्पीड बढ़ा दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची की चूत से मूत की धार छूटने लगी&lt;br /&gt; उनकी मूत की धार निकलने के बाद 5 मिनट के अन्दर मैं भी उनकी ही चूत में झड़ कर उनके ऊपर निढाल होकर गिर गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मेरे सर को सहलाती हुई तेज तेज सांसें लेती हुई हांफ रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों की सांसें इतनी तेज़ चल रही थीं कि एक दूसरे की दिल की धड़कन तक सुनाई पड़ रही थी&lt;br /&gt; हम पसीने से पूरा तरबतर हो गए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने चाची की तरफ प्यार से देखा तो वे भी काफी खुश नज़र आ रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; क्योंकि ना जाने कितने महीनों बाद उन्हें एक मर्द का लंड मिला था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा- मजा आया? &lt;br /&gt; वे हंस कर बोलीं- एक बार में ही चुत ढीली कर दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस रात मैंने चाची को चार बार चोदा और उनकी चुत की न केवल आग बुझा दी बल्कि कचौड़ी सी सुजा दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस दिन के बाद अब जब भी चाची की चुत में लंड की जरूरत होती वे मुझे बुला लेतीं और मेरे फोन करने पर भी आ जातीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों ने तमाम होटलों और दोस्त के फ्लैट में और ना जाने कहां कहां सेक्स किया&lt;br /&gt; तब से वे मेरी चाची कम बाजारू रंडी ज्यादा बन चुकी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो मैं यहां पर एकदम नया हूँये मेरी पहली सेक्स कहानी है&lt;br /&gt; आपको मेरी सेक्सी चाची फक स्टोरी पसंद आयी होगी&lt;br /&gt; प्लीज जरूर बताएं.</description>
<link>https://mixrt.com/t2722</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:26:10 +0300</pubDate>
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<item><title>ट्रेन में मेरी बीवी की गैरमर्द से चुदाई- 1</title>
<description>कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी में मैं अपनी बीवी के साथ स्टेशन पर थाहमारी सीट कन्फर्म नहीं थीएक आदमी मेरी बीवी को घूर रहा था मतलब उसे चोदना चाहता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हाय दोस्तो नमस्कार … मैं पहली बार एक कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी लिख रहा हूं जो एकदम सच्ची है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक बार मैं अपनी बीवी सीमा के साथ दिल्ली जा रहा था&lt;br /&gt; मेरे पास वेटिंग टिकट था और जाना जरूरी था&lt;br /&gt; मेरे साथ मेरा एक साल का लड़का भी था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; गर्मी बहुत थी तो मैं सोच रहा था कि यदि सीट नहीं मिली तो बहुत दिक्कत होगी&lt;br /&gt; वाराणसी स्टेशन पर भीड़ बहुत थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम लोग वेटिंग रूम में बैठे हुए थे&lt;br /&gt; पास में एक आदमी बैठा था वह मेरी बीवी को बड़े ध्यान से देख रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी बीवी ने साड़ी पहन रखी थी&lt;br /&gt; उसका गदराया हुआ जिस्म उसको आकर्षित कर रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस आदमी ने मुझसे पूछा- कहां जा रहे हैं? &lt;br /&gt; मैंने बताया कि दिल्ली&lt;br /&gt; उसकी आंखों में चमक आ गई उसने कहा कि मैं भी दिल्ली जा रहा हूं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने पूछा कि आपकी सीट किस बोगी में है? &lt;br /&gt; मैंने कहा कि हम लोगों का वेटिंग का टिकट है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा कि मेरा टिकट कन्फर्म टिकट है दो लोगों का … लेकिन मेरी बीवी की तबियत अचानक खराब हो गई इसलिए वह नहीं जा रही हैआप लोगों में से कोई एक चाहे तो उसकी सीट पर जा सकता है&lt;br /&gt; यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी ट्रेन के आने का समय हो गया और सब लोग ट्रेन में बैठने लगे&lt;br /&gt; उसका टिकट वन टियर एसी कोच का था जिसमें एक केबिन में दो सीट थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला कि हम लोगों का एसी टू टियर का वेटिंग है तो फर्स्ट एसी में कैसे जा सकते हैं? &lt;br /&gt; हम दोनों टॉयलेट के पास आकर बात करने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा- एक उपाय है एक टिकट मेरी बीवी के नाम पर हैआप चाहो तो मेरी वाइफ के नाम पर आपकी बीवी जा सकती हैलेकिन आपको कहीं और बैठना पड़ेगा&lt;br /&gt; मैं मजबूर और लाचार था सो मैंने उससे कहा कि मैं अपनी बीवी को अकेले कैसे किसी अनजान के पास छोड़ सकता हूं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा- यही एक उपाय है आपको अपनी बीवी पर विश्वास करना चाहिएमैं ऐसा कुछ नहीं करूंगा … जब तक वह ना चाहे&lt;br /&gt; यह सुनकर मैं अन्दर से रोमांचित हो उठा और मैंने कहा कि वह भोली भाली सीधी औरत हैवह कभी भी किसी अनजान आदमी से सेक्स नहीं करेगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने जरा खुलते हुए कहा- आपको कैसे पता है कि उसका मन दूसरे से पेलवाने का नहीं है? &lt;br /&gt; मैंने कहा कि मैंने बहुत बार उससे पूछा कि तुम मेरे सामने किसी गैर आदमी से सेक्स कर लो मगर वह हर बार मना कर देती है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह आदमी हंसने लगा और उसने कहा कि तुम मेरी बात का बुरा मत मानना आज वह पक्का चुदवाएगीमुझे पूरा विश्वास हैऐसी औरतों को मैंने खूब पेला हैमैंने उसको देखते ही मन बना लिया था इसीलिए आपको अपने साथ चलने के लिए कहा था&lt;br /&gt; मैं बहुत खुश था लेकिन मुझे अपनी बीवी को किसी गैर मर्द से चुदते हुए देखना था तो मैंने उस आदमी से कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने प्लान बनाया और अपना फोन नंबर दे दिया&lt;br /&gt; उसने कहा कि तुम हम दोनों की बात फोन पर सुनना जब वह पिलवाने को तैयार हो जाए तो आगे का प्लान बनाऊंगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैं उस आदमी को वहीं रोक कर उसके केबिन में चला गया&lt;br /&gt; जब मैं केबिन में गया तो देखा कि बीवी मुन्ना को दूध पिला रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा- कहां चले गए थे? &lt;br /&gt; ‘मैं बोगी में देखने गया था कि कहीं कोई और जगह है या नहीं … बहुत भीड़ है सब जगह एकदम पैक हैऐसे में जाना बड़ा मुश्किल लग रहा है. &lt;br /&gt; वह कुछ नहीं बोली बस मुन्ने को दूध पिलाती रही&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा- कहां गया वह आदमी? &lt;br /&gt; वह बोली- पता नहीं जब आप गए थे तभी वे भी चले गए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी वह आदमी अन्दर आ गया&lt;br /&gt; उसे देख कर पत्नी ने मुन्ने को दूध पिलाना छोड़ दिया और ब्लाउज का बटन बंद करने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; प्लानिंग के हिसाब से वह बोला- टीटी आ रहा हैआप बाहर चले जाइएजब वह चला जाए तो आ जाइएगा … और इनको भी बता दीजिए कि जैसा मैं कहूं वैसे ही टीटीई को बताएं&lt;br /&gt; मैं बीवी को इशारा करके बोला- जैसा ये कहें तुम वैसे ही करना&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह कह कर मैं बाहर निकल आया और मैंने उसे कॉल भी कर दिया&lt;br /&gt; उसने कॉल रिसीव करके मोबाइल छोड़ दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उन दोनों की बातचीत को सुनने को उतावला था&lt;br /&gt; तभी उस आदमी की आवाज़ आई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह बोला- मैडम बाहर भीड़ बहुत है&lt;br /&gt; ‘हां बहुत भीड़ है यदि आप सहायता नहीं करते तो हम लोग परेशान हो जाते. &lt;br /&gt; ‘कोई बात नहीं मैं आप लोगों की परेशानी देख कर तैयार हो गया. &lt;br /&gt; ‘थैंक्यू. बीवी ने बोला&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आदमी- आपका नाम क्या है? &lt;br /&gt; बीवी- सीमा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘बहुत ही सुन्दर नाम है जैसी आप हैं ठीक वैसा ही नाम है! &lt;br /&gt; बीवी ने हंसते हुए ‘थैंक्यू. कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘आज पूरे सफर में आप मेरी बीवी के नाम पर रहेंगी उसका नाम सिंधु सिंह है! &lt;br /&gt; ‘क्यों? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘क्योंकि यह सीट उसी के नाम पर है न … अगर टीटी जान जाएगा तो आपको बाहर कर देगा और सीट किसी और को अलॉट कर देगा. &lt;br /&gt; ‘ओह फिर तो हम लोगों को बहुत दिक्कत होगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां … और मैं नहीं चाहता कि आप लोगों को परेशानी हो. &lt;br /&gt; ‘आपकी बीवी क्यों नहीं आई? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘वह अपने मायके गाजीपुर से आ रही थी लेकिन वह अभी सैदपुर में जाम में फंसी हैइसी लिए उसको मैं मना कर दिया हैवह कल अपने भाई के दूसरी ट्रेन से आ जाएगी. &lt;br /&gt; ‘आप कहां से आ रहे हैं? &lt;br /&gt; ‘आसाम से मैं मिलिट्री में हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी टीटी आ गया और उसने केबिन का दरवाजा खटखटाया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस आदमी ने दरवाजा खोला&lt;br /&gt; ‘सर प्लीज टिकट दिखाइए? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; टीटी टिकट देखते हुए बोला- मनीष सिंह? &lt;br /&gt; ‘हां सर! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘सिंधु सिंह? &lt;br /&gt; ‘जी मै! यह आवाज मेरी बीवी की आई थी&lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; टीटी चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उन लोगों की बातें कॉल पर सुन रहा था&lt;br /&gt; तभी बच्चे की रोने की आवाज आई … तो बीवी की आवाज आई- अभी दूध पिए हो ना&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- अरे क्यों रुला रही हैं बच्चे को और पिला दीजिए न! &lt;br /&gt; ‘अरे बदमाश है अभी पिया है इसने.‘ &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी बीवी ने हंसते हुए कहा और वह शायद मुन्ने को दूध पिलाने लगी थी क्योंकि बच्चे की आवाज आना बंद हो गई थी&lt;br /&gt; यह सुन कर मैं रोमांचित हो गया और मनीष को कॉल पर निर्देश देने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह अपने कान में इयर लीड लगा कर मेरी बात को सुन सकता था&lt;br /&gt; ‘दूध पिला रही है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह धीरे से बोला- हुं&lt;br /&gt; ‘क्या उसकी चूची दिख रही है? &lt;br /&gt; ‘हूँ. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला कि पूछो कि कितने बच्चे हैं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने पूछा- सिंधु जी आपके कितने बच्चे हैं? &lt;br /&gt; ‘कौन सिंधु? मेरी बीवी की आवाज आई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘अरे आप भूल गईं! &lt;br /&gt; वह हंसने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘पूरे सफर में मैं आपको इसी नाम से पुकारूंगा! &lt;br /&gt; ‘ओके … दो बच्चे हैं एक घर पर है वह 6 साल की बच्ची है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मनीष के कान में कहा- कहो कि लगता नहीं है कि आप दो बच्चों की मां हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- आपको देख कर नहीं लग रहा है कि आप दो बच्चों की मां हैं? &lt;br /&gt; यह उसने हंसते हुए कहा था तो मेरी बीवी सीमा मुस्कुराती हुई बोली- कैसे? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं मनीष से बोला कि कहो आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैंडरो मत मैं हूं ना! &lt;br /&gt; मनीष- देखने में आपकी चूचियां बहुत टाइट लग रही हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बात पर मेरी बीवी कुछ नहीं बोली&lt;br /&gt; मैंने मनीष से कहा- उससे सॉरी बोल दो और कहो कि लगता है आप बुरा मान गईं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘लगता है आप बुरा मान गई हैं? &lt;br /&gt; ‘देखिए मेरे पति बहुत शक्की दिमाग के हैंअगर इस तरह की बात सुन लेंगे तो वे हम पर शक करने लगेंगे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘मैं तो उनको जानता भी नहीं … और न ही उनका मेरे पास नंबर हैकौन बताएगा? &lt;br /&gt; वह बोली- हो सकता है कि केबिन के बाहर आकर कान लगा कर सुन लें&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां हो तो सकता है? ऐसा है कि आप पूछ लीजिए न वे इस वक्त कहां हैं? &lt;br /&gt; ‘हां यह ठीक है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब शायद मेरी बीवी मुझे कॉल करने जा रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मनीष से कहा- तुम कहो कि कॉल ना करें आप शौच के बहाने जाकर देख लीजिए कि वे कहां हैं? &lt;br /&gt; ‘मैडम ऐसा है कि आप कॉल मत करिए वे किसी और बोगी में होंगे तो अभी आ जाएंगेअभी उनको रहने दीजिएशौचालय के बहाने से जाइए और देख लीजिए कि वे आस पास तो नहीं हैं? &lt;br /&gt; ‘ठीक है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘बाबू को मुझे दे दीजिए वह मेरे साथ खेल लेगा. &lt;br /&gt; ‘हां लीजिए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह बच्चे को देकर चली गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं ये सब बात सुन रहा था और केबिन से दूर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैंने मनीष कहा कि भाई लगता है कि लाइन पर आ रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा- हां भाई एकदम रेडी है और पक्के में अपनी चूत मुझसे पेलवाएगीआप क्या चाहते हैं? &lt;br /&gt; मैंने कहा- भाई मैं तो चाहता हूं कि तुम उसे इतना पेलो कि वह पानी पानी हो जाए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी बीवी मुझे देखने ट्रेन बाहर गई थी कि कहीं मैं उनकी बातें तो नहीं सुन रहे हैं&lt;br /&gt; इधर मैं और मनीष फोन पर बात कर रहे थे और चुदाई की प्लानिंग बना रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मेरी बीवी वापस केबिन में आ गई&lt;br /&gt; मैं शांत हो गया और उनकी बातचीत सुनने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- क्या हुआ दिखाई दिए? &lt;br /&gt; सिंधु- नहीं वे टॉयलेट के पास भी नहीं थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- मैंने कहा था ना कि दूर किसी दूसरी बोगी में जगह ढूंढ रहे होंगे&lt;br /&gt; सिंधु- आपकी बीवी आपके साथ नहीं रहती हैं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘नहीं मैं आर्मी में सैनिक हूं अक्सर हम लोग बॉर्डर पर रहते हैंऐसे में परिवार रखना मुश्किल रहता है. &lt;br /&gt; ‘ओह फिर तो आप लोग बहुत कष्ट सहते हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां हम लोगों को औरत को देखे महीनों हो जाते हैं बॉर्डर पर सिर्फ चिड़िया और कुछ जानवर ही वह सब करते हुए दिखाई देते हैं? &lt;br /&gt; ‘क्या करते दिखाई देते हैं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने बिंदास कह दिया- फकिंग&lt;br /&gt; इस पर सीमा ने हंस कर कहा- आप भी बड़े मजाकिया है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- अब क्या करें उन्हीं की चुदाई देख कर अपना मन शांत कर लेते हैं&lt;br /&gt; ‘हां बताइए … कितना कष्ट सहते हैं आप लोग सुख के लिए तरसते रहते हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां बहुत … कुछ मिलता ही नहीं है. &lt;br /&gt; यह मनीष ने हंसते हुए कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘कितने दिनों बाद जा रहे हैं घर? &lt;br /&gt; ‘छह महीने बादकितने अरमान जुटा कर फर्स्ट क्लास में मैंने अपने साथ बीवी के साथ रिजर्वेशन कराया था. &lt;br /&gt; ‘ओह … हंसती हुई बोली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर वह बच्चे को डांटती हुई कहने लगी- फिर से भूख लग गई क्या? &lt;br /&gt; ‘क्यों डांट रही हैं कम से कम उसका तो पेट भर दीजिए! &lt;br /&gt; मनीष ने हंसते हुए कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ठीक है लो पियो! वह बच्चे को दूध पिलाने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं मनीष से बोला कि क्या उसकी चूची दिख रही है? &lt;br /&gt; ‘हां. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- भाई क्या तुम्हारा लंड खड़ा हो रहा है? &lt;br /&gt; ‘हां! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘तुम बातचीत आगे बढ़ाओ और ऊपर से लंड सहलाते रहो. &lt;br /&gt; ‘हूं. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष- मैडम मैं आपको क्या बताऊं आज मेरी बीवी होती तो 6 महीने का कसर सारी रात निकालता! &lt;br /&gt; ‘अच्छा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘लगता है कि दो दिन और बेचारे को इंतजार करना पड़ेगा! &lt;br /&gt; उसने शायद अपने खड़े लंड के ऊपर हाथ फेरते हुए यह कहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘कोई बात नहीं दो दिन और बर्दाश्त कर लीजिए. बीवी ने हंसते हुए कहा&lt;br /&gt; ‘हां मन को मना रहा हूं लेकिन ये नहीं मान रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने लोअर के ऊपर से लंड को मुट्ठी में पकड़े हुए कहा और यह मुझे भी बताया&lt;br /&gt; मेरी बीवी शर्माती हुई हंसने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो मेरी बीवी का मूड बनने लगा था और आज वह चलती ट्रेन में एक गैर मर्द के लौड़े से चुदने के लिए बेचैन होने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले भाग में मैं आपको अपनी बीवी की गैर मर्द से चुदाई की कहानी लिखूँगा आप कमेंट्स करके जरूर बताएं कि आपको मेरी कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी कैसी लग रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुकोल्ड मैन वाइफ स्टोरी का अगला भाग:</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:25:33 +0300</pubDate>
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<item><title>टैक्सी ड्राइवर से चुदने में आया बड़ा मज़ा</title>
<description>भाभी क्रेजी सेक्स स्टोरी में मैं शादी के पहले खूब चुदी हूँ। अब भी मुझे नए लंड की तलब लगी रहती हैमेरी जॉब के कारण मुझे काफी घूमना होता हैएक दिन टैक्सी ड्राईवर मुझे पसंद आ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा नाम रेशमा है। मैं 32 साल की एक गदराए बदन की खूबसूरत सेक्सी और हॉट महिला हूँ। &lt;br /&gt; मैं पढ़ी-लिखी हूँ इंग्लिश फर्राटेदार बोलती हूँ और बोल्ड हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे सेक्स का जबरदस्त शौक है। &lt;br /&gt; सेक्स ही मेरी ज़िन्दगी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आज मैं आपको अपनी एक सच्ची भाभी क्रेजी सेक्स स्टोरी सुना रही हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब मैं कॉलेज में एक स्टूडेंट थी तब खूब मस्ती किया करती थी। &lt;br /&gt; अपनी फ्रेंड्स के साथ खूब एन्जॉय करती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे अश्लील बातें करने का बड़ा शौक था और आज भी है। &lt;br /&gt; जब तक मेरे मुंह से लण्ड बुर चूत भोसड़ा बहनचोद मादरचोद भोसड़ी वाले नहीं निकलता तब तक मुझे मज़ा नहीं आता था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इन्हीं सब बातों से मैं कॉलेज में बड़ी मशहूर हो गई थी और लड़के अक्सर मेरे आगे-पीछे घूमा करते थे। &lt;br /&gt; मैं इतनी बोल्ड थी की मैं सेक्स करने का कोई भी मौका बर्बाद नहीं करती थी बल्कि उसका पूरा-पूरा फायदा उठाती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे यह बताने में कोई शर्म नहीं है कि मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। &lt;br /&gt; मुझे लण्ड पकड़ने का जबरदस्त शौक हो गया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शादी के बाद ही मैं हिमाचल चली आई और अपने पति के साथ रहने लगी। &lt;br /&gt; इसी बीच मेरी तरक्की भी हो गयी। &lt;br /&gt; मेरा आना-जाना और बढ़ गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं किराये की टैक्सी करके अक्सर 120 किलोमीटर दूर चण्डीगढ़ जाने लगी। &lt;br /&gt; वहां से हवाई जहाज़ से बड़े-बड़े शहरों में जाने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक बार मेरी नज़र एक टैक्सी वाले पर पड़ी। &lt;br /&gt; वह टैक्सी वाला मुझे बड़ा सेक्सी और हॉट लगा। &lt;br /&gt; उसे देखकर मेरी चूत में पानी आ गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसे पास बुलाया और कहा चण्डीगढ़ चलोगे? &lt;br /&gt; वह तैयार हो गया। &lt;br /&gt; वह मुझे बिठाकर कार चलाने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अचानक मैंने पूछा तेरा नाम क्या है टैक्सी वाले? &lt;br /&gt; वह बोला बलराम है मेरा नाम। मैं इसी गाँव का रहने वाला हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा और क्या करते हो? &lt;br /&gt; उसने कहा सिर्फ टैक्सी ही चलाता हूँ मेम। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे उसका गोरा तंदुरुस्त बदन बड़ा अच्छा लग रहा था। उसकी मस्त भुजाएं और चौड़ी छाती मेरा मन मोह रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा तेरी उम्र क्या है और आपकी शादी हुई कि नहीं? &lt;br /&gt; वह बोला मैं 25 साल का हूँ जिम करता हूँ और अभी कुंवारा हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सुनकर मेरी चूत बुर चोदी चुलबुलाने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं कार में बैठी-बैठी उसके लण्ड के बारे में सोचने लगी। &lt;br /&gt; मैंने अनुमान लगाया कि बन्दे का लण्ड बड़ा जबरदस्त होगा; मिल जाए तो मज़ा आ जाए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यहाँ कौन भोसड़ी वाला मुझे देख रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं इसी उधेड़बुन में चली जा रही थी कि तभी अचानक एक कस्बे के पास कार रुक गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा तो बलराम बोला मेम गाड़ी ख़राब हो गयी है। लगता है कुछ प्रॉब्लम है। &lt;br /&gt; मैंने कहा अच्छा तुम गाड़ी बनवा लो मैं यहीं इसी होटल में रुक जाती हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने होटल में चेक-इन किया और बिस्तर पर लेट गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 3 घंटे के बाद वह आया और बोला मेम चलिए गाड़ी ठीक हो गयी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा नहीं बलराम! अब आज नहीं जाऊंगी मेरा मूड नहीं है। रात में यहीं रुकूंगी कल सवेरे चलूंगी। मैंने बगल में तेरे लिए रूम बुक करा दिया है। तुम भी आराम करो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह अपने कमरे में चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद मैंने उसे बुलाया और कहा बलराम यहाँ कोई मालिश करने वाला मिलेगा? मेरी कमर में बड़ा दर्द हो रहा है। &lt;br /&gt; वह बोला यहाँ तो कोई नहीं मिलेगा मेम वैसे कहो तो मैं मालिश कर दूँ? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा तुम्हें मालिश करना आता है? &lt;br /&gt; वह बोला जी हाँ आता है! पहले मैं एक सेठ के यहाँ काम करता था और तब सेठानी की मालिश भी करता था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा अरे वाह! तो फिर तुम ही मालिश कर दो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह आगे बढ़ा तो मैंने टोका नहीं-नहीं ऐसे नहीं! पहले अपने कपड़े उतारो क्योंकि तेरे कपड़े मेरे बदन पर चुभेंगे। नीचे चड्डी पहने हो न? &lt;br /&gt; वह बोला हाँ पहना हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोली फिर क्या सारे कपड़े उतारकर चड्ढी पहने-पहने मेरी मालिश करो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने जब कपड़े उतारे तो मैं उसका गोरा-गोरा नंगा बदन देखकर उस पर मोहित हो गयी। &lt;br /&gt; उसकी चौड़ी छाती और उस पर बाल बड़े सेक्सी लग रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने तेल की शीशी थमा दी और अपना पेटीकोट थोड़ा नीचे खसकाकर बोली लो अब करो मालिश। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं ऊपर केवल ब्रा पहने हुई थी। &lt;br /&gt; वह तेल हथेली में लेकर मेरी कमर की मालिश करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके मालिश करते ही मेरी चूत साली अपने आप गीली हो गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने जिस तरह शुरू किया मैं समझ गयी कि इसे मालिश करने का तज़ुर्बा है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं धीरे-धीरे अपना पेटीकोट नीचे खसकाती गयी और मज़ा लेती गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर क्या वह मेरे चूतड़ों तक पहुँच गया। मेरी नज़र उसकी चड्डी पर पड़ी। &lt;br /&gt; चड्ढी का उभार साफ़-साफ़ बता रहा था कि उसका लण्ड अंदर ही अंदर कसमसा रहा है और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा उत्साह बढ़ने लगा। &lt;br /&gt; मैं पेट के बल लेट गयी और बोली यार बलराम! मेरी ब्रा का हुक खोलकर मेरी पीठ पर भी मालिश करो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह वैसा ही करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने खुद ही अपना पेटीकोट खोलकर रख दिया। &lt;br /&gt; मैं पूरी नंगी पेट के बल लेटी रही। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसे सिर्फ मेरे चूतड़ दिख रहे थे। &lt;br /&gt; न मेरी चूत न मेरी चूचियाँ और न मेरी गांड का छेद उसे दिख रहा था&lt;br /&gt; फिर भी वह बहुत एक्साइटेड हो चुका था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इधर मैं भी बहुत उत्तेजित हो गई थी। &lt;br /&gt; मेरा तो मन उसके लण्ड पर लगा था कि वह जल्दी से मेरे हाथ में आ जाए मेरे मुंह में आए और फिर मेरी चूत में! इसलिए मैं फ़ौरन उठ बैठी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मेरी दोनों तनी हुई नंगी चूँचियाँ देखीं तो उसके होश उड़ गए! &lt;br /&gt; वह बोला बहुत बड़ी-बड़ी हैं आपकी मेम! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा हाँ बड़ी-बड़ी हैं! इन्हें मालिश करके और बड़ा करो बलराम! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह सच में मेरी चूँचियों पर चिकनाई लगाकर मालिश करने लगा उन्हें बड़े प्यार से मसलने लगा और मैं एन्जॉय करने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा बलराम सच-सच बताओ तुमने सेठानी की मालिश ही की थी या कुछ और भी किया था? &lt;br /&gt; वह बोला मेम अब आपसे क्या छुपाना! सेठानी मुझसे मालिश के बाद पेलने को कहती थीं। मानती ही नहीं थीं! कहती थीं कि बिना पेलवाए मैं तुम्हें यहाँ से जाने नहीं दूंगी। फिर मुझे पेलना ही पड़ता था मेम! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा अच्छा! तो तुम खूब मस्ती से पेलते होंगे? &lt;br /&gt; उसने बताया हाँ फिर मैं भी मज़ा ले-लेकर पेलने लगा। सच बात यह है कि उसने ही मुझे पेलना सिखाया था। लगभग हर रोज़ पेलवाती थी मुझसे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसकी बात सुनकर मैं पागल हो गई। &lt;br /&gt; मैं भूल गई कि मैं एक ऑफ़िसर हूँ और वह एक टैक्सी ड्राइवर है। &lt;br /&gt; बस यह याद रहा कि वह एक मस्त जवान मर्द है और मैं एक चुदासी जवान औरत! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फिर झर्र से उसकी चड्डी उतारकर फेंक दी। &lt;br /&gt; उसका टन-टनाता हुआ लण्ड पकड़कर कहा इसे ही पेलते थे न तुम! अपना लण्ड पेलते थे न तुम उसकी चूत में! आज तुम अपना लण्ड मेरी चूत में पेलो! अब मैं तुम्हें सिखाऊंगी कि कैसे पेला जाता है लण्ड मेरी जैसी किसी मस्त जवान औरत की चूत में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बस मैंने पहले तो लण्ड चूमा फिर मस्ती से थोड़ा आगे-पीछे किया और फिर सीधे मुंह में भर लिया। &lt;br /&gt; अभी तक वह मेरी चूत देख नहीं पाया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बैठी थी और वह खड़ा था। &lt;br /&gt; मेरी नज़र उसके लण्ड से हट ही नहीं रही थी। &lt;br /&gt; लण्ड बहनचोद बड़ा मोटा और लम्बा था! &lt;br /&gt; ऐसा लण्ड मुझे बहुत दिनों के बाद मिला था तो मैं लण्ड का पूरा मज़ा लेने में जुट गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर एकाएक मैंने चित लिटा दिया और उसके ऊपर नंगी ही चढ़ बैठी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी और आगे थोड़ा झुककर मैं उसका लण्ड चाटने-चूसने लगी बालों का जूड़ा मैंने पहले ही बना लिया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों 69 बनकर सेक्स का मज़ा लेने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बलराम बोला मेम आपकी चिकनी चूत बड़ी स्वादिष्ट है! मुझे चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा है। सेठानी की चूत चाटने में कोई मज़ा नहीं था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने ज़बान मेरी चूत में घुसा दी और ज़बान से ही मेरी चूत चोदने लगा। &lt;br /&gt; मैं मादरचोद ऐसे में बड़ी उत्तेजित हो गयी। &lt;br /&gt; मैंने मन में कहा— आज मिला है मुझे मेरे मन का मर्द जो मेरी चूत सही तरीके से चाट रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी सिसकारियां निकलने लगीं। &lt;br /&gt; मैं सारी दुनिया भूल चुकी थी और लण्ड में बुरी तरह खो चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सच है कि बहुत दिनों बाद मुझे मेरे मन का लण्ड मिला था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लण्ड का सुपाड़ा बिलकुल लाल टमाटर जैसा था और लण्ड बहनचोद लोहे की तरह सख्त था! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद मैं पलट गयी। &lt;br /&gt; मैं नीचे हो गयी और वह ऊपर। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे मुंह में लण्ड घुसा था और उसके मुंह में मेरी चूत। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह लण्ड से मेरा मुंह चोदने लगा और अपनी ज़बान से मेरी चूत। &lt;br /&gt; मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आने लगा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसे में न मैं कुछ बोल पा रही थी और न वह कुछ बोल पा रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पर हाँ लण्ड चूसने में मैं बिजी थी तो चूत चाटने में वह। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अचानक मेरे मुंह से अपने आप निकला बलराम! अब तुम मुझे चोदो अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है! पेल दो अपना ये हक्कानी लण्ड मेरी चूत में! &lt;br /&gt; उसने कहा मेम… &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बीच में ही बोल पड़ी मेम की माँ का भोसड़ा! मेम की माँ की चूत! अब कुछ बोलो नहीं मादरचोद बलराम! अब तो बस पेल दो लण्ड जल्दी से! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मुझे बेड पर पटका खुद नंगा ही नीचे खड़ा हो गया मेरी टाँगें पकड़कर अपनी तरफ घसीटा और मेरी गांड़ के नीचे एक तकिया लगा दिया जिससे मेरी गांड ऊपर उठ गयी। &lt;br /&gt; फिर उसने लण्ड चूत के सामने किया और लण्ड का टोपा मेरी चूत पर रगड़ने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे अपार आनंद आने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर एकाएक लण्ड गच्च से पूरा अंदर घुसा दिया! ऐसा लग रहा था जैसे कोई सांप अपने बिल में घुस रहा हो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं तो चुदी हुई थी तो दर्द तो मुझे नहीं हुआ मगर चीख ज़रूर मेरे मुंह से निकल पड़ी उई माँ! मर गई मैं! बड़ा मोटा लण्ड है तेरा भोसड़ी के बलराम! धीरे-धीरे पेलो यार ये मेरी चूत है तेरी सेठानी का भोसड़ा नहीं है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बलराम बिना कुछ बोले धच्च-धच्च धक्के मारने लगा और मुझे जन्नत का मज़ा आने लगा। &lt;br /&gt; मेरी चूत माँ की लौड़ी यही चाहती थी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बलराम हचक-हचक के धक्के मारे जा रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी दोनों टाँगें उसके कंधे पर थीं और लण्ड उसका पूरा मेरी चूत में। &lt;br /&gt; लण्ड बहनचोद पिस्टन की तरह अंदर-बाहर आ-जा रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अचानक उसने मुझे फिर अपनी तरफ घसीटा और मेरे चूतड़ उठाकर पेलने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका इस तरह पेलना मुझे दूना मज़ा देने लगा और मैं सिसकारियां मार-मार के चुदवाने लगी ओहह… उफ्फ… आहहह! बड़ा मज़ा आ रहा है! और चोदो भोसड़ी के मेरी चूत! फाड़ डालो मेरी चूत ससुरी! आहहह… हीहीही… उउउउ! तू माँ का लौड़ा बड़ा छुपा रुस्तम निकला! मुझे नहीं मालूम था कि तू इतनी अच्छी तरह मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाएगा! साले कुत्ते तेरी माँ का भोसड़ा तेरी बहन की बुर! आज मेरी चूत फाड़ के ही दम लेना! मुझे पहली बार कोई मर्द मिला है मेरी चूत के छक्के छुड़ाने वाला! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी ललकार से उसका जोश बढ़ने लगा और मेरी उत्तेजना भी बढ़ने लगी। &lt;br /&gt; मैं सातवें आसमान की सैर करने लगी। &lt;br /&gt; इतनी बढ़िया चुदाई मेरी पहले कभी नहीं हुई थी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में उसने मुझे पलट दिया मेरी गांड उसके सामने आ गयी। &lt;br /&gt; उसने मेरे दोनों चूतड़ फैला दिए और लण्ड मेरी गांड के छेद पर सेट कर दिया फिर एक ही धक्के में ठोंक दिया लण्ड मेरी गांड में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे मुंह से निकला उफ्फ्! &lt;br /&gt; फिर मैं भी मजे से गांड मरवाने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी गांड बहुत चुदी हुई थी इसलिए मुझे दर्द नहीं हुआ बल्कि ज्यादा मज़ा आने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके मोटे लण्ड से मुझे गांड़ चुदवाने में एक नया मज़ा आ रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब वह मुझे पीछे से चोदने का मज़ा लूटने लगा। &lt;br /&gt; बीच-बीच में लण्ड चूत में भी पेल देता था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस तरह चूत और गांड एक साथ चुदवाने का यह मेरा पहला मौका था और मैं इस मौके का पूरा फायदा उठा रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे लगा कि मैं खलास हो जाऊंगी पर बलराम बहनचोद चोदे ही जा रहा था! उसका लण्ड झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। &lt;br /&gt; मैं उसके लण्ड की गुलाम होती जा रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर अचानक वह चित लेट गया और मुझे अपने लण्ड पर बिठा लिया। &lt;br /&gt; मेरे बैठते ही लण्ड पूरा मेरी चूत में घुस गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह नीचे से धक्के मारने लगा और मैं ऊपर से। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे भी उसके ऊपर चढ़कर उसका लण्ड चोदने में मज़ा आने लगा क्योंकि मैं अपने चूतड़ बार-बार उठा-उठाकर उसके लण्ड पर पटक रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर क्या मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। &lt;br /&gt; मैं खलास हो चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद वह भी झड़ गया और मैंने उसका झड़ता हुआ लण्ड बड़ी मस्ती से चाटा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद हम दोनों ने नंगे-नंगे ही खाना खाया और नंगे-नंगे ही एक ही बेड पर सो गए। &lt;br /&gt; सवेरे उठकर एक बार फिर उसने मुझे चोदा। &lt;br /&gt; उसके बाद नाश्ता करके हम दोनों एयरपोर्ट के लिए निकल पड़े। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी क्रेजी सेक्स स्टोरी कैसी लगी? मेल और कमेंट्स में बतायें.</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:24:29 +0300</pubDate>
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<item><title>ट्रेन में मेरी बीवी की गैरमर्द से चुदाई- 2</title>
<description>  &lt;br /&gt; ट्रेन पोर्न स्टोरी हिंदी में मैंने अपनी बीवी को गैर मर्द के साथ केबिन में छोड़ दिया और आदमी को कहा कि इसे पटाकर चोद लेउसने मेरी बीवी से बात की और … &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हैलो फ्रेंड्स मैं एक अनाम लेखक आपको अपनी बीवी सीमा की चलती ट्रेन में एक गैर मर्द से चुदने वाली सेक्स कहानी सुना रहा था&lt;br /&gt; कहानी के पहले भाग &lt;br /&gt; सेक्सी बीवी को गैर आदमी के हवाले किया &lt;br /&gt; में अब तक आपने पढ़ लिया था कि सीमा ने मनीष का मोटा लंड देखा तो वह गनगना उठी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब आगे ट्रेन पोर्न स्टोरी हिंदी: &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अपने मोबाइल में मैं मनीष और सीमा की बातों को सुन रहा था&lt;br /&gt; इसलिए मैंने मनीष से पूछा कि क्या उसने तुम्हारा लंड देखा है? &lt;br /&gt; ‘हां. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- थोड़ा सा लोअर से बाहर निकाल कर सहलाओ! &lt;br /&gt; मनीष ने लंड बाहर निकाल लिया और वह अपने लंड की मुठ मारते हुए मेरी बीवी को दिखाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सिंधु- ये क्या कर रहे हैं अभी देख लेंगे तो मुझे यहां से उठा देंगे&lt;br /&gt; ‘ओके रात को दिखा सकता हूं ना! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने मुस्कुराते हुए कहा तो मेरी बीवी ने हंस कर हां कह दिया&lt;br /&gt; मनीष- पक्का न! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बार वह बोली- आपका दर्द मुझसे नहीं देखा जा रहा है&lt;br /&gt; ‘ओके आई लव यू! &lt;br /&gt; ‘हा हा हा … &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये सब सुन कर मैं रोमांचित हो गया और मनीष से बोला कि भाई अपने फौलादी लंड की इतनी बढ़ाई करो कि वह सुन कर अभी पेलवाने को तैयार हो जाए&lt;br /&gt; ‘हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘देखिए जान मैंने आज रात के लिए इतना तैयारी करके रखी कि 6 महीने की भूख को मैं रात भर पेलकर मिटा लूंगा! &lt;br /&gt; ‘अच्छा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘एक बात पूछूं? &lt;br /&gt; ‘क्या? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘आपके पति आपको कितनी देर तक पेलते हैं? &lt;br /&gt; मेरी बीवी मुस्कुराती हुई बोली- वही 4 से 5 मिनट तक&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओह इतने में तो आपका कुछ नहीं होता होगामैं कम से कम 25 से 35 मिनट तक लगातार पेलता हूँजब तक औरत पानी पानी होकर चिल्ला ना उठे तब तक मेरा लंड चुत से बाहर निकलता ही नहीं है! &lt;br /&gt; ‘ओह सही है! शायद वह चुदाई की बातें और लंड चुत सुनकर गर्म होने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘सही में डार्लिंग … आज मौका देकर देखिए आपको रुला ना दिया तो मैं एक बाप का नहींआपकी बुर फूल कर कुप्पा हो जाएगी! &lt;br /&gt; ‘अरे बाप रे इतना ज्यादा करोगे … मैं तो मर ही जाऊंगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ये मेरा वादा है जीवन में कभी ऐसी पेलाई आपकी नहीं हुई होगीआपके पति का लंड कितना बड़ा हो गया? &lt;br /&gt; ‘लगभग 4 से 5 इंच का! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘बस ये देखिए मेरा 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा है लीजिए हाथ में लेकर देखिए! &lt;br /&gt; ‘अरे बाप रे ऐसा तो मैं पहली बार देख रही हूंअन्दर कर लीजिए कोई आ जाएगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके मस्त है ना! &lt;br /&gt; ‘हां बहुत मस्त है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘सोचिए जब ये मस्त लंड आपकी बुर में जाएगा तो आपको कितना मजा आएगा! &lt;br /&gt; बीवी ने हंसते हुए कहा- देखा जाएगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मनीष से कहा कि आप अपने पति को फोन कर के बुला लीजिए ताकि उन्हें जल्दी से खिला पिला कर सोने के लिए भेज दिया जाए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने मेरी बीवी से कहा- जान आप अपने पति को फोन करके बुला लीजिएउनको खिला पिला कर सोने के लिए भेज दिया जाए तो आपण दोनों भी कुछ मजा ले सकें! &lt;br /&gt; ‘ओके हां वैसे भी 10 बजने वाले हैं? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां … और 11 बजे से हम लोग अपना काम करेंगे! &lt;br /&gt; बीवी ने हंसते हुए मुझे कॉल लगाया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने जल्दी से अपना कॉल काट दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी वाइफ का कॉल आया- आप कहां हैं? &lt;br /&gt; ‘आगे एक बोगी में एक जगह सीट मिल गई है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘अच्छा तो आकर कुछ खा पी लीजिए? &lt;br /&gt; ‘ओके … टीटी चला गया? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां. &lt;br /&gt; ‘ठीक है आ रहा हूं. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जैसे ही मैं केबिन आया तो देखा कि वाइफ नॉर्मली बैठी है और मोबाइल चला रही है&lt;br /&gt; मनीष भी लेटा हुआ था और मोबाइल चला रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- भाई साहब टीटी कुछ बोला? &lt;br /&gt; ‘नहीं टिकट चेक किया और बोला कि किसी भी वेटिंग टिकट वाले को अपने केबिन में मत बैठने देना. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके कोई बात नहीं आगे बोगी में एक सीट खाली हैमैं वहीं एडजस्ट कर लूंगा! &lt;br /&gt; मैंने वाइफ से कहा- टिफिन निकालो कुछ खा पी लिया जाए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वाइफ ने बैग से टिफिन निकाला&lt;br /&gt; मैं मनीष से बोला- आप भी खा लीजिए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मना कर दिया और कहा- मैंने खाना ऑर्डर कर दिया है&lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने धीरे से मैं मनीष को बाहर जाने का इशारा किया और वह बाहर निकल गया&lt;br /&gt; मैं वाइफ से उसके बारे में कुछ बातें करना चाहता था ताकि मुझ पर वह शक ना कर सके&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला कि ये आदमी कैसा है? &lt;br /&gt; वह बोली- आदमी बढ़िया और शरीफ लग रहा है उसने मुझसे ज्यादा बात भी नहीं की हैबल्कि वह तो यह बोला कि मैडम आप आराम से लेटी रहिए जब भी जरूरत हो तो आप अपने पति को बुला लेनावह अपने मोबाइल पर बीवी से बात कर रहा है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके फिर मैं तो ट्रेन में ही रहूंगाजब भी कोई दिक्कत होगी तो कॉल कर देना. &lt;br /&gt; ‘ठीक है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसी बीच हम दोनों ने खाना खा लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- आज इस केबिन में मैं होता तो चलती ट्रेन में चुदाई का मजा लेते&lt;br /&gt; यह कहते हुए मैं उसकी चूचियां दबाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘धत ये क्या कर रहे हैं अभी वह आ जाएगा! &lt;br /&gt; ‘लगता है बेचारे ने टिकट बीवी को चोदने के लिए बुक किया था लेकिन वह आ नहीं पाई. &lt;br /&gt; ‘हां. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मनीष आ गया उसके हाथ में डिनर बॉक्स था&lt;br /&gt; वह खाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- आप कहां से आ रहे हैं! &lt;br /&gt; ‘आसाम से इस बार 20 दिन की छुट्टी मिली है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘आपका घर कहां है? &lt;br /&gt; ‘हरियाणा. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘और ससुराल? &lt;br /&gt; ‘यहीं गाजीपुर आज यहीं से उसे भी मेरे साथ जाना था लेकिन वह ट्रैफिक में फंस गईकल वह अपने भाई के साथ आएगी. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओह ये तो बुरा हुआ. &lt;br /&gt; ‘कोई बात नहीं. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने अपना डिनर कर लिया&lt;br /&gt; टाइम 10:45 का हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह बोला- टाइम ज्यादा हो गया मैं सोने जा रहा हूंअगर आप यहां सोएंगे तो टीटी दिक्कत करेगा&lt;br /&gt; ‘नहीं मैं जा रहा हूं मुझे सीट मिल गई है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जाते जाते मैं वाइफ से बोला कि कोई दिक्कत होगी तो कॉल करनाबाबू सो गया है उसे ठीक से सुला देना. &lt;br /&gt; ‘ठीक है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं वहां से चला गया और मनीष को कॉल कर दिया&lt;br /&gt; उसने कॉल रिसीव करके छोड़ दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘देखो मित्र मैंने अपनी बीवी को तुमको दे दिया है वह भी राजी हो गई है … तुम उसे रात भर खूब चोदो! &lt;br /&gt; ‘हूँ. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ऐसा तुम बीवी से कहो मैं देख कर आता हूँ कि वह गए कि नहीं! मैं लेफ्ट साइड वाली टॉयलेट में हूंअन्दर से दरवाजा लॉक नहीं किया हैतुम अन्दर आ जाना&lt;br /&gt; ‘हूँ. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘जान अभी मैं मूतने जा रहा हूं और देख भी लूं कि तुम्हारे पति गए कि नहीं! &lt;br /&gt; ‘ठीक है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष बाथरूम का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया&lt;br /&gt; मैंने दरवाजा अन्दर से लॉक कर दिया और उससे पूछा- कोई ने अन्दर आते देखा तो नहीं है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘नहीं आस पास कोई नहीं था! &lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘मुझे यहां क्यों बुलाया? &lt;br /&gt; ‘ये देखने के लिए कि तुम्हारा लंड कितना बड़ा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये कहते हुए मैंने उसका लोअर नीचे सरका दिया&lt;br /&gt; ये क्या … उसका सोया हुआ लंड मेरे खड़े लंड से भी बड़ा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसका लंड हाथ में लेकर सहलाने लगाउसका लंड टाइट हो गया&lt;br /&gt; मेरी हाथ की कलाई से भी मोटा लंड थालंबाई लगभग 9 इंच रही होगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा हथियार तो सिर्फ अफ्रीकन का होता हैऐसे लंड मैंने सिर्फ ब्लू फिल्मों में ही देखा था&lt;br /&gt; दोस्त मेरी बीवी आज पनाह मान जाएगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब मैं ऐसे लंड वाला वीडियो देखता था तो कहती हैं कि इतना बड़ा नहीं होता होगासब बनावटी होता हैआज जब उसकी बुर में जाएगा तब पता चलेगा. &lt;br /&gt; ‘हां दोस्त आज मैं तुम्हारी बीवी की बुर फाड़ दूंगा और उसकी चीख निकाल दूंगा. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘गुड उसकी वह दर्द भरी चीख मैं सुनना चाहता हूं! &lt;br /&gt; ‘दोस्त चिंता मत करो तुम मोबाइल पर चीख सुनना. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; ‘तुम्हारा लंड कितना बड़ा है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपना पैंट खोल कर अपना छोटा सा लंड बाहर निकाला जो उसके लंड के सामने चूज़ा नजर आ रहा था&lt;br /&gt; ‘इतना छोटा लंड इससे तो उनका कुछ नहीं होता होगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘हां भाई उसकी बुर ब्रेड पकोड़ा जैसी फूली और बड़ी मुलायम है! &lt;br /&gt; ‘कोई बात नहीं दोस्त आज उसकी बुर फट जाएगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला- ओके अब तुम जाओ और पेलो मैं कब आऊंगा? &lt;br /&gt; ‘पहले एक घंटा मुझे पेल लेने दोउसके बाद मैं जब पेशाब करने आऊंगा तो केबिन का दरवाजा लॉक नहीं करूंगाथोड़ी देर बाद तुम अन्दर आ जाना और कहना कि पेलते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया हैफिर हम दोनों मिल कर उसे पेलेंगे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके अब जाओ. &lt;br /&gt; ‘ये लो सेक्स पावर की दवा इसको 12 बजे खा लेना. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके तुम भी खाए हो क्या? &lt;br /&gt; ‘हां पंद्रह मिनट पहले खाई थी … अब दवा काम कर रही है. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘मैं जा रहा हूं और अब से लगातार एक घंटे चोदूंगा. &lt;br /&gt; ‘ओके कॉल पर आ जाओ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; मनीष चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उत्तेजित होकर उनकी बात और चुदाई को सुनने को बेताब हो गया&lt;br /&gt; तभी मनीष केबिन में पहुंच गया और केबिन लॉक कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सिंधु- दिखाई दिए? &lt;br /&gt; ‘नहीं लगता है वह अपनी सीट पर जाकर सो गए हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ओके. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने अन्दर जाकर मेरी बीवी को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी चूची दबाते हुए गोदी में उठा लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी बीवी चीखती हुई बोली- अरे बाप रे … इतना कसके मत दबाइए दर्द हो रहा है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘यह एक फौजी का हाथ है मसल कर रख दूंगा! &lt;br /&gt; ‘अह्ह्ह बीवी चीखने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसकी आवाज सुन कर मैं रोमांचित और उत्तेजित हो गया&lt;br /&gt; ‘डार्लिंग तुम्हारी चूची पी लूं? &lt;br /&gt; ‘अरे नहीं मुन्ना भूखा रह जाएगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘एक बार मुँह में लेकर चूसने दो न! &lt;br /&gt; यह कह कर मनीष मेरी बीवी का एक दूध पीने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘प्लीज दूध मत पीजिए बाबू के लिए है! &lt;br /&gt; ‘ओके अभी छोड़ देता हूं लेकिन पेलाई में दर्द होगा तब मैं चूची पीकर आराम और मजा दूंगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘ठीक हैअभी मैं पेशाब करके आती हूं. &lt;br /&gt; ‘ओके बुर को पानी से धो लेनाक्योंकि अभी मैं बुर को अपनी जीभ से चाटूंगा! &lt;br /&gt; बीवी हंसती हुई- ठीक है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद बीवी वापस केबिन में आ गई&lt;br /&gt; उसे आया देख कर मनीष ने उसे वापस अपनी बांहों में भींच लिया और वे दोनों चूमा चाटी करने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद बीवी वापस केबिन में आ गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके वापस आने से पहले मनीष ने अपने मोबाइल से वीडियो कॉल लगा कर मुझे चुदाई का लाइव टेलिकास्ट दिखाने की व्यवस्था कर दी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं भी बाथरूम के पास जाकर उन दोनों की लाइव चुदाई देखने लगा था&lt;br /&gt; मनीष ने सीमा को वापस अपनी बांहों में भींच लिया और वे दोनों चूमा चाटी करने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जल्दी ही वे दोनों काम की आग में झुलसने लगे&lt;br /&gt; तभी सीमा को याद आया और उसने मनीष से कहा कि दरवाजा अभी लगा नहीं है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने लपक कर दरवाजा लॉक किया और वे दोनों नंगे होने लगे&lt;br /&gt; अगले कुछ मिनट में वे दोनों नीचे वाली सीट पर 69 में चुसाई का मजा लेने लगे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सीमा काफी गर्म हो गई थी&lt;br /&gt; उसने मनीष से कहा- अब पहले एक बार पेल दो … मुझसे रहा नहीं जाता! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने सीधे होकर उसकी चुत में लंड सैट कर दिया और गचाक से पेल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका मोटा लंड सीमा की चुत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसा तो वह चीख उठी और चुदने से मना करने लगी&lt;br /&gt; लेकिन मनीष को अब किधर चैन था वह लगातार चुदाई करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ ही देर में सीमा को भी उसके मोटे लंड से चुत चुदवाने में मजा आने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे दोनों काफी देर तक चुदाई करते रहे&lt;br /&gt; सीमा दो बार झड़ चुकी थी लेकिन मनीष ने दवा खाई थी तो वह अभी भी पगलाए सांड की तरह मेरी बीवी की चुत फाड़ने में लगा हुआ था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इधर मेरे लंड में भी आग लगी हुई थी तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसके कूपे में आया और केबिन के बाहर खड़े होकर अपने मोबाइल में चुदाई देखने लगा&lt;br /&gt; कुछ देर बाद मनीष का रस निकल गया और उसने मेरी बीवी की चुत के बाहर वीर्य छोड़ दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद उसे मोबाइल की याद आई तो उसने मोबाइल देखा&lt;br /&gt; मैंने हंस कर कहा- अब मुझे अन्दर आने दो&lt;br /&gt; वह बोला- रुको मैं दरवाजा खोल कर वापस तुम्हारी बीवी को अपने नीचे लेता हूँ उसी वक्त तुम अन्दर आ जाना&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी बीवी औंधी होकर लेटी थी और लंबी लंबी सांसें ले रही थी&lt;br /&gt; तभी मनीष ने दरवाजा खोला और वापस सीमा की पीठ पर चढ़ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उतनी देर में मैं अन्दर आ गया और मैंने दरवाजा बंद करके सीमा से कहा- यह क्या कर रही हो सीमा? &lt;br /&gt; मेरी आवाज सुनकर सीमा हड़बड़ा गई और वह मुझे आया देख कर डर गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मनीष ने हँसते हुए कहा- भाई तेरी बीवी मस्त माल हैतुझे ऐतराज न हो तो मैं इसे एक बार और चोदना चाहता हूँ! &lt;br /&gt; मैंने भी सीमा से कहा- हां जब सीमा को ऐतराज नहीं है तो मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता हैबस इस बार हम तीनों एक साथ चुदाई का मजा लें तो कैसा रहेगा? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सुनकर सीमा को कुछ राहत मिली और वह उठ कर मुझसे लिपट गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब हम तीनों थ्रीसम सेक्स की तैयारी करने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो आज मैं इस ट्रेन पोर्न स्टोरी हिंदी को यहीं विराम दे रहा हूँ&lt;br /&gt; यदि आपको मेरी इस थ्रीसम चुदाई का मजा लेना है तो प्लीज कमेंट्स करें मैं आपको आगे की सेक्स कहानी लिख कर जरूर बताऊंगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ट्रेन पोर्न स्टोरी हिंदी पर आपके कमेंट्स मुझे प्रोत्साहित करेंगे&lt;br /&gt; अनाम लेखक</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:23:32 +0300</pubDate>
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<item><title>शादी में मेरी मम्मी का गैंगबैंग</title>
<description>  &lt;br /&gt; मॅाम गैंग बैंग स्टोरी में मेरी मम्मी मस्त सेक्सी माल हैंमैं मम्मी के साथ एक शादी में गयामम्मी बहुत हॉट दिख रही थी। वहां कैसे मम्मी को कई लड़कों ने मिलकर चोदा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो ये बिल्कुल रियल मॅाम गैंग बैंग स्टोरी है जो मेरी मम्मी की है। &lt;br /&gt; इसको सुन कर आपको बहुत मज़ा आएगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी मम्मी का नाम नेहा है उम्र 40 साल है। &lt;br /&gt; उनकी बॉडी साइज की बात करें तो 38-36-40 है इसलिए उनकी बॉडी सुडौल है। &lt;br /&gt; तो आप लोग सोच ही सकते हैं कि मेरी मम्मी कितनी हॉट हैं। &lt;br /&gt; मम्मी के चूचे बहुत बड़े हैं और उनकी गांड भी उठी हुई है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी ज़्यादातर साड़ी पहनती हैं जो वो हमेशा नाभि से नीचे बांधती हैं। &lt;br /&gt; टाइट बैकलेस और स्लीवलेस ब्लाउज जिसमें से उनकी चिकनी पीठ साफ़ दिखती है। &lt;br /&gt; वो जब भी बाहर जाती हैं तो उनकी मटकती गांड देख कर हर मर्द की नज़र उन पर अटक सी जाती है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन मम्मी नहा रही थीं और मैं टीवी देख रहा था। &lt;br /&gt; नहाने के बाद मम्मी तौलिया लपेट कर बाहर आ गईं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनके भीगे बदन को देख कर मैं नज़र हटा ही नहीं पा रहा था। &lt;br /&gt; मम्मी के जिस्म से लिपटा तौलिया छोटा था जो उनके घुटनों से काफी ऊपर था। &lt;br /&gt; बहुत मुश्किल से उनके दोनों चूचे छुपे हुए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा मन हो रहा था कि मैं तौलिया खींच के उन्हें नंगा कर दूं। &lt;br /&gt; यही सब सोच कर मेरा लंड खड़ा हो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी रात मैंने मम्मी को सोच-सोच कर खूब मुठ मारी। &lt;br /&gt; उस दिन से मैंने मम्मी के गदराए बदन पर ध्यान देना शुरू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन हमें शादी में जाना था। &lt;br /&gt; मम्मी ने उस रात लहंगा और बैकलेस चोली पहनी थी; हाई हील्स और मेकअप किया था; रेड लिपस्टिक और गले में मंगलसूत्र था। &lt;br /&gt; मम्मी की चोली स्लीवलेस और डीप नेक थी पीछे से सिर्फ एक डोरी बांधी थी और चोली इतनी टाइट थी कि जिससे मम्मी की चूची बाहर आने को हो रही थी। &lt;br /&gt; और लहंगा नाभि के नीचे पहना था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शादी में मम्मी अपने दोस्तों के साथ थीं और मैं अकेला ही घूम रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वहां सारे लड़के अंकल और बुड्ढों की नज़र मम्मी पर ही थी। &lt;br /&gt; मम्मी बहुत हॉट लग रही थीं लहंगे में। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर बारात में मम्मी डांस करने लग गईं। &lt;br /&gt; तब मेरे सामने 4 लड़के खड़े थे जो लड़कियों पर बुरे-बुरे कमेंट कर रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तब तक उनमें से एक लड़के की नज़र मेरी मम्मी पर गई और वो बोलने लगा क्या माल है बे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक ने कहा उसके चूचे देख कितना मोटा है! आज तो इसका सारा दूध पी जाऊंगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये बोल कर उनमें से 2 मम्मी के पीछे जाके नाचने लगे और 2 उनके आगे जाके। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन चारों ने मम्मी को भीड़ में घेर लिया और बहाने से कभी कोई उनकी कमर छू रहा था कोई उनका पेट छू रहा था तो कोई उनके चूचों को। &lt;br /&gt; और मम्मी उन लोगों का बिल्कुल विरोध नहीं कर रही थीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर जब हम होटल तक पहुंचे तो उनमें से 1 बोला इसे छत पर ले चलो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; और मम्मी भी उनके साथ जाने लगीं। &lt;br /&gt; मैं भी उनके पीछे चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो लोग लिफ्ट से ऊपर जा रहे थे मैं सीढ़ियों से तीसरी मंजिल तक भाग कर पहुंच गया। &lt;br /&gt; फिर वहां से मैं छत पर चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वहां पर सफेद लाइट लगी हुई थी जिसकी पूरी छत पर रोशनी थी। वहां 4 बड़ी टंकियां थीं जिनके पीछे छुप के मैं इंतज़ार करने लगा। &lt;br /&gt; फिर वो लोग भी मम्मी को लेकर आ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक ने छत के दरवाजे को बंद कर दिया। &lt;br /&gt; फिर वो चारों मम्मी को घेर के खड़े हो गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनमें से एक मम्मी के होठों को चूमने लगा एक नीचे मम्मी के पेट और नाभि पर किस करने लगा। &lt;br /&gt; बाकी दोनों मम्मी के पीछे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक मम्मी के लहंगे के ऊपर से ही उनकी गांड दबाने लगा। &lt;br /&gt; एक मम्मी की पीठ और कमर को चाटने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी उन चारों के बीच में किसी मछली की तरह मचलने लगीं। &lt;br /&gt; ये सब देख कर मेरा लंड भी कड़क हो गया था तो मैं अपना लंड बाहर निकाल कर मुठ मारने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर पीछे वाले ने मम्मी के कपड़े उतारना शुरू कर दिए। &lt;br /&gt; उसने चोली की डोरी खोली और नीचे वाले ने मम्मी का लहंगा नीचे सरका दिया। &lt;br /&gt; मैंने पहली बार मम्मी को ब्रा-पैंटी में देखा था। &lt;br /&gt; मम्मी एकदम किसी मॉडल जैसी लग रही थीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी ने पिंक कलर की मैचिंग वाली ब्रा-पैंटी पहनी थी। &lt;br /&gt; उनके बाल खुले थे एकदम सिल्की-रेशमी जो कि उनकी सेक्सी कमर को और भी सेक्सी बना रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वहां की लाइट से मम्मी का गोरा बदन और भी चमक रहा था। &lt;br /&gt; मम्मी का जिस्म देख कर वो सब पागल हो चुके थे और वो उन्हें नंगी करने में लग गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक लड़का उनकी ब्रा को खोल रहा था जिसने उनकी ब्रा का हुक तोड़ के झटके से उनके मोटे चूचों को क़ैद से आज़ाद कर दिया। &lt;br /&gt; दूसरे ने मम्मी की पैंटी भी उतार दी और मम्मी ने टांगें उठा कर उसे निकाल दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी के गोल-गोल स्तन और मुलायम सी गांड मैंने देखी तो मेरे लंड ने पिचकारी मार दी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी के बदन पर सिर्फ उनका मंगलसूत्र था बस जो उनके चूचों के ऊपर तक लटक रहा था। &lt;br /&gt; उनको नंगी करते ही उनमें से दो लड़के मम्मी के मोटे-मोटे चूचों पर टूट पड़े और उन्हें दांतों से काट रहे थे तो कभी चूस रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक नीचे बैठ कर मम्मी की चूत में जीभ डालने लगा और एक पीछे मम्मी की गांड में अपना मुंह घुसाने लगा। &lt;br /&gt; मम्मी कभी नीचे वाले लड़के के बाल पकड़ कर अपनी चूत में घुसा रही थीं तो कभी दोनों लड़कों के बाल पकड़ रही थीं जो उनके चूचों से चिपक गए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मम्मी उनके सामने घुटनों के बल बैठ गईं। &lt;br /&gt; उसके बाद सब नंगे हो गए और अपना लंड मम्मी के मुँह के सामने लेकर खड़े हो गए। &lt;br /&gt; मम्मी अब लंड चूसने लग गई थीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो सब बारी-बारी से अपना-अपना लंड मम्मी को चूसवा रहे थे और वो मम्मी के बालों को पकड़ कर आगे-पीछे कर रहे थे। &lt;br /&gt; मम्मी को सांस भी नहीं लेने दे रहे थे वो चारों। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जैसे ही मम्मी का मुँह किसी के लंड से खाली होता तो कोई दूसरा डाल देता। &lt;br /&gt; एक बार तो दो लोग एक साथ मम्मी को लंड चुसवाने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उन सब ने मम्मी को घोड़ी बनाया और एक लड़का मम्मी के पीछे आ गया और उनकी चूत में अपना लंड डालने लगा। &lt;br /&gt; एक मम्मी की गांड पर ज़ोर से चांटे मारने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक मम्मी के ऊपर चढ़ गया और उनके दोनों चूचों को मसलने लगा। &lt;br /&gt; और आखिरी लड़का मम्मी के मुँह में अपना लंड डाल कर चूसवाने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जैसे ही मम्मी की चूत में लंड गया मम्मी चिल्लाने को होने लगीं। &lt;br /&gt; पर उनकी चीख मुँह में लंड की वजह से वहीं दब गई और उनके मुँह से बस ‘उउउ आआ मम्म की आवाज़ निकल रही थी। &lt;br /&gt; उस लड़के ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और मम्मी के मुंह में ही लंड का रस छोड़ दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी हाय मर गई! आराम से करो यार! आराम से करो ना उफ़्फ़ आराम से प्लीज! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद मम्मी की चूत मार रहा लड़का उसकी चूत में ही झड़ गया तो उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया। &lt;br /&gt; फिर एक लड़के ने मम्मी को अपने लंड पर बिठाया और उन्हें उछाल-उछाल कर चोदने लगा। &lt;br /&gt; मेरी मम्मी के दोनों स्तन हवा में झूलने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से मम्मी को चोद रहा था। &lt;br /&gt; इससे मम्मी के मुँह से गन्दी गालियां और चीखें निकल रही थीं और वो बोल रही थीं आअहह आहा ब.च्चे आराम से! उफ़्फ़ आअहह आअहह और ज़ोर से चोद मुझे आअहह आअह आअहह! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी के पीछे से एक लड़के ने धक्का दे कर मम्मी को झुका दिया और मम्मी पहले वाले लड़के के ऊपर ही लेट गईं। &lt;br /&gt; फिर उनके पीछे वाले लड़के ने लंड मम्मी की गांड पर रखा और एक ज़ोर का धक्का मारा। &lt;br /&gt; दर्द से मम्मी की आंखें बंद हो गईं और वो भागने की कोशिश करने लग गईं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी एक ने मम्मी की कमर को पकड़ लिया फिर पूरा लंड गांड में उतार दिया। &lt;br /&gt; मम्मी प्लीज़ निकालो यार! आह माँ उफ़्फ़ ये भी… इसमें बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ निकालो यार! अलग-अलग करो एक साथ नहीं बहुत दर्द हो रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पर वो नहीं रुके और सब ने बारी-बारी से मम्मी की चूत-गांड दोनों मारी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर सब ने मम्मी को घुटनों के बल बिठाया और अपना-अपना माल मम्मी के चेहरे पर गिरा कर मॅाम गैंग बैंग करके उन्हें नंगी छोड़ कर वहां से चले गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मम्मी मेरे सामने ही नंगी पड़ी हुई थीं और उनकी चुदाई से उन्हें बहुत दर्द हो रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसके बाद की कहानी मैं आपको इसके अगले भाग में सुनाऊंगा। &lt;br /&gt; मॅाम गैंग बैंग स्टोरी पर अपने फीडबैक में कमेंट जरूर करें।</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 18:22:04 +0300</pubDate>
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<item><title>मैंने दोस्त की जवान बहन को चोदा</title>
<description>वर्जिन गर्ल फक स्टोरी में मेरे दोस्त की बहन अभी जवान हुई हैएक रात मैं दोस्त के घर रुकाआधी रात को मैं पेशाब करने गया तो उसकी बहन अपने कमरे में पूरी नंगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; नमस्ते&lt;br /&gt; मेरा नाम साहिल है और मैं कॉलेज के दूसरे साल में पढ़ता हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा दोस्त भी मेरे साथ ही रहता है हमारी 10 साल की दोस्ती है। &lt;br /&gt; हम दोनों देखने में भी ठीक-ठाक हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो मैं आज आपको मेरे दोस्त की बहन की चूत मारने की वर्जिन गर्ल फक स्टोरी सुनाता हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो एक दिन ऐसा हुआ कि जब मैं मेरे दोस्त को लेने उसके घर गया था तो वो अपने कमरे में था। &lt;br /&gt; मैंने उसको आवाज़ लगाई तो कोई जवाब नहीं आया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो घर के दरवाज़े के पास जाके फिर से आवाज़ लगाई तो उसकी बहन ने आवाज़ दी कौन है! &lt;br /&gt; मैंने कहा मैं उसका दोस्त हूँ उसको कॉलेज के लिए बुलाया है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो अपने रूम से बाहर आई। &lt;br /&gt; मैं उसे देख के पागल हो गया था! &lt;br /&gt; उसने लेगिंग्स और एक ढीली टी-शर्ट पहनी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसे देख के मेरा लंड खड़ा हो गया था। &lt;br /&gt; ऐसा लगा कि उसको अभी ही सोफे पर लिटा कर अभी ही चोद दूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका नाम निशा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी उसने मेरे को कहा पानी पिओगे? &lt;br /&gt; मैंने कहा ओके ले आओ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा कहाँ है तेरा भाई? &lt;br /&gt; वो बोली उसका पेट खराब था तो पूरी रात सोया नहीं था। तो वो अभी भी सो रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो मैंने कहा तो आज वो कॉलेज नहीं आयेगा? &lt;br /&gt; वो बोली आज तो नहीं आयेगा वो ऐसे में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो पानी लेके आई तो जरा झुकी तो उसके दो बड़े बूब्स टी-शर्ट में झूल रहे थे। &lt;br /&gt; मैंने उसके बूब्स को देख लिया था वो मेरे दिमाग में छप गए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने पूछा घर में तुम्हारे मम्मी-पापा कहाँ गए हैं? &lt;br /&gt; तो उसने कहा वो मामा के घर गए हैं क्योंकि उनका एक्सीडेंट हुआ था! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा है तो! तो तुम और तुम्हारा भाई वीरेन ही हो घर में? &lt;br /&gt; निशा ने बोला हाँ! और वो भी एक महीने के लिए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा सुनते ही मेरे दिमाग में उसको चोदने का प्लान बनाना सोच लिया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने पूछा तुम क्या करती हो? &lt;br /&gt; तो निशा ने कहा मेरी बारहवीं की तैयारी चल रही है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने बोला पास हो जाओगी? &lt;br /&gt; उसने कहा पास तो आराम से हो जाऊँगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे को पता था कि अभी तक निशा को किसी ने चोदा नहीं था सील पैक थी और उसमें भी आग भरी थी। &lt;br /&gt; क्योंकि वो मेरे से बात कर रही थी तब वो जान-बूझ के अपनी टांगें फैला कर बैठी थी और बार-बार वो नीचे जरा-जरा झुक के अपने बूब्स दिखा रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अच्छा तो मैं चलता हूँ! &lt;br /&gt; ऐसा कह कर मैं कॉलेज चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; और फिर मैं कॉलेज के बाद घर आकर अपने रूम में जा कर निशा के नाम की मुट्ठी मारी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बूब्स को याद करके और उसने जो टांगें फैलाई थीं वो याद करके मुट्ठी मार ली और हल्का हो गया और मैं जरा सो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं दूसरे दिन मेरे दोस्त के घर गया तो उससे मिला और पूछा कैसा है तू? &lt;br /&gt; उसने कहा ठीक हूँ दवाई चल रही है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी उसकी बहन निशा आई और उसने पूछा कैसे हो साहिल? &lt;br /&gt; मैंने कहा मैं तो ठीक हूँ तुम कैसी हो? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा क्या यार कुछ अच्छा नहीं चल रहा है सिर पर एग्जाम है! &lt;br /&gt; तो मैंने कहा वो टेंशन तो रहेगा ही! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा ये तो है ही पर बहुत टेंशन हो जाता है एग्जाम का! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर ऐसे ही थोड़ी बात करके वो चली गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने मेरे दोस्त को कहा आज हमको कॉलेज से प्रोजेक्ट मिला है तो करना पड़ेगा। मैं तुम्हारा प्रोजेक्ट भी मैं कर लूँगा क्योंकि तुम बीमार हो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो उसने कहा ठीक है तो! तो एक काम करो कि आज रात मेरे घर ही आ जाना हम साथ में प्रोजेक्ट करेंगे! &lt;br /&gt; मैंने भी हाँ कहा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने भी मन में सोच लिया था कि ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा! फिर मैं मेरे घर आ गया और रात का इंतज़ार कर रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं सारा प्रोजेक्ट का सामान लेके उसके घर चला गया। &lt;br /&gt; और फिर मैंने और मेरे दोस्त ने उसके रूम में प्रोजेक्ट का काम चालू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसे पूछा आज की दवाई ली क्या? &lt;br /&gt; तो मेरे दोस्त ने कहा अरे! मैं तो भूल ही गया था! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने दवाई ली और हम प्रोजेक्ट करने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बहुत देर हो गई थी तो मेरे दोस्त वीरेन ने कहा साहिल आज मेरे घर ही सो जाना! &lt;br /&gt; मैं बोला नहीं यार मैं चला जाता हूँ! &lt;br /&gt; तो मेरे दोस्त ने बोला भाई! अपना घर समझ के सो जाना! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मेरे को बहुत समझाया कि एक दिन की तो बात है बहुत रात हो गई है तो मैंने कहा ठीक है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम सो गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; लेकिन मेरे को नींद नहीं आ रही थी&lt;br /&gt; मैं मूतने के बहाने घर में झांकने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मैंने देखा कि निशा के रूम की लाइट चालू थी और खटिया की आवाज़ आ रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मैंने दरवाज़े से देखा तो मैंने देखा कि निशा पूरी नंगी होकर अपनी चूत को उंगली से सहला रही थी! &lt;br /&gt; वो देख के मेरा लंड खड़ा हो गया और वहीं पे उसको देख के ज़ोर-ज़ोर से मेरा लंड हिलाने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं पागल की तरह हिलाने लगा तो मेरे को होश नहीं रहा। &lt;br /&gt; तभी ही मेरा वीर्य निकल गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मैंने लंबी साँस लेकर दरवाज़े का सहारा ले रहा था तभी दरवाज़ा हिल के खुल गया क्योंकि दरवाज़ा जरा सा ही खुला था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब दरवाज़ा खुल गया तभी निशा नंगी थी&lt;br /&gt; मेरे को देख के वो चौंक गई और अपने शरीर को चादर से ढक लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; और मैं घबरा के रसोड़े (किचन) की तरफ पानी पीने के लिए चला गया। &lt;br /&gt; मैं थोड़ा डर गया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी निशा भी रसोड़े में आ गई सिर्फ लंबी टी-शर्ट पहन के और उसने कहा तुम क्या देख रहे थे इतनी रात को! &lt;br /&gt; मैंने कहा कुछ नहीं पानी पीने के लिए आया था तो तुम्हारे कमरे की लाइट जल रही थी तो मैंने तुमको नग्न अवस्था में देख लिया तो… &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; निशा ने बोला इसमें क्या है! मैं तो अपना स्ट्रेस दूर कर रही थी! &lt;br /&gt; ऐसा बोलते-बोलते वो मेरे नजदीक आ गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा लंड खड़ा हो गया था और उसको भी बहुत गर्मी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; निशा ने कहा अचानक तुम मुझे चोदोगे? हाँ कि ना! नहीं तो मेरे भाई को ये सब कह दूँगी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा किसी को कुछ नहीं कहना है! तुम जो कहोगी वैसे करूँगा! &lt;br /&gt; तो ठीक है फिर! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा कह के वो मेरी चड्डी को निकाल कर मेरा लंबा लंड हाथ में लेकर हिलाने लगी। &lt;br /&gt; मेरे को भी मज़ा आ रहा था और उसको भी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर बाद मैंने भी उसके बूब्स को दबाया बहुत स्मूथ थे उसके बूब्स। &lt;br /&gt; और थोड़ी देर के लिए उसकी चूत को अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से हिलाया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो सिसकारियां ले रही थी आह! आह! साहिल! और ज़ोर से! और ज़ोर से! &lt;br /&gt; मैंने कहा तो ले और ज़ोर से! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने थोड़े टाइम के बाद अपने लंड को उसके मुँह में दे दिया और वो मज़े से मेरा लंड चूस रही थी। &lt;br /&gt; मेरे को बहुत मज़ा आ रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर थोड़े टाइम के बाद उसकी टी-शर्ट निकाल दी। &lt;br /&gt; वो पूरी नंगी हो गई और मैं भी पूरा नंगा हो गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; और फिर मैंने उसका एक पैर रसोड़े में जो पत्थर लगा होता है वहाँ पे उसका पैर रखा। &lt;br /&gt; फिर मैंने मेरा लंड उसकी चूत पर रखा थोड़ा रगड़ा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने सिसकारियां लेना चालू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने बोला साहिल! लंड को पूरा अंदर डाल दो अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है! &lt;br /&gt; तभी मैंने मेरा लंड ज़ोर से उसकी चूत में डाल दिया! वो ज़ोर से चिल्लाई! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा चिल्ला मत! तेरा भाई उठ जायेगा! &lt;br /&gt; तो वो बोली पहली बार लंड चूत में गया है तो दर्द तो होगा ही ना! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करता रहा। &lt;br /&gt; मेरे को तो बहुत मज़ा आ रहा था और वो भी मेरा नाम ले कर चोदने का मज़ा ले रही थी ओह साहिल! और ज़ोर से! और ज़ोर से! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसको चोदता गया वो सिसकारियां लेती रही। &lt;br /&gt; वर्जिन गर्ल फक का मजा लेते हुए हम दोनों ही झड़ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस प्रकार से मैंने उसे पहली चुदाई का मजा दिया&lt;br /&gt; हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और किस करने लगे थोड़ी देर तक। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने कहा चलो मेरे रूम के बाथरूम में हम दोनों साथ में नहा लेते हैं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम दोनों बाथरूम में नंगे होकर एक दूसरे को साबुन से साफ़ करके नहा रहे थे तभी फिर से हम दोनों का चुदाई का मूड बन गया था। &lt;br /&gt; तो फिर से मैंने उसको बाथरूम में लिटा दिया और उसकी चूत में लंड डालकर चोदने लगा। &lt;br /&gt; लंड को अंदर-बाहर करके मज़ा लेने लगे हम दोनों। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसको उठा के खड़ा-खड़ा चोदा उछल-उछल के मेरा लंड ले रही थी वो और हम दोनों मज़े मार रहे थे। &lt;br /&gt; फिर हम दोनों झड़ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों साथ नहा के फिर उसके बेड पे थोड़े टाइम के लिए चिपक के आराम कर रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; निशा ने कहा ये बात किसी को पता चलना नहीं चाहिए! &lt;br /&gt; मैंने कहा मैं पागल हूँ क्या कि ये बात किसी से कहूँगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा कहकर मैं उसको किस और थोड़े बूब्स दबाकर उसके कमरे से बाहर निकल कर वीरेन के रूम में जा कर सो गया। &lt;br /&gt; फिर सुबह होते ही मैं मेरे घर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आप सबको मेरी कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद&lt;br /&gt; वर्जिन गर्ल फक स्टोरी पर अपनी राय मुझे बताएं.</description>
<link>https://mixrt.com/t2717</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:51:56 +0300</pubDate>
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<item><title> भाभी के साथ ग्रुप में सेक्स किया- 1</title>
<description>भाभी गैंग बैंग स्टोरी में मैं अपने भाई के घर रहने गयी तो भाई को बाहर जाना थाएक शाम भाभी पार्लर से तैयार होकर आई और किसी को फोन कियावो 5 लड़कों की बात कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो स्वागत है आप सभी का सन्नो की दुनिया में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं इधर भाभी गैंग बैंग स्टोरी में आपको बताने जा रही हूँ कि मेरी भाभी की ग्रुप में चुदाई किस तरह से हुई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी दूर की रिश्तेदारी में एक भाभी थी जिनसे मेरा नाता अच्छा था&lt;br /&gt; वह बहुत दिनों से मुझे अपने शहर घूमने बुला रही थी क्योंकि वह बेंगलुरु में रहती थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आप तो जानते ही हैं कि बेंगलुरु एक बहुत अच्छी सिटी है&lt;br /&gt; भाभी के हसबैंड मतलब मेरे रिश्ते के भैया बेंगलुरु में जॉब करते थे और मेरे उधर पहुंचने के बाद वे 3 दिन को कहीं किसी काम से बाहर जा रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनका घर तीन फ्लोर का है&lt;br /&gt; भाभी दिखने में एकदम कड़क माल लगती है&lt;br /&gt; मुझसे अच्छी उनकी बॉन्डिंग है और चेहरा भी काफी सुंदर है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दरअसल वह मॉडलिंग करना चाहती थी लेकिन किस्मत ने राह ही पलट दी थी&lt;br /&gt; वैसे भाभी बहुत मजाकिया थी वह अक्सर मेरे स्तनों का मजाक बनाती रहती थी और कभी कभी तो हाथ से एक दूध दबा भी दिया करती थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी के स्तन काफी टाइट थे जबकि मेरे ढीले हो चुके थे&lt;br /&gt; लेकिन चुदने की स्टेमिना मुझमें ज्यादा थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके घर में आने के बाद सारे दिन हम दोनों बहुत मस्ती करते रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शाम 7 बजे अचानक भाभी बोली- सनाया मैं पार्लर जा कर अभी आती हूँ&lt;br /&gt; भाभी करीब 8 बजे वापिस आई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस वक्त वह एकदम कड़क शाइन मार रही थी&lt;br /&gt; मैंने उसकी तारीफ की&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह बोली- सनाया यार क्या बताऊं उस पार्लर वाली ने जबरदस्ती इतना मेकअप कर दियावह मेरी फ्रेंड है तो मानती ही नहीं है&lt;br /&gt; यह सब कह कर भाभी बाथरूम में चली गई&lt;br /&gt; उधर से वह 20 मिनट बाद निकली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम लोगों ने खाना खाया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी अचानक भाभी पास एक कॉल आई और वह उठ कर चली गई&lt;br /&gt; उसकी बात चल रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसके थोड़ी पास को गई तो मैंने सुना कि वह कॉल पर कह रही थी ‘मैं कुछ नहीं सुनना चाहती विवेक मुझे बस पांच अच्छे मस्त लड़के चाहिएएक भी कम नहीं चाहिए … मैं पैसे दूँगी. &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं सोचने लगी कि ये क्या बातें हो रही हैंसाला चल क्या रहा है! &lt;br /&gt; फिर वह आ गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों बैठे रहे और टीवी देखते रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 10 बजे भाभी बोली- सनाया अब तुम सो जाओमुझे तेरे भैया से बात करनी है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम लोग अलग अलग कमरे में आ कर सो गए&lt;br /&gt; मैं अपने कमरे में आकर मोबाइल में लग गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 11 बजे भाभी आई ‘सनाया सो गई? &lt;br /&gt; मैंने सोचा कि वह गुस्सा न करे इसलिए चुप रही&lt;br /&gt; वह चली गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब करीब 11-30 पर मैं बाथरूम जाने उठी तो सोचने लगी कि एक बार भाभी को देख कर आती हूँ&lt;br /&gt; मैंने देखा तो भाभी अपने कमरे में नहीं थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह देख कर मैं घबरा गई कि आखिर भाभी कहां गई है? &lt;br /&gt; तब मैंने नीचे से आवाज आती सुनी तो मैं दबे पांव नीचे आ गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर देखा तो कोई नहीं था&lt;br /&gt; मैं और नीचे वाले माले में गई तो देखा कि वहाँ का तो नजारा ही अलग था&lt;br /&gt; वह सब देख कर मैं चौंक गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने देखा कि भाभी पांच लड़कों के सामने नंगी डांस कर रही थी और वह सब लड़के अपना अपना लंड हिला रहे हैं&lt;br /&gt; ये कामुक दृश्य देख कर मैं अचंभित हो गई कि आखिर भाभी यह सब कर क्या रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उन लड़कों के लौड़ों पर नजर गई तो किसी का लंड बहुत मोटा किसी का लंड लम्बा और किसी का लंड ऐसा जैसे गधे का लंड होसब एक से बढ़ कर एक लंड धारी थे&lt;br /&gt; तभी एक लड़का आगे आया और उसने भाभी को अपना लंड पकड़ा दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी उसके लौड़े को पकड़ कर चूसने लगी&lt;br /&gt; फिर भाभी ने सबको उंगली से इशारा किया तो सब उसके करीब आ गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब सबके लंड सामने आ गए थे&lt;br /&gt; भाभी थोड़ी थोड़ी करके सबके लौड़े चूसने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे सारे लड़के बस यही आवाज लगा रहे थे- आह चूस मेरी बुलबुल … चूस मेरी बुलबुल! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह खेल 5 मिनट तक चलता रहा&lt;br /&gt; तभी एक लड़के ने भाभी के बालों को पकड़ा और पूरा लंड मुँह में झटके देते हुए पेलना शुरू कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर क्या … भाभी भी बड़ी वाली रांड के जैसे हुक़्क हुक़्क करके लंड लेने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक लड़का बोला- अब बस कर रे … ये मर जाएगी&lt;br /&gt; दूसरा बोला- अरे ये बहुत बड़ी वाली रंडी हैमुझे इसका मुँह दे … ये क्या मारेगी साली … ये 20 लंड से एक साथ मरवा लेगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी उन सबके बीच में सच में रंडी से कम नहीं लग रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने सोचा कि ठीक है जब ननद यह सब कर सकती है तो भाभी को क्या दिक्कत है&lt;br /&gt; मैं यह भी समझती थी कि चूत की प्यास क्या होती है लेकिन पांच के बीच में अकेली एक चुत … ये कुछ ज्यादा ही प्यासी थीऐसा लग रहा था जैसे भैया कुछ काम के ही नहीं हैंतभी तो भाभी बाहर मुँह मार रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसकी चुदास को देख रही थी और मन ही मन सोच भी रही थी कि आज मेरा आशिक मेरे साथ होता तो वह भी मुझे चोदता और सुकून देता&lt;br /&gt; भाभी भी मेरी ही तरह थी जो मैदान में पांच लंड वीरों के साथ अकेली लड़ रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आज लगता था कि भाभी की अच्छे से बलि चढ़ने के समय आ गया था&lt;br /&gt; उन सबमें से जो लाल बालों का था उसकी साइज करीब बीच की थीलंड की लंबाई मोटाई भी ज्यादा नहीं थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने भाभी को लिटाया और चूत पर थूक लगा कर चुदाई की तैयारी करने लगा&lt;br /&gt; भाभी के सिर पर अब चार लंड थे दो लोग उसके पैर पकड़े थे और दो हाथ पकड़े हुए थेभाभी अपने पास वाले दोनों का लंड पकड़े हुई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब एक दूध को चूसने में लग गया था और दूसरा उनके मुँह में लंड देकर चुसवा रहा था&lt;br /&gt; जो लंड चुसा रहा था वह असली शेर था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका लंड इतनी कामुक स्थिति के बाद भी खड़ा नहीं हो रहा थाउसका लंड भी सबसे बड़ा और मोटा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब जो लाल बाल वाला लड़का भाभी की चूत पर लंड रखने में लगा था उसने बड़े ही आराम से लंड को चुत में पेल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी की एक हल्की सी आवाज आई- आआह आराम से अनूप! &lt;br /&gt; तभी ऊपर वाले ने अपना पूरा लंड भाभी के मुँह में डाल दिया जिससे भाभी की आवाज बंद हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी वक्त नीचे से अनूप ने भाभी की चूत में अपना पूरा लंड एक झटके में पेल दिया&lt;br /&gt; वह लंड के तेज तेज धक्के देने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी कराहने की कोशिश कर रही थीं&lt;br /&gt; लेकिन मुँह में लंड होने की वजह से जैसे कोई गूंगी आं ऊहन्न कर रही हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दो मिनट बाद भाभी ने किसी तरह से लंड मुँह से निकाला और बोली- मेरा मुँह खुला रहने दो … कम से कम मुझे दर्द से कराहने तो दो … मुझे भी मजा लेने दो न … और सब लाइन से बैठो यार … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ&lt;br /&gt; भाभी यह कह कर ऊपर वाले से बोली- ले … मेरे दूध पकड़ कर चूस! &lt;br /&gt; भाभी गैंग बैंग का मजा लेने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने अपने एक मम्मे को उसके मुँह में दे दिया और उसी का लंड अपनी चुत से खाने लगी&lt;br /&gt; बाकी 3 लड़के पता नहीं क्यों इधर उधर देखने लगे थे&lt;br /&gt; मुझे लगा कि कहीं उन्हें अहसास तो नहीं हो गया तो मैं जरा अलग को हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उधर सब सामान्य हो गया थाभाभी के ऊपर जो लड़का चढ़ कर उसे चोद रहा था वह हट गया था और कोई दूसरा लड़का अपना लंड पेल कर उसे चोदने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 5 मिनट बाद उस लड़के ने भाभी की चुत से लंड निकाल लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब भाभी को उस असली वाले मर्द लड़के ने पकड़ लिया&lt;br /&gt; भाभी मुस्कुराती हुई उसको देखने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी भी पूरी छिनाल और कमीनी लग रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जैसे ही वह मर्द पहलवान टाइप का लड़का अपना लंड भाभी की चुत में पेला तो भाभी की दर्द से चीख निकलने लगी ‘ऊऊ ममम्मि री आआह मेरी जान निकल गई आह उई मां … रुक जाओ रे! &lt;br /&gt; मगर वह तो किसी सांड की तरह भाभी की चुत पर पिल पड़ा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने वापस अपने लौड़े को चुत से खींचा और पुन: पेल दिया- ले कुतिया खा बहन की लौड़ी आह बड़ी कसी चुत है तेरी रंडी! &lt;br /&gt; ‘आह मर गई आआह रुको यार संजू! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मुझे समझ में आया कि उसका नाम संजू था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू एक पल के लिए भी नहीं रुका वह ताबड़तोड़ भाभी की चुत चोदने में लगा रहा&lt;br /&gt; भाभी की तो बस आआह आआह ईएहद ईई हह जान आआह की आवाज निकल रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं करीब 10 मिनट तक उन दोनों की धकापेल चुदाई को देखती रही&lt;br /&gt; मेरी चुत में भी आग लग गई थी तो मैं अपना लोअर नीचे करके चूत में उंगली डाल कर मजा लेने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी एक लड़के ने भाभी के कान में कुछ कहा तो भाभी सर हिला दिया&lt;br /&gt; वह उठा और सीधे मेरी तरफ भागता हुआ आया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं समझ गई कि भाभी ने मुझे देख लिया है&lt;br /&gt; मैं तेजी से उठी पर उस लड़के ने मुझे पकड़ लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं चीखना चाहती थी लेकिन वह सीधा मेरा मुँह पकड़ कर मुझे चूमने लगा&lt;br /&gt; फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और खींचता हुआ भाभी के पास ले आया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मुझे भाभी के बाजू में ही लिटा दिया और मेरे कपड़े खींचने लगा&lt;br /&gt; मैं लगातार चीख रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी बोली- सनाया चुप हो जाओ&lt;br /&gt; मैं उसे देखने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर वे दो लड़के अभी भी मेरा बदन नोंचने लगे थे&lt;br /&gt; एक मेरे मुँह से मुँह लगा कर मुझे चूमने लगा था और दूसरे ने भी मेरे दूध पकड़ लिए थे जिसे उसने नहीं छोड़े&lt;br /&gt; इतने में किसी ने मेरा लोअर खींच कर मेरी टांगों से निकाल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं कब नंगी हो गई पता ही नहीं चला&lt;br /&gt; तभी किसी ने अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया तो मैं उसके मोटे लंड से अकबका गई और मेरी आंखें फटने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका लंड काफी मोटा लंड था&lt;br /&gt; भाभी मुझे सहलाने लगी थी और कहे जा रही थी- सनाया बेबी चुप हो जाओ चुप हो जाओ बस हो गया … अरे कौन सा पहली बार चुद रही हो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इधर मैं आआह आआह करने में लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर जो लड़का मेरे मुँह को अपने मुँह से बंद किए हुए था उसने मुँह हटाया तो मेरा मुँह खुल गया&lt;br /&gt; मैं ‘आह छोड़ दो छोड़ दो करने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; नीचे दो लड़के मेरे पैर पकड़े हुए थे और एक मेरी चूत को चोदने में लगा था&lt;br /&gt; मैंने भी एक पल सोचा कि सन्नो अब चुप हो जा कौन सा मर जाएगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने थोड़ी देर तक नाटक किया ताकि भाभी को लगे कि मैं अपनी मर्जी के बिना ही चुदाई करवा रही हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं धीरे धीरे आंख बंद करके बेहोश होने का ड्रामा करने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे बूब्स नग्न तो थे ही तो चोदने वाला मेरे एक दूध को चूसने लगा&lt;br /&gt; मेरे दूसरे दूध पर एक दूसरा लड़का पिल पड़ा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे लोग पागलों की तरह मेरे मम्मों का हलवा बना रहे थे&lt;br /&gt; बाजू वाला तो मेरे दूध को बच्चों की तरह चुसकने में लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; नीचे वाला जो मुझे चोद रहा था वह कहने लगा- आह … साली क्या मस्त माल है यार … साली मस्त लौंडिया चोदने मिली है! &lt;br /&gt; इतने में वह बड़े लंड वाला संजू भी आ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी मेरे सिर तरफ से मुझे सम्भालने में लगी थीं&lt;br /&gt; मैं आह आह करने लगी थी तो वे कही जा रही थीं- बस बेटू बस हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दूसरी ओर भाभी संजू से कह रही थीं- बेबी थूक लगा लो इसकी चुत टाइट है! &lt;br /&gt; संजू ने झट से लौड़े पर थूक लगाया और मेरी चुत में बेरहमी से डाल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका लंड वाकयी गधे के लंड जैसा था तो मेरी आंखें फैल गईं और चीखने लगी ‘आआह भाभी बचा लो! &lt;br /&gt; मैं उसके लौड़े से होने वाले दर्द से रोने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी बोली- संजू सम्भाल कर पेल साले … लौंडिया को दर्द हो रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू मुझे किस करने लगा और लंड पेले हुए ही मेरे ऊपर लेट गया&lt;br /&gt; वह लेटकर मेरे एक दूध को पकड़ कर चूसने लगा और बोला- बस सनाया हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं रोती हुई ऊऊ ऊम कर रही थी&lt;br /&gt; संजू वापस झटके देने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं संजू के साथ किस में लग गई थी और सुबक भी रही थी&lt;br /&gt; जैसे कोई गर्लफ्रेंड प्यार में भी दर्द से रो रही हो और साथ भी दे रही हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी हालत उसी तरह की थी&lt;br /&gt; मैं बच्चों के जैसे रो रही थी क्योंकि बहुत दिनों बाद मैं ऐसे मोटे लंड से चुद कर दर्द को झेल रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू को भाभी ने पकड़ लिया लेकिन संजू अपने मूड में था&lt;br /&gt; वह बाकी लंड धारकों से बोला- अबे इस लड़की को सम्भालो रे … साली बहुत उछल रही है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में 2 लड़के अपने कड़क लंड लेकर आए और उन दोनों ने भाभी को बीच में लिटा कर चूत में लंड घुसेड़ दिया&lt;br /&gt; पीछे वाला भाभी की गांड मारने की जुगत में लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इधर संजू मुझे बजाने में लगा था&lt;br /&gt; जिस तरह से वह मेरे दूध मसल कर चूस रहा था उससे लग रहा था जैसे वह मेरे मम्मों का तो आज मसल मसल कर हलवा ही बना देगा&lt;br /&gt; संजू की उत्तेजना बढ़ गई थी और अब वह तेज तेज झटके देने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं भी ‘आआह आआह इह ईई ऊऊऊ भाभी. कर रही थी&lt;br /&gt; वह मुझे अपने नीचे दबा कर चोद रहा था और साथ ही अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद को कुरेदने भी लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे अपनी गांड में कुलबुली होने लगी थी मगर संजू का लंड किसी नीग्रो के लंड जैसा था तो मेरी गांड मुझे रोक रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो आपको मेरी इस ग्रुप सेक्स कहानी में मजा आ रहा होगा&lt;br /&gt; भाभी गैंग बैंग स्टोरी में आगे अभी बहुत चुदाई बाकी है&lt;br /&gt; प्लीज अपने मेल व कमेंट्स जरूर से भेजें&lt;br /&gt;</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:51:17 +0300</pubDate>
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<item><title>विधवा भाभी का इलाज और चुदाई</title>
<description>गाँव Xxx कहानी में मैं गांओं का झोला छाप डॉक्टर हूँलड़कियों के चूतड़ों पर सुई लगाकर मजा लेता हूँऐसे ही एक विधवा भाभी के दोनों कूल्हों पर सुई लगाई तो वह सेट हो गयी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अंतर्वासना के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं डॉगौतम यू.पीका रहने वाला हूँ। &lt;br /&gt; मेरा एक छोटे से गाँव में दवाखाना है जिस गाँव में मैं अकेला ही रहता हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; गाँव में अभी मैं ही अकेला डॉक्टर हूँ; एक और डॉक्टर थे जिनका कोरोना के समय निधन हो गया था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं एक झोलाछाप डॉक्टर हूँ और गाँव में लगभग सभी का इलाज करता हूँ। &lt;br /&gt; गाँव के लोग गरीब हैं तो कम पैसे में इलाज करवाना उनकी मजबूरी है इसलिए मेरा दवाखाना बहुत चलता है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब आगे आते हैं गाँव Xxx कहानी पर। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरे गाँव में सभी प्रकार के लोग हैं। मैं लोगों का इलाज करके उनको इंजेक्शन देता हूँ। &lt;br /&gt; अक्सर सभी महिलाओं को दो इंजेक्शन तो देता ही हूँ और कहाँ देता हूँ तो यह आप सभी जानते हैं— उनके कोमल-कोमल कूल्हों में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ महिलाएँ शांति से लगवा लेती हैं कुछ महिलाएँ थोड़ा-बहुत चिल्लाती हैं और कुछ महिलाएँ रोने लगती हैं&lt;br /&gt; अक्सर कम उम्र की महिलाएँ मुझे बोलती हैं कि हाथ में दे दो मगर मैं तो ठहरा ठरकी कहाँ हाथ में दूँगा! और उनकी मजबूरी हो जाती है इंजेक्शन लेना। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; गाँव में ही एक भाभी हैं जिनके पति का कोरोना में निधन हो गया था। &lt;br /&gt; उनके पति किसी अच्छी सरकारी जॉब में थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; निधन के बाद उनको अनुकम्पा नियुक्ति मिली तो वह गाँव में ही किसी ऑफिस में क्लर्क के पद पर हैं। &lt;br /&gt; उनके एक बेटा है जिसकी उम्र लगभग 6 साल है। &lt;br /&gt; इसके पहले मैंने उनके बेटे को करीब 2-3 बार सुई दी है जब वह बीमार हुआ था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन मैं अचानक दवाखाने पर खाली बैठा था तो मैंने देखा कि भाभी अपने बेटे के साथ मेरे क्लिनिक की ओर आ रही हैं। &lt;br /&gt; मुझे लगा शायद बेटा फिर से बीमार होगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस समय मैं अपने क्लिनिक में खाली बैठा हुआ था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं आप लोगों को अपने क्लिनिक के बारे में बता दूँ— मेरा क्लिनिक लगभग 8 फीट x 10 फीट का है और सिंगल रूम का क्लिनिक है जैसा कि अक्सर झोलाछाप डॉक्टरों का रहता है। &lt;br /&gt; पीछे वाली दीवार के पास में एक पर्दा लगा हुआ है और पर्दे के पीछे एक बेंच है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पर्दे के सामने मेरी एक टेबल-चेयर और पेशेंट के लिए स्टूल है। &lt;br /&gt; सामने पेशेंट लोगों के लिए एक बेंच भी रखी हुई है। &lt;br /&gt; मेरी टेबल के साइड में एक अलमारी रखी हुई है जिसमें दवाई वगैरह रखता हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी और उनके बेटे के आने पर मैंने उनका वेलकम किया और बैठने को कहा। &lt;br /&gt; भाभी का नाम मालती (बदला हुआ नाम) था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह बिल्कुल हुस्न की मल्लिका थीं! उनका फिगर का साइज लगभग 34-34-36 है और उन्होंने उस दिन काले रंग की साड़ी काला पेटीकोट और लाल ब्लाउज पहना हुआ था। &lt;br /&gt; साड़ी में से उनकी झांकती हुई नाभि बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने भाभी से पूछा क्यों बेटा बीमार है क्या? &lt;br /&gt; भाभी ने कहा नहीं भैया मैं बीमार हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतना सुनते ही मेरे अंदर खुशी की लहर दौड़ने लगी। &lt;br /&gt; मैंने भाभी को स्टूल पर बिठाया और उनका बेटा वहीं बेंच पर बैठकर मोबाइल में खेल रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने भाभी से कहा बताइए क्या परेशानी है? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा भैया 2 दिनों से अनमना सा लग रहा है बहुत बेचैनी हो रही है! पूरे शरीर में दर्द है और फीवर भी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पर्ची ली और उनका नाम और उम्र पूछा। &lt;br /&gt; उसने बताया मालती 34। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पूछा भाभी कोई दवाई वगैरह ली थी क्या आपने? &lt;br /&gt; उसने कहा दर्द की गोली बस खाई है कल। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने स्टेथो लेकर अपने कान में लगाया और उनके ब्रेस्ट में लगभग 6 बार लगाकर उनको ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने को बोलने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसके बाद मैंने थर्मामीटर लिया और उनसे कहा भाभी इसे ब्लाउज स्लाइड करके अपनी बगल में लगा लो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने अपने ब्लाउज के 2 हुक खोलकर स्लाइड किया। &lt;br /&gt; मैंने थर्मामीटर उसकी बगल में लगा दिया जिससे उसके ब्रेस्ट के ऊपर का हिस्सा विज़िबल था बट उसने उसे साड़ी के पल्लू से ढक लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसकी साड़ी में से झांकती नाभि को देखा और 3-4 बार उसकी साड़ी के अंदर से पेट को दबाकर चेक किया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं अपनी चेयर से खड़े होकर साइड वाली अलमारी में से 2 सिरिंज और 2 एम्प्यूल निकाला। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सुई देखकर उसे डर लगने लगा वह डरी-डरी सी लग रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसकी तरफ देखा और बोला भाभी 2 इंजेक्शन लगना है आपको आप रेडी हो जाइये! &lt;br /&gt; उसने कहा डॉक्टर साहब इंजेक्शन से बहुत डर लगता है प्लीज आप गोली दे दीजिये! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा गोली भी दूँगा और यह इंजेक्शन भी लगाऊँगा। अभी 2 इंजेक्शन लगेगा और कल 1 लगेगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब उसके पास कोई भी ऑप्शन नहीं था तो वह आखिरकार राजी हुई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने पूछा भैया कहाँ लगेगा? &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी कूल्हों में लगेगा आप सैंडल उतार कर पीछे बेंच में लेट जाइये। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा भैया हाथ में दे दीजिये! &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी यह इंजेक्शन पीछे ही लगाता हूँ हाथ में नहीं दे सकते! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा था। &lt;br /&gt; मैंने अपना पहला इंजेक्शन लोड करना शुरू किया और वह खड़ी होकर अंदर जाने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जाते-जाते अपने पेटीकोट का नाड़ा खोलते हुए अंदर गयी। &lt;br /&gt; मैं भी पहला इंजेक्शन लोड कर उसके पीछे-पीछे चला गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी वहाँ उलटी लेटी हुई थीं और अभी मेरे सामने काला ब्लाउज उसके नीचे गोरी मखमली पीठ और उसके नीचे फिर काली साड़ी सच में चार चाँद लगा रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने भाभी से कहा भाभी किसका वेट कर रही हो? हम दोनों ही हैं यहाँ साड़ी नीचे करिये। &lt;br /&gt; उसने हाँ बोलकर थोड़ी सी साड़ी नीचे खिसकाई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने साड़ी इस कदर नीचे की कि उसकी पेंटी के दर्शन नहीं हुए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी यह इंजेक्शन दर्द देगा तो थोड़ा नीचे लगेगा और नीचे करिये। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह थोड़ा और नीचे कर ही रही थी कि इतने में मैंने ही उसकी हेल्प की और उसके कूल्हे की क्लीवेज अच्छे से दिख रही थी और आधा दायाँ कूल्हा मेरे सामने पंक्चर होने के लिए रेडी था। &lt;br /&gt; मैंने सिरिंज में से एयर बबल निकाला और वह यह देखकर बहुत घबरा गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने धीमी आवाज़ में कहा भैया धीरे लगाना! &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी आप सामने मुँह करो और कमर को ढीली छोड़ो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कॉटन से रब किया और धीरे से नीडल जैसे ही अंदर घुसाया उसने ज़ोर से कहा आउच! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने धीरे-धीरे पूरी नीडल अंदर डाल दी और फिर प्लंजर प्रेस करना स्टार्ट किया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; 1ml होने पर उसकी सिसकारी निकलने लगी और जैसे ही इंजेक्शन 2ml कम्प्लीट हुआ वह निकालो निकालो! कहने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने 2ml पूरा करके नीडल बाहर निकाला और हाथ से मलने लगा और उसकी साड़ी के अंदर से सिर्फ पेंटी को ऊपर किया और पेंटी के ऊपर से मलने लगा। &lt;br /&gt; उसने पिंक कलर की फूल वाली पेंटी पहनी हुई थी जिसमें वह बहुत ही सुन्दर लग रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसे मलने को कहकर बाहर आकर दूसरा इंजेक्शन लोड किया और उसको लेकर अंदर गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने दूसरे साइड से साड़ी को नीचे किया फिर मैंने और खिसकाया और उसके बायीं तरफ के कूल्हे में जैसे ही नीडल को घुसाया वह आह हह हहह मम्मी! करने लगी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जैसे ही मैंने प्लंजर दबाना स्टार्ट किया उसने मोनिंग स्टार्ट कर दी। &lt;br /&gt; इस बार उसे ज्यादा दर्द हो रहा था इंजेक्शन 3ml का था। बट जैसे ही इंजेक्शन 2ml हुआ उसने रोना शुरू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने बस बस हो गया कहा और 3ml इंजेक्शन कम्प्लीट करके उसकी पेंटी को ऊपर किया और हथेली से लगभग 1 मिनट तक घिसा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बाहर आकर अपनी चेयर पर बैठ गया। &lt;br /&gt; वह लगभग 2 मिनट बाद बाहर आई और स्टूल पर बैठी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी ज्यादा दर्द हुआ क्या? &lt;br /&gt; उसने कहा सर बहुत दर्द हुआ और अभी भी दे रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसे कुछ मेडिसिन दी और अपना नंबर भी दिया कि अगर कोई दिक्कत हो तो कॉल करके पूछ लेना। &lt;br /&gt; वह घर चली गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर रात में करीब 10:30 बजे मुझे व्हाट्सएप में एक अनजान नंबर से मैसेज आया। &lt;br /&gt; उसमें Hi लिखा था&lt;br /&gt; मैंने भी Hi रिप्लाई दिया तो उसका जवाब आया कि आज आपके यहाँ इंजेक्शन लगवाने आये थे तो बहुत दर्द दे रहा है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा किसे? &lt;br /&gt; उसने कहा मुझे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अभी तक उसने अपनी आइडेंटिटी नहीं बताई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा कहाँ लगा था इंजेक्शन? &lt;br /&gt; उसने कहा पुट्ठे में 2 इंजेक्शन! &lt;br /&gt; मैंने कहा बर्फ से सिकाई कर लो ठीक हो जाएगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हमारी धीरे-धीरे चैट होना शुरू हुई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले दिन वह फिर से आई अपना बचा हुआ 1 इंजेक्शन लेने बट अब मालती पहले दिन से थोड़ा बेशरम लग रही थी। &lt;br /&gt; उसके आने पर मैंने इंजेक्शन लोड करना शुरू कर दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने आज पीले रंग की लेगिंग और लाल रंग का कुर्ता पहना हुआ था। &lt;br /&gt; लोड होने पर वह अंदर चली गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं जब अंदर गया तो वह पेट के बल लेटी हुई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा भाभी आज किस साइड लगवाना है सुई? &lt;br /&gt; उसने कहा भैया दायीं तरफ ही लगा दो! &lt;br /&gt; जिसमें कल पहला वाला इंजेक्शन लगा था क्योंकि दूसरा वाला इंजेक्शन तो बहुत दर्द दे रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसका कुर्ता ऊपर करके पलटा दिया और दायीं तरफ से लेगिंग लगभग 3/4 नीचे की। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके कूल्हे के क्लीवेज दिख रहे थे। &lt;br /&gt; मैंने यह इंजेक्शन लगाया तो उसे आज भी रोना आ गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर वह चली गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ती चली गईं। &lt;br /&gt; वह हमेशा कहती थी अब तुमसे इंजेक्शन नहीं लगवाऊँगी बहुत ज़ोर से देते हो! &lt;br /&gt; उसे मोहल्ले की बाकी महिलाओं ने भी बताया था कि डॉगौतम बहुत तेज़ सुई लगाते हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर धीरे-धीरे हम लोग और करीब आने लगे। &lt;br /&gt; वह अपने पति के बारे में याद करके रोने लगती थी वह बहुत प्यार करती थी अपने पति से&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; धीरे-धीरे हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए और उसके बाद वह मेरी जीएफ बन गयी&lt;br /&gt; और खुलते-खुलते हम चैट में रोमांटिक होने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद हम लोग सेक्स वगैरह की बातें भी चैट में और फ़ोन में करने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मुझसे पूछा आपकी कोई जीएफ पहले थी? &lt;br /&gt; मैंने कहा हाँ पहले थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने पूछा आपने कभी सेक्स किया था उसके साथ? &lt;br /&gt; मैंने कहा मेरा बहुत मन था किन्तु वह मना कर देती थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसकी बातों से लगता था कि ये सब बातें करते-करते उसकी चूत गीली हो जाती थी। &lt;br /&gt; मैंने एक-दो बार मिलने पर उसके बूब्स भी दबाए हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसके बाद हम लोग बीच-बीच में मिलने भी लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा जब बर्थडे आया तो उसने कहा मेरे राजा क्या चाहिए तुम्हें गिफ्ट? &lt;br /&gt; मैंने कहा वही जो हर एक बॉयफ्रेंड को चाहिए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शुरू में तो वह मुझसे गुस्सा हो गयी फिर मैंने धीरे से मनाया तो वह मान गयी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब हमारा प्लान हुआ कि रात में वह 7 बजे मेरे घर आएगी &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 7:25 में वह और उसका बेटा मेरे घर आए। &lt;br /&gt; उसने सफ़ेद रंग की लेगिंग और नीले रंग का कुर्ता पहना था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसको अंदर बैठाया। &lt;br /&gt; फिर हम लोग आधे घंटे लगभग वहीं बैठे रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने बताया कि उसे जल्दी घर भी लौटना है। &lt;br /&gt; मैंने उसके बेटे को मेरे मोबाइल में गेम लगाकर दे दिया और मैं मालती के साथ अंदर बेडरूम में आ गया और कमरा अंदर से बंद कर लिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दरवाजा बंद करते ही मैंने उसे दीवार में टिकाकर उसका चुम्बन लेना शुरू किया। &lt;br /&gt; करीब 5 मिनट तक चुम्बन लेते-लेते मेरे हाथ उसके बूब्स को मसलने लगे और देखते ही देखते मैंने उसके कुर्ते को ऊपर करके उतार दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मेरे सामने वह काली ब्रा में खड़ी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोला और उसके मम्मों को आज़ाद किया। &lt;br /&gt; मम्मों को मसलते-मसलते मैंने अपना हाथ नीचे ले जाना शुरू किया और उसके चूतिड़ को लेगिंग के ऊपर से ही मसलने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने मेरी शर्ट उतारी और मैंने उसे बिस्तर में पटक दिया। &lt;br /&gt; अब मैंने उसकी लेगिंग को उतार कर नीचे कर दिया लगता है आज ही वैक्स करवाया था। &lt;br /&gt; अब वह मेरे सामने बस लाल रंग की पेंटी में थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपना जींस उतारा और अपनी बनयान और चड्डी भी उतार दी। &lt;br /&gt; मैंने उसके शरीर का ऊपर से नीचे तक और आगे से पीछे तक चुम्बन किया और फिर उसकी पेंटी को भी निकाल कर फेंक दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैंने उसकी टाँगें मोड़कर उसकी चूत के पास अपने लंड को सटाकर बैठ गया और उसकी चूत के दरवाजे में स्पर्श कराने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने कहा कंडोम लगा लो! &lt;br /&gt; मैंने कहा एक गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगा दूँगा तो 03 महीने तक आराम रहेगा! &lt;br /&gt; उसने कहा यह पहली और आखिरी बार है इसके बाद नहीं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने धीरे से उसकी चूत के दरवाजे में सेट किया। &lt;br /&gt; मेरे दोनों हाथ उसके दोनों हाथों को पकड़े हुए थे और साथ में मम्मों को भी मसलते जा रहे थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया तो लंड बाहर फिसल गया। &lt;br /&gt; मैंने इस बार एक हाथ से लंड को सेट किया और जैसे ही झटका मारा तो लगभग 1 इंच लंड अंदर गया और उसे बहुत दर्द हो रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने हल्का सा लंड को पीछे खींचा और इस बार थोड़ी ताकत लगाकर पेला तो लंड लगभग 2 इंच अंदर गया और वह छटपटाने लगी! &lt;br /&gt; उसके मुँह से चिल्लाने की आवाज़ भी आई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसको समूच करना शुरू किया और लंड को बाहर निकालकर फिर से अंदर डाला तो उसके आँसू आना शुरू हो गए; उसे बहुत दर्द हो रहा था। &lt;br /&gt; इस बार लंड अपनी सीमा तक लगभग 5 इंच पहुँच चुका था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे लग नहीं रहा था कि इसकी इतनी टाइट चूत होगी वैसे 4-5 साल से अनचुदी चूत तो टाइट हो ही जाती है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के बढ़ाने शुरू कर दिए और 5 मिनट बाद वीर्य आने लगा तो लंड को बाहर निकालकर उसके पेट पर गिरा दिया। &lt;br /&gt; फिर हमने जल्दी-जल्दी 1 राउंड और मारा इस बार भी वह रोने लगी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसी तरह कहानी और भी है अगली बार बताएँगे कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी गाँव Xxx कहानी अच्छी लगी होगी&lt;br /&gt; मेल और कमेंट्स ज़रूर करियेगा.</description>
<link>https://mixrt.com/t2715</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:50:33 +0300</pubDate>
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<item><title> भाभी के साथ ग्रुप में सेक्स किया- 2</title>
<description>टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी में भाभी ने चुदाई के लिए 5 लड़के बुलाये तो मेरी चूत भी लंड मांगने लगी2 लड़के मेरे पास आयेमैंने अपनी चूत में एक साथ 2 लंड कैसे घुसवाये? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फ्रेंड्स मैं शनाया राजपूत उर्फ सन्नो एक बार वापस आपके सामने अपनी चुत की ग्रुप में चुदाई वाली सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूँ&lt;br /&gt; कहानी के पहले भाग &lt;br /&gt; भाभी ने 5 लड़के बुलाये चुदाई के लिए &lt;br /&gt; में अभी तक आपने पढ़ लिया था कि भाभी ने अपनी चुत की आग बुझाने के लिए पांच मुस्टंडे लड़कों को बुलाया था&lt;br /&gt; उसकी चुदाई देख कर मैं गर्म हो गई और मैं भी चुत चुदाई के खेल में शामिल हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक लड़का किसी काम से चला गया था तो अब चार ही लौंडे चुदाई में लगे थे&lt;br /&gt; उस वक्त मुझे बड़े लंड वाला लड़का संजू चोद रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब आगे टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी: &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अचानक से संजू ने मुझे अपनी गोदी में उठाया और मेरी चुत में लंड फंसा कर मुझे किसी बन्दरिया के जैसे लटका लिया था&lt;br /&gt; मैं भी गिरने के डर से उससे लिपट गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका पूरा लंड मेरी चुत में घुस गया था तो वह आराम से लंड चूत में पेलने लगा था&lt;br /&gt; मैं उसके सीने से अपने दूध चिपकाए हुए उससे चिपकी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा एक हाथ उसके गले के पीछे आ गया और मैंने उसे पकड़ लिया था&lt;br /&gt; मेरा दूसरा हाथ उसके बालों पर था&lt;br /&gt; मैं ‘आआह आआह करके चुद रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह मुझे किस करने लगा और बोला- मजा आ रहा है न बेबी! &lt;br /&gt; मैं कुछ नहीं बोली बस उसके लंड वाले झूले पर अपनी चुत फंसाए झूलने का मजा ले रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी को वे दोनों पकड़े हुए थे और भाभी उन सबका शिकार बनी पड़ी थी&lt;br /&gt; उसकी चुत गांड दोनों छेदों में लंड चलने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसे दोनों तरफ से चुदती देख कर मेरी गांड में भी कुलबुली होने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में एक लड़का संजू के करीब आया और वह संजू से इशारा पाकर मेरे पीछे खड़ा हो गया&lt;br /&gt; वह मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा और संजू से बातें करते हुए मेरी गांड के छेद में उंगली देने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं कुछ नहीं बोली तो वह समझ गया कि सन्नो सैंडविच चुदाई करवाने के लिए राजी है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बस देखते ही देखते वह मेरी गांड में थूक लगा कर उसे ढीली करने में लग गया&lt;br /&gt; मैं छटपटा कर यह जता रही थी कि गांड में उंगली न करो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने संजू से कहा भी कि इसको मना करो! &lt;br /&gt; संजू चुप रहा और वह मुझे किसिंग करने में लगा रहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में पीछे से उस लड़के ने अपने लंड को थूक लगा कर मेरी गांड के छेद पर रख दिया&lt;br /&gt; उसके मोटे लंड का अहसास पाकर मैं एकदम से सहम गई और मैंने अपनी मुट्ठी बांध लीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी समय संजू ने मुझे अपनी तरफ किया और मेरी गांड के छेद में एक झटके में दूसरा लंड अन्दर घुसने की कोशिश करने लगा&lt;br /&gt; मैं चिल्ला पड़ी&lt;br /&gt; उसके मोटे लंड ने मेरी गांड के मुँह में अपना मुँह घुसा दिया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी दूसरा झटका लगा और पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर चला गया&lt;br /&gt; अब मेरे प्राण निकलने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू मुझे सम्भालते हुए पीछे वाले को रोकने लगा जबकि संजू ने खुद धक्के देने चालू रखे&lt;br /&gt; अब पीछे लंड घुसा था तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरी जान निकली जा रही हो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू चुत में लंड चलाने में लगा हुआ था&lt;br /&gt; फिर वह पीछे वाला लड़का भी आराम आराम से अपने लंड को मेरी गांड में चलाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे दोनों के मोटे लंड का बहुत ज्यादा अहसाह हो रहा था&lt;br /&gt; उधर भाभी को दो लड़के मेरी ही तरह पेल रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी बेड पर एक लड़के के ऊपर लेटी थी जो उसकी चूत को चोद रहा था और दूसरा भाभी के ऊपर लेट कर उसकी गांड को पेल रहा था&lt;br /&gt; ऐसे ही यह समूह में चुदाई का कार्यक्रम करीब दस मिनट तक चलता रहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मेरे पीछे वाला लड़का जिसका नाम अर्पित था … वह संजू से बोला- इसको मुझे दे दो&lt;br /&gt; संजू ने मेरी चुत से लंड निकाला और अर्पित मुझे अपने लंड पर लेकर बाजू वाले रूम में ले जाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू ने आगे बढ़ कर मुझे किस किया और कहा- अभी मैं तुझे और बजाऊंगा! &lt;br /&gt; मैं हंस दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू मुझसे अलग होकर भाभी के पास आ गया और उनके मुँह में लंड देकर चुसवाने लगा&lt;br /&gt; दो लड़के भाभी को पेल रहे थे उनका नाम शिबू और मेंडी था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस समय भाभी तीन लड़कों के लंड संभाल रही थी&lt;br /&gt; अर्पित मुझे कमरे में ले गया और उधर उसने मुझे लंड चूसने को दे दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों 69 में आ गए थे और मजा लेने लगे थे&lt;br /&gt; कुछ ही समय बाद अर्पित ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से पेलने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अर्पित बहुत लंबे कद वाला युवा थाउसके बड़े बड़े हाथ और बहुत ताकतवर हाथ थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने पीछे से ही झुक कर आगे को मुँह करके मेरे एक दूध को अपने मुँह में भर कर आधे से ज्यादा दूध खींच लिया था और गचागच खा लेने जैसी हरकत करता हुआ मेरे दूध की मां बहन एक करने में लग गया था&lt;br /&gt; उस वक्त मैं घोड़ी बनकर उसके लंड का इन्तज़ार कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद उसने मुझे कुतिया समझ कर चोदना चालू कर दिया था&lt;br /&gt; मेरी मादक आहें निकलने लगी थीं सच में अर्पित से चुदवा कर मुझे बेहद मजा आ रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद अर्पित मेरे ऊपर से उतर कर बेड के नीचे खड़ा हो गया&lt;br /&gt; उसने वापस चूत में लंड डाला और तेज तेज झटके देने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस स्थिति में उसका पूरा लंड मेरी चुत की जड़ तक जा रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसके मोटे लवड़े को अपनी बच्चेदानी में साफ साफ घुसता निकलता महसूस कर रही थी और मीठे दर्द से आय आआह कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अर्पित की स्पीड इतनी ज्यादा हो गई थी कि वह मुझे पूरी ताकत से से झटके देने लगा था&lt;br /&gt; उसकी जांघों की थाप मेरी गांड पर पड़ रही थी … जिसकी आवाज दूसरे कमरे तक जाने लगी थी&lt;br /&gt; मैं और मेरे दोनों दूध बहुत तेज तेज हिल रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मेंडी आया और बोला- अबे साले क्या पूरा मुहल्ला बुलाएगा … इतनी तेज तेज आवाजें निकलवा रहा है इसकी … पूरी चुत खा जाएगा क्या … चल हट अब थोड़ी देर मुझे भी लेने दे इसकी! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेंडी की बात सुनकर ही मुझे पता चल था कि उसके कमरे तक चुदाई की आवाज सुनाई दे रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अर्पित ने कहा- अभी मुझे चोद लेने दे यार साली की चुत बड़ा मजा दे रही है! &lt;br /&gt; मेंडी ने कहा- ओ भाई मुझे चोद लेने दे यारहट जा वर्ना तेरा लंड काट दूंगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे दोनों लड़ने ही वाले थे कि तभी मेरे मुँह से निकल गया- दोनों एक साथ आ जाओ न! &lt;br /&gt; मेरी बात सुनकर उन दोनों में तय हो गया कि वापस सैंडविच चुदाई करते हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब अर्पित ने मुझे अपने ऊपर लिटाया और उसने अपने खड़े लंड को मेरी चूत में पेल दिया&lt;br /&gt; मेंडी पीछे से आ गया और वह भी मेरी चूत में ही लंड पेलने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जबकि मैं सोच रही थी कि ये मेरी गांड में लंड डालेगा लेकिन वह तो भोसड़ी वाला मेरी चूत में दो लंड डाल कर चुदाई करने की सोच रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोनों के लंड मोटे थे तो एक साथ मेरी चुत में जाने का नाम नहीं ले रहे थे&lt;br /&gt; सिर्फ अर्पित का लंड ही अन्दर था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर अर्पित ने अपने लंड को चूत में ऊपर की तरफ किया तभी मेंडी ने नीचे की तरफ से लंड डालने का प्रयास किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी चुत फटने लगी और दर्द होने लगा&lt;br /&gt; मैं चीखने की स्थिति में नहीं थी क्योंकि अर्पित ने मेरा मुँह अपने मुँह से बंद किया हुआ था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी अर्पित ने झटके देना शुरू कर दिए और उसी के साथ मेंडी भी अपने लंड को मेरी चूत में ठेल कर घुसेड़ने की जगह बनाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं दर्द से अन्दर ही अन्दर कराह रही थी ‘आआह अर्पित आआह बस करो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तब तक मेंडी ने कुछ ही झटकों में अपना पूरा लंड डाल मेरी चुत में पेल ही दिया&lt;br /&gt; अब मुझे सहन नहीं हो रहा था और मेरे बर्दाश्त की हद पर हो गई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं रो रो कर अर्पित और मेंडी दोनों से ‘रुक जाओ रुक जाओ प्लीज अर्पित मेंडी की गुहार लगा रही थी&lt;br /&gt; मगर वे दोनों मेरी चुत का भोसड़ा बनाने में लगे हुए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस वक्त मेरी चूत दो धांसू लंडों के बीच में फंसी हुई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; करीब 5 मिनट तक उन दोनों ने मेरी पिलाई की और मैं बस हांफती रही&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर कुछ देर के लिए वे दोनों ऐसे ही रुक गए&lt;br /&gt; जब शांति छाई तो दूसरे रूम से भाभी के रोने ओर चिल्लाने की आवाज आ रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं समझ गई कि उधर भी ‘चूत का भोसड़ा बनाओ अभियान चल रहा है&lt;br /&gt; कोई दस मिनट तक हम तीनों कुत्ता कुतिया जैसे लगे रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर अर्पित के इशारे पर मेंडी ने मुझे पेलना चालू कर दिया&lt;br /&gt; अब उनके लौड़ों की रगड़ से मुझे मजा आने लगा था और मैं मस्ती से आआह आआह करने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर कुछ समय बाद उन दोनों ने एक साथ लंड पेलना चालू कर दिया&lt;br /&gt; मैं बस मीठी रगड़ को आत्मसात करती हुई आआह आह ईई कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आज मैं अपने जीवन में पहली बार अपनी चुत में एक साथ दो लंड से चुदाई करवा रही थी&lt;br /&gt; तभी भाभी ने आवाज लगाई तो अर्पित उन सब लोगों को इसी कमरे में आने की कह दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी अन्दर आई तो देख कर हैरान रह गई कि मेरी चुत में दो लंड घुसे हुए हैं&lt;br /&gt; टू डिक्स फॉर वन पुसी देख कर भाभी ने अर्पित से कहा- लो उधर मैं आगे पीछे के छेदों में एक साथ लेने से टूट गई थी लेकिन इधर तो मेरी ननद मुझसे एक कदम आगे निकल आई हैये तो दो लंड से चुत चुदवाने के मजे ले रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं हंस दी&lt;br /&gt; मैंने कहा- तो तुम भी ले लो ये मजा … है हिम्मत? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सुनकर भाभी को वापस जोश आ गया और जमीन पर गद्दा बिछा कर भाभी लेट गई&lt;br /&gt; अब अर्पित मेरी चुत से लंड निकाल कर भाभी को चोदने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इधर उसकी जगह शिबू आ गया और अब वह मुझे पेलने में लग गया&lt;br /&gt; मैं शिबू का लंड सहने में लगी थी कि तभी संजू ने अपना भीमकाय लंड मेरे मुँह में दे दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू- ले मेरी सन्नो रानी चूस बेटा इसको! &lt;br /&gt; उधर मेंडी भी मेरी चुत से लंड निकाल कर भाभी को चुसवाने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने तभी अचानक से भाभी के मुँह में अपने झटके तेज कर दिए और भाभी का मुँह वीर्य से भर दिया&lt;br /&gt; इधर शिबू और संजू मुझे जकड़ कर पेल रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं संजू के लंड से तड़पने लगी थी और अपने हाथ पटकने लगी थी&lt;br /&gt; उधर शिबू जोर जोर से मेरी चुत चोदने में लगा थातभी वह झड़ने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी पल संजू ने कहा- जल्दी बता कुतिया किधर डालूं अपना पानी! &lt;br /&gt; ‘संजू मेरे मुँह में ही डाल दे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू के लंड से पिचकारियां निकल कर मुझे वीर्य स्नान करवाने लगी थीं&lt;br /&gt; शिबू ने झड़ कर अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू ने अपना झड़ा लंड जो अब भी कड़क था उसे मेरी चूत में डाल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी के मुँह को मेंडी ने अपने वीर्य से भर दिया था लेकिन तब भी उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; संजू का लंड मेरी चुत की गर्मी पाकर वापस अकड़ गया और वह पूरी ताकत से मेरी चुत को पेलने लगा था&lt;br /&gt; शिबू ने मेरे मुँह से लंड को बाहर निकाला तो मैं उसे दिखाती हुई उसके लंड से निकला बचा खुचा वीर्य गुटक गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर अर्पित भाभी को रुलाए जा रहा था इधर संजू मुझे … &lt;br /&gt; वे दोनों करीब 20 मिनट तेजी से हम दोनों ननद भौजाई को चोदने में लगे रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं तो संजू की धुआंधार चुदाई से कंप गई थी और गद्दा जकड़ कर लेटी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यदि कुछ देर पहले मेरी चुत में मेंडी और अर्पित के लंड एक साथ न घुसे होते तो संजू का लंड मेरी चुत के चिथड़े उड़ा देता&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम दोनों लड़कियों की चुत में घुसे लंड झड़ने को हो गए थे&lt;br /&gt; उन दोनों ने लंड निकाल कर हम दोनों के मुँह में अपने अपने लंड डाल दिए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनके लंड से निकले वीर्य को हम दोनों पी गईं और अब सब लोग लेट गए&lt;br /&gt; थकान ज्यादा हो गई थी तो सब सो गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो यह सिलसिला अगले दो दिन तक यूं ही चलता रहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी ने तो ग्रुप सेक्स के मजे लिए ही और अपने साथ मुझे भी 4 लंड से चुदवा कर जन्नत की सैर कराई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हालांकि इस खेल में दर्द बहुत झेलना पड़ा लेकिन दर्द भी एक स्वाद बन जाता है जो चुदाई में मजा दिलाता है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी भाभी तो इस खेल में सबका वीर्य अपनी चूत को पिलाती रही&lt;br /&gt; लेकिन मैंने अपनी सावधानी बरती&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद भैया घर आ गए और उनके आने के दो दिन बाद मैं वापिस अपने जॉब पर आने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; भाभी ने मुझे बड़े प्यार से विदा किया&lt;br /&gt; संजू घर के बाहर मिल गया था वह मुझे स्लीपर बस तक छोड़ने भी आया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं समझी कि वह मुझे छोड़ कर चला जाएगा&lt;br /&gt; लेकिन बाद में पता चला कि वह रात का सफर मेरे साथ ही करने वाला है&lt;br /&gt; मैं खुश हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं पूरे रास्ते उसका लंड अपनी चूत में ही लिए रही&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस सफर में संजू ने 4 बार मुझे अपना वीर्य पिलाया&lt;br /&gt; रात का सफर बहुत सुहाना रहा&lt;br /&gt; संजू और मैं दिन भर सोते रहे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उसे एक रात अपने साथ रुका कर वापिस घर भेज दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो आपको मेरी टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी कैसी लगी? &lt;br /&gt; प्लीज कमेंट्स व मेल करें&lt;br /&gt; मैं अपनी अगली सेक्स स्टोरी में आपसे कभी पुनः मिलूँगी&lt;br /&gt;</description>
<link>https://mixrt.com/t2714</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:49:51 +0300</pubDate>
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<item><title>कॉलेज लाइफ में लड़की के साथ पहला अनुभव</title>
<description>वर्जिन गर्ल सेक्स स्टोरी में मैं बहुत सीधा सादा लड़का थालेकिन दोस्तों की चुदाई सुन सुन कर मैं भी बना बड़ा ही चोदू लाल मैंने अपनी दोस्त लड़की को चोद डाला&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं मोहित आप सभी साथियों का ‘फ्री सेक्स कहानी डॉट कॉम पर स्वागत करता हूँ। &lt;br /&gt; मैं इस साइट का निरंतर पाठक हूँ और आप सबकी कहानियाँ पढ़कर ही मुझे अपनी कहानी भेजने की इच्छा हुई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं आपका ज़्यादा समय न लेते हुए सीधा वर्जिन गर्ल सेक्स स्टोरी पर आता हूँ और अपने बारे में जानकारी देता हूँ। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी उम्र 20 साल है और मैं देखने में सुंदर हूँ। &lt;br /&gt; मेरी हाइट 5 फुट 8 इंच है और मेरे लिंग का साइज 7 इंच है जो कि किसी भी महिला का पानी निकालने के लिए काफी है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं जिस दोस्त की वर्जिन गर्ल सेक्स स्टोरी बता रहा हूँ वह मेरी क्लासमेट है और एक अच्छी दोस्त भी है जो पढ़ाई में भी मेरी काफी मदद करती है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका नाम फ़िरदौस है। &lt;br /&gt; उसका फिगर सामान्य है; चूचे ज्यादा मोटे भी नहीं हैं पर रंग साफ है शरीर कुछ मोटा है और हाइट 5 फुट के आस-पास है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं अपनी पढ़ाई के समय बहुत ही सीधा-साधा लड़का था। &lt;br /&gt; मैं किसी भी लड़की के बारे में कुछ भी उल्टा-पुल्टा नहीं सोचता था और बस पढ़ाई पर ही फोकस करता था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस समय भी क्लास की कुछ लड़कियां मुझसे फ्लर्ट किया करती थीं लेकिन मैं इस बात को बार-बार इग्नोर कर दिया करता था क्योंकि मुझे इन सब चीजों में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी करके मैंने अपने शहर के ही एक बड़े कॉलेज में B.Scमें एडमिशन लिया और पढ़ाई करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; पहला साल तो ऐसे ही बीत गया। &lt;br /&gt; अगले साल में मैं अपने क्लास के लड़कों और लड़कियों से पहले से ज्यादा खुल चुका था। &lt;br /&gt; मेरे दो पक्के दोस्त बन गए थे जो मुझसे अपनी सारी बातें शेयर करते थे जिनमें लड़कियों के बारे में भी बातें हुआ करती थीं। &lt;br /&gt; दोस्तों के नाम अंकित और विशाल हैं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो दोनों और मैं SSC की भी कोचिंग किया करते थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसी बीच उन दोनों ने अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड बना रखी थी। &lt;br /&gt; मैं खाली हाथ था और वो दोनों साले चूत का भी मज़ा ले चुके थे! इस कारण मेरे अंदर भी चूत की चुदाई करने की इच्छा जागने लगी और मैं भी इसी सोच में रहने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी मुझे लगा कि क्यों न अपनी दोस्त फ़िरदौस को ही पटाया जाए। &lt;br /&gt; उस दिन के बाद से मेरा फ़िरदौस को देखने का नजरिया बदल गया और मैं उसे कामुक नजर से देखने लगा था और अवसर की तलाश में रहने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; क्लास में पढ़ाई के बाद खाली समय में मैं किसी न किसी बहाने से उसको छूने का प्रयास किया करता था। &lt;br /&gt; शायद वह भी इसके बारे में समझ चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन मेरे दोस्त कॉलेज नहीं आए और हम बोर हो रहे थे। &lt;br /&gt; तो मैंने फ़िरदौस से कहा कि क्यों न फिल्म देखने चलें। &lt;br /&gt; वो पहले ना-ना करने लगी फिर मान गई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वो अपनी सहेली मीनाक्षी को भी साथ लेकर आई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बाइक से हॉल में गया मैंने टिकट लिए और फिर वो भी आ गई थीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम हॉल के अंदर गए और बालकनी के सबसे पीछे वाली सीट पर बैठ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर के बाद फिल्म शुरू हो गई और हम फिल्म देखने लगे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद मीनाक्षी वॉशरूम चली गई। &lt;br /&gt; मौका देखकर मैंने अपना एक हाथ फ़िरदौस की जांघ पर रख दिया और उसने भी मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया था। &lt;br /&gt; वह थोड़ी सी गर्म हो चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फ़िरदौस का एक स्तन दबा दिया तो उसने इसका कोई विरोध नहीं किया। &lt;br /&gt; फिर मैंने दूसरा भी दबा दिया! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इसके बाद मैंने उसको किस किया और उसने भी मेरा पूरा साथ दिया। &lt;br /&gt; मैं अपना हाथ उसकी जांघों पर फेरने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब मीनाक्षी वापस आई तो हम सही से बैठ गए। &lt;br /&gt; फिल्म के बाद हम वापस आ गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले दिन सुबह जब मैं उससे मिला तो उसने कहा कल मज़ा आया कि नहीं! &lt;br /&gt; मैंने कहा मज़ा अधूरा रह गया! &lt;br /&gt; तो उसने कहा तो आज पूरा कर लो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने ये सब बातें अपने दोस्त को बताईं तो उसने मेरे लिए एक कमरे का जुगाड़ किया। &lt;br /&gt; मैंने उस दिन क्लास न लेकर अपने दोस्त के साथ जाकर कॉन्डम खरीदा और कुछ दवाएं भी लीं। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं फ़िरदौस को साथ लेकर कमरे पर आ गया। &lt;br /&gt; मैंने तुरंत गेट बंद किया और फ़िरदौस पर टूट पड़ा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसे किस करने लगा और वह भी मस्त होकर किस कर रही थी। &lt;br /&gt; मैंने उसके कपड़े उतार दिए और अपने भी कपड़े उतार दिए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह केवल पैंटी और ब्रा में थी। &lt;br /&gt; मैं उसके चूचे दबा रहा था और उसको छूने से बहुत मज़ा आ रहा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपना लिंग बाहर निकाला और कहा इसे मुँह में लो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; परंतु उसने मना कर दिया तो मैंने भी कोई जोर नहीं लगाया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; किस करने के बाद मैंने हाथ से हिलाकर लिंग को उसकी चूत पर सेट किया और बाहर ही ऊपर-नीचे करने लगा। &lt;br /&gt; वह पानी छोड़ चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसकी योनि को चाटा और फिर से लिंग को योनि के ऊपर रगड़ने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं लिंग को पकड़कर योनि के अंदर घुसाने लगा था। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ा सा ही लिंग अंदर गया तो फ़िरदौस छटपटाने लगी। &lt;br /&gt; फिर मैं कुछ देर रुका। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब वह शांत हो गई तो मैंने अंदर और घुसा दिया और वह चिल्लाई आई माँ! आई माँ! &lt;br /&gt; मैं कुछ देर रुका रहा फिर लिंग को अंदर-बाहर करने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब फ़िरदौस को कुछ मज़ा सा आने लगा तो मैंने एक झटका लगाया! &lt;br /&gt; पूरा लिंग अंदर जा चुका था और उसकी आँखों से आँसू आने लग गए थे। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर भी उसके मन में एक संतुष्टि थी जो साफ लग रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं लिंग को योनि में आगे-पीछे कर रहा था और वह एक बार फिर से झड़ चुकी थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपनी पोजीशन बदली; अब तक मैं उसके ऊपर था और अब वह मेरे ऊपर थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम मज़ेदार सेक्स कर रहे थे। &lt;br /&gt; इसके बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने पीछे से लिंग को योनि में प्रवेश किया और धक्के लगाने लगा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जब मेरा होने लगा तो मैंने धक्कों की रफ्तार को बढ़ा दिया और कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया! &lt;br /&gt; मैं ऐसे ही कुछ देर तक उसके ऊपर पड़ा रहा। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने कॉन्डम को निकाला उसे एक थैली में रखा और वॉशरूम में जाकर नहाकर बाहर आ गया। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर फ़िरदौस गई और नहाकर बाहर निकल आई। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने देखा कि उसको चलने में दर्द हो रहा है&lt;br /&gt; तो मैंने उसको दवाएं दीं और हम बातें करने लग गए। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं बोला यह मेरा पहला सेक्स अनुभव है! &lt;br /&gt; वह भी बोली मेरा भी पहला ही है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा पहले सेक्स में तो खू.न भी आता है पर आया तो नहीं! &lt;br /&gt; वह बोली मैं उँगली का इस्तेमाल करना जानती हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो मैं हँस पड़ा और बोला एक राउंड और हो जाए! &lt;br /&gt; तब वह फिर से तैयार हो गई थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने दूसरा कॉन्डम लगा लिया और उसकी योनि को सहलाने लगा। &lt;br /&gt; तभी वह बोली अब कब तक चाटोगे जल्दी-जल्दी चोद दो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बात पर मैंने लिंग को सहलाया और योनि में अंदर डाल दिया। &lt;br /&gt; हम पूरे मज़े से सेक्स कर रहे थे और वह भी मस्त होकर मेरा साथ दे रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह मुँह से कामुक आवाजें निकाल रही थी। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा क्यों न एक राउंड और हो जाए! &lt;br /&gt; वह बोली अब नहीं फिर कभी करेंगे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो कैसी लगी आपको मेरी वर्जिन गर्ल सेक्स स्टोरी जो कि बिल्कुल सच्ची है&lt;br /&gt; कमेंट्स करके बताएं&lt;br /&gt; अगली कहानी भी मैं जल्दी ही लिखूँगा कि मैंने आगे कैसे सेक्स किया है।</description>
<link>https://mixrt.com/t2713</link>
<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:46:57 +0300</pubDate>
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<item><title>सगी चाची की चुत चुदाई का मजा लिया</title>
<description>  &lt;br /&gt; सेक्सी चाची चुदाई कहानी में मैं बहुत चोदू हूँमैंने गाँव की कई लड़कियां और आंटियां चोदी हैंलेकिन इस कहानी में मैंने अपनी जवान चाची को कैसे चोदा यह बताया है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फ्रेंड्स मेरा नाम अय्यूब है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से हूँ&lt;br /&gt; मेरी उम्र अभी 20 साल है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह मेरी पहली सेक्स कहानी है और इस सेक्सी चाची चुदाई कहानी में मेरी और मेरी चाची के बीच हुई चुदाई को लिखा गया है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सच्ची घटना आज से 2 साल पहले की है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी चाची की उम्र 40 साल है&lt;br /&gt; उनका नाम साबिया हैये बदला हुआ नाम है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे थोड़ी सांवली सी हैं लेकिन उनकी देहयष्टि बहुत ज़बरदस्त है&lt;br /&gt; उनका फिगर साइज़ 38-32-40 का है&lt;br /&gt; अगर कोई एक बार देख ले तो उनको सोचकर उनका नाम लेकर मुठ मारे बिना नहीं रह सकता&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनके 4 बच्चे हैंदो लड़के और दो लड़कियां&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनका सबसे बड़ा लड़का 19 साल का फिर 18 साल की लड़की उसके बाद लड़की है और सबसे छोटा वाला लड़का है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं और मेरी चाची का लड़का हम दोनों ज़्यादातर साथ ही रहते थेस्कूल में भी दोनों साथ जाते थे&lt;br /&gt; मैं 12 वीं क्लास में था और वह 11 वीं में थाहम दोनों साथ में ही पढ़ने जाते थे और खेलने भी साथ में ही जाते थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह क्रिकेट मुझसे अच्छा खेलता था और सिर्फ बैटिंग करता था&lt;br /&gt; जबकि मैं बैटिंग-बॉलिंग दोनों करता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं लड़कियों को पटाने में एक्सपर्ट था&lt;br /&gt; मेरी 2 गर्लफ्रेंड थीं जबकि उसकी एक भी लड़की गर्लफ्रेंड नहीं थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने मुझसे कहा कि यार भाई एकाध से मेरी भी सैटिंग करवा दो&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने हामी भर दी और उसके मतलब की लौंडिया देखने लगा&lt;br /&gt; इस बीच मैंने अपने गांव की एक आंटी सैट कर ली और उनके साथ खूब मजा लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन आंटी की चुदाई कहानी को मैं फिर कभी लिखूँगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब हम दोनों साथ तो रहते ही थे&lt;br /&gt; जब भी मैं उसे किसी लड़की को दिखा कर कहता कि इससे बात कर तो वह मना कर देता था क्योंकि वह इन सब चीज़ों से बहुत डरता था&lt;br /&gt; उसे लगता था कि कहीं कूट न दिया जाए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तब मैंने जो आंटी पटा रखी थी उसके ऊपर अपने दोस्त को चढ़ाने की सोची&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी नियत से मैं उस आंटी के घर गया था कि तभी मैंने उनके घर उनकी भतीजी को देखा वह उनके पास रहने आई थी&lt;br /&gt; उसे देखते ही मेरा लंड उसकी चूत मांगने लगा था&lt;br /&gt; पर मुझे डर था कि अगर आंटी को पता चला कि मैं उनकी भतीजी को छोड़ना कहता हूँ तो वे मुझे ही चूत देना मना ना कर दें&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो मैंने आंटी से बोला कि आपकी भतीजी तो बहुत हॉट है इससे मेरे भाई की सैटिंग करवा दो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे हंस दीं और उन्होंने अपनी भतीजी की सैटिंग मेरे भाई से करा दी&lt;br /&gt; फिर तो ऐसा खेल हुआ कि हम दोनों भाई एक साथ उनके घर जाकर एक ही बेड पर अलग-अलग कंबल में मजा लेने घुसने लगे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस दिन भी हम दोनों ने अपनी अपनी चुत बजाई और वापस घर आ गए&lt;br /&gt; कुछ दिन बाद आंटी की भतीजी चली गई और मेरे भाई के लंड के लिए चुत की जुगाड़ खत्म हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद मेरे भाई का इंटर हो गया और वह काम करने मुंबई चला गया&lt;br /&gt; अब मैं अकेला हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब उसकी अम्मी यानि मेरी चाची को कोई भी काम होता था या बाहर से कुछ भी मँगाना होता था तो वे मुझे ही बुलाती थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी चाची घर में ज़्यादातर सूट-सलवार पहनती थीं&lt;br /&gt; एक दिन जब उन्होंने मुझे बुलाया तो वे झाड़ू लगा रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस वक्त उन्होंने दुपट्टा नहीं ओढ़ रखा था तो उनके गहरे गले से उनके दूध आधे से ज्यादा बाहर को निकलने को आतुर दिख रहे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनके बूब्स देखे और मेरे मन में उन्हें चोदने की इच्छा होने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनसे पूछा- आपने बुलाया था? &lt;br /&gt; वे हां बोल कर मुझे कुछ सामान लाने के लिए कहने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनको सामान लाकर दे दिया&lt;br /&gt; फिर अपने घर जाकर उनके नाम की मुठ मारने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आंटी के रसभरे मम्मों को सोच-सोच कर मेरा दिमाग खराब हो रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे रोजाना ही मुझे किसी न किसी काम के लिए बुला लेती थीं&lt;br /&gt; मैं अब हर रोज़ उनके नाम की मुठ मारने लगा और अपनी सैटिंग वाली आंटी की चुदाई कर लेता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन चाची का कॉल आया&lt;br /&gt; उन्हें मार्केट जाना था घर का सामान लाना था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उन्हें अपनी बाइक पर लेकर गया&lt;br /&gt; उस वक्त वे मुझसे एकदम चिपक कर बैठी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनके चिपकने से मेरा लंड पैंट में खड़ा होने लगा&lt;br /&gt; जब वे बाजार में सामान खरीद रही थीं तब मैं उनके बूब्स को ही घूर रहा था&lt;br /&gt; यह बात शायद उन्होंने नोट कर ली थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर हम दोनों सामान खरीद कर घर आ गए&lt;br /&gt; मैं अपना घर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके 4 दिन बाद चाची को अचानक अपने मायके जाना पड़ा&lt;br /&gt; दरअसल उन्हें कॉल आया था कि उनकी अम्मी की तबीयत खराब है तो चाची एकदम अपने छोटे बेटे को लेकर अपने मायके चली गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब घर में दोनों बहनें ही रह गई थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर शाम को चाची का मेरे पास कॉल आया कि मैं उनके घर चला जाऊंदोनों बहनें अकेली हैं और वे शायद आज नहीं आ सकेंगी तो मैं वहीं सो जाऊं&lt;br /&gt; मैंने उनसे बोल दिया- आप अम्मी को बोल दो मैं सो जाऊंगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने अम्मी से बात की और अम्मी ने मुझे सोने के लिए बोल दिया&lt;br /&gt; फिर मैं चाची के घर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर मैंने अपनी बहन से बात की और मैं अपने मोबाइल में टाइम पास करने लगा&lt;br /&gt; मैं अपने दोस्तों और गर्लफ्रेंड से चैट करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर चाची की बड़ी लड़की ने मुझसे खाने के लिए कहा&lt;br /&gt; तो हम सब खाना खाकर सोने चले गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अपने-अपने बिस्तर पर आ गए और जब रात को सब सो गए तो मैं अपने फोन में पॉर्न मूवीज देखने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उस दिन मुझे एक गजब चुदाई की फिल्म हाथ लगी थी तो देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया&lt;br /&gt; मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के डेढ़ बजे का समय हो गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं जागता रहा&lt;br /&gt; और जब 2 बज गए और सब घर में नींद में थे तो मैंने चाची की लड़की फ़ौजिया को आवाज दी&lt;br /&gt; लेकिन वह कुछ नहीं बोली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फिर से उसे आवाज दी&lt;br /&gt; इस बार शायद उसकी नींद टूट गई थी लेकिन मुझे पता नहीं चला&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दरअसल उसने कोई जबाव नहीं दिया था&lt;br /&gt; मैंने सोचा कि वह गहरी नींद में सो रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ब्लू-फिल्म के जोश में लंड भन्नाया हुआ था तो मैं अपनी बहन के बिस्तर के पास आ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मोबाइल निकाल कर वीडियो ऑन कर ली और उसके पजामा को नीचे करके उसकी चूत को टच करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह सब चाची की लड़की ने शायद देख लिया था लेकिन वह कुछ नहीं बोली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने मोबाइल को एक जगह सैट किया और उसकी चुत को टटोलता हुआ लंड की मुठ मारने लगा&lt;br /&gt; वह चुपचाप मुझे मुठ मारता हुआ देखती रही मगर मैंने उसे देखता हुआ नहीं देखा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं मुठ मारकर जाकर मोबाइल उठा कर अपने बिस्तर पर आकर सो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अगले दिन मुझे चाची का कॉल आया और उन्होंने कहा- मैं घर आ गई हूँ तुमसे मुझे काम है … जरा आना! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं तुरंत उनके घर चला गया&lt;br /&gt; उस वक्त मेरी दोनों बहनें स्कूल गई हुई थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर जाकर देखा कि चाची बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उनकी आंखें बंद थीं&lt;br /&gt; शायद वे रात को सोई नहीं होंगी इसलिए उन्हें नींद आ गई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं अपनी चाची के बिस्तर के पास आ गया&lt;br /&gt; मैंने उन्हें हिलाया और आवाज दी&lt;br /&gt; लेकिन चाची बहुत गहरी नींद में सो रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने चाची को 2-4 आवाजें भी दीं और हल्का सा दो बार हिलाया भी लेकिन वे नहीं उठीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसी समय मैंने देखा चाची का कुर्ता आगे से उठा हुआ था&lt;br /&gt; सीन देख कर मेरे दिमाग में एक आइडिया आ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपना फोन निकालकर चाची के कुछ फोटो खींचे और उनके पजामे को हल्का सा हाथ से नीचे कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उनकी बिना पैंटी की चूत देखकर मेरा हाथ बहक गया और मैं चाची की चुत को टच करने लगा&lt;br /&gt; चाची बेसुध सोती रहीं या जानबूझ कर कुछ कर नहीं रही थीं मुझे नहीं पता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर तक चुत सहलाने के बाद मुझसे कंट्रोल ही नहीं हुआ&lt;br /&gt; मैंने दूसरे हाथ से मोबाइल को वीडियो मोड पर किया और उनकी चूत पर हाथ फेरता हुआ वीडियो बना लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इससे ज़्यादा कुछ करने की हिम्मत मैं नहीं कर पाया और लंड की मुठ मारकर वापस आ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं अब रोजाना अपनी बहन व चाची की चुत के उन दोनों वीडियो को बारी बारी से देखकर मुठ मारने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ ही दिन बाद हमारे गांव में चोरों का आतंक मचने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक दिन हमारे मुहल्ले में भी चोरी हो गई&lt;br /&gt; चाची को डर लगने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने अम्मी से कहा कि अय्यूब को हमारे घर सोने के लिए भेज दो बड़ा डर लग रहा है&lt;br /&gt; अम्मी ने मुझे चाची के घर भेज दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं रात को उनके घर सोने चला गया&lt;br /&gt; मैं सोच रहा था कि आज भी मुझे अपनी बहन की चूत टच करने को मिल जाएगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी चाची ने मेरा फोन मांगा और मैंने बिना कुछ सोचे उन्हें दे भी दिया&lt;br /&gt; मुझे बिल्कुल भी याद नहीं था कि उसमें चुदाई के वीडियो हैं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची ने मेरा फोन लेकर फोन का काम खत्म किया और उसके बाद मेरी गैलरी को चेक करने लगीं&lt;br /&gt; उसी में उन्हें अपनी लड़की वाला वीडियो दिख गया और उन्होंने उसे देखना शुरू कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसमें उन्होंने अपनी बेटी की नंगी चुत पर मुझे हाथ फेरते हुए देखा तो वे गुस्से में आ गईं&lt;br /&gt; चाची ने मुझे बुलाया और बोलीं- ये सब क्या है? तुझे शर्म नहीं आती? ये सब हरकत करता है … वह तेरी बहन है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मुझे धमकाने डाँटने लगीं&lt;br /&gt; मैं गर्दन नीचे करके उनकी गालियां सुनता रहा और सोचता रहा कि शायद चाची ने अपनी चुत वाली क्लिप नहीं देखी है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद उन्होंने खुद ही उस वीडियो को डिलीट कर दिया&lt;br /&gt; मुझे चेतावनी देते हुए कहा- आगे से यह सब नहीं होना चाहिए! &lt;br /&gt; मैंने उनसे कहा- हां चाची आगे से ऐसा कभी नहीं होगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने मुझे मेरा फोन वापस दे दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; बाद में वे बुदबुदाईं- साला मेरे मम्मे देखता है और फ़ौजिया की चुत पर नजर रखता है! &lt;br /&gt; मैंने सुन तो लिया था लेकिन कुछ बोला नहीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने अपना फोन निकाला और एक आइडिया लगाया&lt;br /&gt; मैंने अपने फोन में अपनी बहन की जो वीडियो बनाई थी उसकी एक कॉपी मैंने अलग जगह सेव की हुई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उन्हें दिखाई&lt;br /&gt; तो वे सन्न रह गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर बोलीं- तूने तो कहा था कि अब आगे से ये सब नहीं होगामैं तेरी अम्मी से शिकायत करूंगी! &lt;br /&gt; मैं कुछ नहीं बोला&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर चाची ने एक ऐसी बात बोली कि मेरा काम बन गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे बोलीं- तू एक बात क्लियर कर ले कि तुझे फ़ौजिया की चाहिए या मेरी? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनसे कहा- दोनों की … और अगर आपने किसी से कुछ भी कहा तो मैं ये वीडियो फेसबुक पर अपलोड कर दूंगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरी ये सब बातें सुनकर चाची डर गईं और बोलने लगीं- प्लीज ऐसा मत करना! हम बर्बाद हो जाएंगे! हमारे इज़्ज़त का तो ख्याल कर! तुझे मुझसे जो चाहिए … ले ले मगर ये सब मत कर! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तब मैंने सोचा क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए&lt;br /&gt; उस वक्त तो मैं अपने घर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शाम को चाची ने मुझे पुनः बुलाया और पूछा- तूने वीडियो में अपने हाथ से अपना सामान हिलाया था तो क्या तुझे अपनी बहन के साथ सेक्स करने का मन नहीं हुआ था? &lt;br /&gt; मैं चुप रहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे आगे बोलीं- या तूने अपनी बहन को खराब कर दिया है? &lt;br /&gt; मैंने कहा- नहीं चाची मैंने उसके साथ वह सब नहीं किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची मुझे घूरने लगीं और बोलीं- अब तुझे क्या चाहिए? &lt;br /&gt; मैंने उनसे कहा- मुझे फ़ौजिया चाहिए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे बोलीं- साफ साफ बोल क्या चाहिए? &lt;br /&gt; ‘मुझे फ़ौजिया की चूत चाहिए! &lt;br /&gt; मैंने खुल कर कह दिया और सोचा कि उस दिन तो मैं उसके साथ कुछ नहीं कर सका था तो क्या हुआ आज किस्मत मेरे साथ लग रही है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; आज तो चाची खुद मुझे उसकी चूत दिलाने की सोच रही हैं&lt;br /&gt; लेकिन ऐसा नहीं हुआ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची ने कहा- मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ? वह मेरी बेटी है और वह अभी छोटी हैवह ये सब नहीं कर सकती! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह कहते हुए चाची ने अपने कुर्ते से दुपट्टा नीचे सरका दिया और मेरी नज़र उनके बूब्स पर टिक गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने ये बात नोट कर ली थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फिर से कहा- दिलाओगी या मैं कुछ करूं? &lt;br /&gt; उन्होंने मुझसे जो कहा वह सुनकर मैं और भी हैरान रह गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने मुझसे कहा- मैं ऐसा नहीं कर सकतीअगर तुम चाहो तो फ़ौजिया के बदले तुम मेरी चूत ले लो लेकिन प्लीज मेरी बेटी को छोड़ दो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनसे कहा- ठीक है लेकिन मैं आपको खुश कर दूंगामगर आपको भी मेरा साथ देना होगा! &lt;br /&gt; वे मान गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने गेट बंद किया और उनके पास जाकर उनका हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींच लिया&lt;br /&gt; उनको लिप टू लिप किस करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे शुरू में मेरा साथ नहीं दे रही थीं तो मैंने उनसे कहा- अगर आप मेरे साथ नहीं दोगी तो मैं कैसे मजा ले पाऊंगा! &lt;br /&gt; वे अब धीरे-धीरे साथ देने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनको किस करता रहा और एक हाथ से उनका मोटी गांड को दबाने लगादूसरे हाथ से उनके बूब्स दबाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ मिनट किस के बाद वो धीरे-धीरे गर्म होने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने बूब्स से हाथ हटाकर उनकी चूत की तरफ बढ़ना शुरू किया&lt;br /&gt; सलवार के ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इससे वे और ज़्यादा गर्म हो गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उनकी सलवार के अन्दर हाथ डाल दिया&lt;br /&gt; उनकी चूत एकदम आग उगल रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनकी चूत को सहलाते हुए ही दूसरे हाथ से उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उन्होंने ब्लैक कलर की पैंटी पहनी हुई थी&lt;br /&gt; मैंने उनकी सलवार निकाल कर एक तरफ डाल दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद मैंने उनका कुर्ता भी निकाल दिया&lt;br /&gt; अब वे सिर्फ ब्लैक ब्रा और पैंटी में ही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनके बूब्स पर टूट पड़ा&lt;br /&gt; एक हाथ से ब्रा नीचे करके उनके बूब्स को पीने लगा और दूसरे हाथ से दबा भी रहा था&lt;br /&gt; वे भी अब मजा लेने लगीं और मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी निकाल दी&lt;br /&gt; अब वे मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनको घूरने लगा तो वे मुस्कुराने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनके बूब्स पर टूट पड़ा और इस बार उनके बूब्स के निप्पल पर ज़ोर से काट लिया&lt;br /&gt; वे एकदम से उछल गईं और मना करने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनके एक दूध को चूसते हुए उनकी चूत को सहलाने लगा&lt;br /&gt; मैंने चाची की चुत में अपनी एक उंगली को भी अन्दर डाल दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे और ज़्यादा मजा में आ गईं और मुँह से आवाज़ करने लगीं&lt;br /&gt; मेरा सर पकड़ कर अपनी छाती में दबाने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं उनसे अलग हुआ और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया&lt;br /&gt; वे मेरे खड़े लंड को देख रही थीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और उनको किस करने लगा&lt;br /&gt; वे मेरा लंड सहलाने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उनको बेड पर ले गया&lt;br /&gt; उनको लिटाकर उनके पैरों के बीच आ गया और उनकी चूत के पास बैठ कर चुत को सूंघने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो वे बोलीं- ये क्या कर रहा है? &lt;br /&gt; मैंने कहा- आप बस देखती रहो और मजा लो! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शायद उन्होंने पहले कभी चूत नहीं चटवाई थी इसलिए उनको थोड़ा अजीब लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उनकी चूत पर मुँह लगाकर उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे मुझे हटाने लगीं और काँप गईं&lt;br /&gt; वे बोलने लगीं- ये सब गंदी जगह है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनको लिटाया और बोला- आप बस लेटी रहो और लेटकर मजा लो! &lt;br /&gt; मैं उनकी चूत चाटने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद उन्हें भी मजा आने लगा तो वे मेरा सर पकड़-पकड़कर चूत पर दबाने लगीं और मुँह से आवाज़ करने लगीं&lt;br /&gt; ‘हम्म … आ आह्ह्ह और ज़ोर से … बड़ा मजा आ रहा है हम्म … ऐसे ही चूसता रह! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ मिनट में वे झड़ गईं और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया&lt;br /&gt; मैं उनका सारा पानी पी गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने उनसे अपना लंड चूसने के लिए बोला&lt;br /&gt; तो वे मना करने लगीं&lt;br /&gt; लेकिन मेरे ज़ोर देने पर वे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ ही देर में वे लंड को ऐसे चूस रही थीं जैसे आइसक्रीम चूस रही हों&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; थोड़ी देर में मैं उनके मुँह में झड़ गया&lt;br /&gt; उन्होंने मेरा सारा माल थूक दिया और उठकर कुल्ला करने चली गईं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर वे कुल्ला करके वापस आईं&lt;br /&gt; मैंने उनको बेड पर लिटा दिया और उन्हें फिर से किस करने लगा बूब्स दबाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ ही मिनट में मेरा लंड दोबारा तैयार हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उनको लिटाया और उनकी टांगों के बीच में जाकर लंड को उनकी चूत पर सटाया&lt;br /&gt; उनकी दोनों टांगें अपने दोनों कंधों पर रखीं और लंड को सैट करके ज़ोर का धक्का मारा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा 3 इंच लंड उनकी चूत में चला गयावे ज़ोर से चीख पड़ीं&lt;br /&gt; तभी मैंने उनको किस किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; शायद वे बहुत दिनों से नहीं चुदी थीं इसलिए उनकी चूत टाइट हो गई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा जिससे मेरा 7 इंच लंड पूरा उनकी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वे और ज़ोर से तड़प गईं और उन्होंने मेरे होंठ पर काट लिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर धीरे-धीरे वे नॉर्मल हो गईं और चुदाई का मजा लेने लगीं&lt;br /&gt; अपने मुँह से आवाज़ करने लगीं- और ज़ोर से अय्यूब … ज़ोर से फाड़ दो मेरी चूत … आज बहुत दिनों बाद चुद रही हूँ … आह ज़ोर से हम्म … ह्ह्ह्ह … &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मुझे भी उनकी बातें सुनकर जोश आ गया और मैंने उनकी ज़ोरदार चुदाई करना शुरू कर दिया&lt;br /&gt; उनके बूब्स दबाने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इस बीच वो झड़ गईं&lt;br /&gt; फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत से निकाल कर उन्हें घोड़ी बनाया और लंड को एक ही शॉट में पीछे से उनकी चूत में पेल दिया&lt;br /&gt; वे चीख पड़ीं और मुँह से आवाज़ करने लगीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर कुछ देर बाद वो और ज़ोर से ‘हम्म … यस फास्ट फास्ट करने लगीं&lt;br /&gt; मैंने उन्हें ज़ोर-ज़ोर से पेलना शुरू कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सेक्सी चाची चुदाई करके हम दोनों साथ में झड़ गए&lt;br /&gt; मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और उनके ऊपर गिर गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसा ही फिर मैं उठा चाची को किस किया और अपने कपड़े पहन लिए&lt;br /&gt; मैंने पैंट पहन कर चैन खुली रखी और अपना लंड चाची के मुँह में दे दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; चाची लंड चूसने का मजा लेने लगीं और मैंने उनका वीडियो बना लिया&lt;br /&gt; उनकी नंगी फोटो भी खींच लीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर मैं अपने घर आ गया&lt;br /&gt; अब चाची की चुत मेरे लिए खुल चुकी थी और जब चाहे मैं उन्हें चोद लेता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तो दोस्तो कैसी लगी मेरी सेक्सी चाची चुदाई कहानी? &lt;br /&gt; प्लीज कमेंट करके मुझे ज़रूर बताएं.</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:45:43 +0300</pubDate>
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<item><title>दोस्त की कुंवारी बहन की कुंवारी बुर का मजा</title>
<description>वर्जिन लड़की चुदाई स्टोरी में एक रात मैं अपने दोस्त के घर रुकाउसकी बहन का रिश्ता तय हो चुका थाफोन पर बात करते हुए उसका मंगेतर लड़की की सेक्सी पिक मांगने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्तो मेरा नाम आरव कुमार है और मैं रायपुर छतीसगढ़ के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दोस्त की बड़ी बहन की सगाई होने के उसको चोदा&lt;br /&gt; यह एक बहुत हॉट और सेक्सी रियल इंसिडेंट है जो मैं आज आपको बताने जा रहा हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह वर्जिन लड़की चुदाई स्टोरी तब की है जब मैं 12 वीं में था&lt;br /&gt; मेरा एक पक्का दोस्त था उसका नाम फैज़ल था&lt;br /&gt; उससे मेरी दोस्ती बहुत गहरी थी &lt;br /&gt; मैं उसके घर में आता जाता रहता था और उसके अम्मी अब्बा भी मुझे बहुत पसंद करते थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसकी एक बड़ी बहन थी सना खान वह 21 साल की थी और उसे मैं दीदी बुलाता था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना … आह गजब की माल! &lt;br /&gt; उसका फिगर 34-28-36 का और दिखने में एकदम परी जैसी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एकदम नूरानी चेहरा सेक्सी माल जैसी लौंडिया थी वह … उसका गोरा रंग लंबा फेसकट तने हुए दूध उठी हुई गांड देख कर किसका लंड खड़ा न होगा … उफ्फ साली कयामत थी! &lt;br /&gt; अब सीधा स्टोरी पे आता हूँ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सन 2015 में सना की सगाई हो गई और उसकी सगाई हुए 2 महीने हो गए थे&lt;br /&gt; एक दिन मैं उसी के घर रुक गया क्योंकि उसके अब्बा रायपुर के एक बड़े अस्पताल में एडमिट थे&lt;br /&gt; उसी कारण से अम्मी को भी उनकी देखभाल के लिए अस्पताल में ही रहना पड़ा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फैज़ल की अम्मी मुझसे कह कर गई थीं कि तुम घर ही रुक जाना&lt;br /&gt; मैंने हामी भर दी और अपने घर पर कह कर कि मैं रात को फैज़ल के घर ही सोऊंगा उसके घर आ गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम लोगों ने खाना खाया डिनर किया फिर टीवी देखने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में सना दीदी के पास उसके होने वाले पति यानि हमारे जीजू का कॉल आया&lt;br /&gt; तब रात के 10 बजे थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना- तुम लोग टीवी देखो मैं आती हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने चुटकी ली- अरे कहां चलीं दीदी? जीजू का कॉल है क्या? &lt;br /&gt; फैज़ल- उसी का होगा और कौन करेगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना भागती हुई अन्दर चली गई&lt;br /&gt; अन्दर के कमरे में वह जीजू से सेक्स टॉक कर रही थी और फुल मस्ती में! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ‘इस पोज में चुदाई करेंगे या इस पोज में … उनके बीच कुछ इसी मुद्दे पर बात हो रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर जीजू ने सना से उसकी फ़ोटो मांगी&lt;br /&gt; उसने भेजी&lt;br /&gt; पर वह फ़ोटो जीजू को पसंद नहीं आई&lt;br /&gt; वह शायद नंगी फ़ोटो चाह रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना दीदी ने मुझे इशारा करके पास बुलाया&lt;br /&gt; मैंने फैज़ल को बोला- मैं वॉशरूम से होकर आता हूँ तू टीवी देख&lt;br /&gt; वह कुछ नहीं बोला&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं सना के पास गया और उससे पूछा- हां सना दी बोलो क्या हुआ? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना बोली- तू जरा मेरी पिक्स खींच दे तेरे जीजू को भेजनी है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना दीदी ने अपना दुपट्टा उतार दिया&lt;br /&gt; अपनी कमीज को नीचे की तरफ खींचकर क्लिवेज दिखाया&lt;br /&gt; उसके दूध से भी गोरे आधे से ज्यादा मम्मे मेरे सामने नुमाया हो गाए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने भी झट से फ़ोटो खींच ली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; फिर उसने अपनी सलवार को घुटने तक फोल्ड करके ऊपर कर ली&lt;br /&gt; उसके नंगे पैर देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा&lt;br /&gt; मैंने जैसे-तैसे खुद पर कंट्रोल किया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब सना दी बेड पर लेट गई और उसने अपना क्लिवेज दिखाते हुए एक मस्त पिक क्लिक करवाई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह पिक काफी अच्छी आई थी&lt;br /&gt; वह खुश हो गई और उसने तुरंत जीजू को भेज दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना की कामुक फ़ोटो देख कर जीजू और ज्यादा पिक्स भेजने की जिद करने लगा&lt;br /&gt; उसने साथ में यह भी कहा- थोड़ी और हॉट फ़ोटो भेज न! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसका मैसेज पढ़ कर दीदी भी कन्फ्यूज हो गई थी कि अब वह कौन से पोज में क्लिक कराए? &lt;br /&gt; वह मुझसे बोली- आरव तू बता ना कोई पोज जिसमें सही पिक आ जाए! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने तुरंत नेट से सेक्सी पोज निकाल कर देखा जिसमें सर नीचे और गांड ऊपर दिख रही थी&lt;br /&gt; यह पोज देख कर सना हंस दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने कहा- हंस मत सना दी चल जल्दी लेट जा भाई आ जाएगा वरना! &lt;br /&gt; वह पोज बना कर पिक खींचने को बोली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं तुरंत बेड पर खड़ा हुआ&lt;br /&gt; उसका सेक्सी पोज देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं जान-बूझकर पिक लेने के बहाने उसकी चूत से मोबाइल टच करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मोबाइल चुत के पानी से गीला होने लगा था तो मैंने भी चुत पर हाथ फेर दिया&lt;br /&gt; सना दीदी एक-दो बार उंह उंह बोली फिर शांत हो गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ऐसे जोश में लेटे हुए मैंने सना की सेक्सी पिक खींच ली&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना- थैंक्स आरव … आज तो तेरे जीजा जी खुश हो जाएंगे! &lt;br /&gt; मैं- हां दीदी देख तो रही हो मैं भी कितना खुश हूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना हंस दी और बोली- फर्स्ट नाइट में क्या सच में बहुत दर्द होता है? &lt;br /&gt; मैं- हां दीदी पर उसके बाद बहुत मज़ा आता है! आपको तो सब पता होगा! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना खड़ी होकर कपड़े सही करती हुई बोली- तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे तूने बहुत लड़कियों के साथ सेक्स किया है! &lt;br /&gt; हम दोनों जोर से हँस दिए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इतने में फैज़ल रूम में आ गया&lt;br /&gt; हम दोनों ने झूठ बोल दिया और बात हम दोनों के बीच रह गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब रात हुई&lt;br /&gt; हम दोनों सो गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना दी जीजू से बात कर रही थी रात के एक बजे का समय हुआ होगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी ने मुझे जगा दिया&lt;br /&gt; पहले तो मैं गुस्सा हुआ फिर वह प्यार से समझाने लगी तो मैं शांत हो गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; जीजू साला ठरकी अब उसको बिकिनी में सना की पिक्स चाहिए थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी ने जिद की और मुझे अपने मम्मी-पापा वाले रूम में ले गई&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर दीदी ने शर्माते हुए अपने कपड़े उतार दिएवह मेरे सामने सिर्फ स्मॉल ब्रा और लॉन्ग ब्लूमर टाइप सेक्सी ब्लैक पैंटी में थी&lt;br /&gt; दीदी की सेक्सी टांगें और उसमें क्यूट छोटे-छोटे रेशम से रोएं कमर की नाभि ऐसी गहरी कि लगा बस अभी चूम दूँ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके सीने पर ब्रा में कैद मम्मे और उन पर घमंड से अकड़े हुए उसके निप्पल … उफ्फ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी बोली- घूम जा! मैं तुरंत ब्रा पहन लेती हूँ! &lt;br /&gt; मैं घूम गया और एक मिनट में ही दीदी बिकिनी में हो गई थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; झांट बराबर पैंटी और उसी से मिलती जुलती ब्रा में दीदी की जवानी को देख कर मेरा लंड बॉक्सर से सलामी देने लगा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं- जीजू बहुत लकी है दीदी! उनको आप जैसी सेक्सी हॉट बीवी मिलेगीआपका शौहर रोज चोदेगा आपको! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना दीदी- हट बदमाश! चल पिक ले अब देखता ही रहेगा क्या? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसने पोज सोच रखे थे&lt;br /&gt; वह पीठ के बल लेट गई और अपनी गांड ऊपर कर ली तथा हाथों से पैरों को पकड़ लिया&lt;br /&gt; मैं पीछे खड़ा हुआ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी बोली- नीचे से ले ऊपर से नहीं! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं पास गया और अपना लंड चूत की दरार में टिका कर मैंने उसकी कमर और बूब्स की फ़ोटो खींच लीं&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; इन फ़ोटोज़ में दीदी का चेहरा नहीं आया था&lt;br /&gt; इस बार मैं दीदी की चूत का पूरा मजा ले रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; सना दीदी अब हल्की-हल्की आवाज में ‘आह्ह्ह … ओह्ह्ह … कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फोन बूब्स पर ही गिरा दिया और उठाने के बहाने से बूब्स को भी पूरा टच कर दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों बहुत जोश में आ गए थे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब मैंने दीदी के पैरों को कंधे पर ले लियामेरा फेस और उसकी चूत एकदम सामने थे&lt;br /&gt; मैंने एक और पिक ली पर इस बार मैं दीदी की चूत पर किस करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी- आरव … आहह … प्लीज मत कर! मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने फोन छोड़ दिया और दीदी की कमर को कसके पकड़ कर चूत को ऊपर से चाटने लगा&lt;br /&gt; दीदी की चुत ने पूरा पानी पैंटी में ही निकाल दिया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं दीदी के ऊपर चढ़ गया और उसे बेखौफ किस करने लगा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह अभी भी मान नहीं रही थी मुझसे अलग होने की जिद कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं किस करते-करते उसके बूब्स भी दबा दे रहा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर में जाकर उसका इंजन स्टार्ट हो गया और अब दीदी भी मेरा साथ देने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह मेरे होंठों पर अपने होंठ लगा कर किस करने लगी&lt;br /&gt; ‘आरव आज तूने ठीक नहीं किया! मैं जीजा को क्या बोलूंगी? &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; यह कहते हुए दीदी ने मुझे नंगा कर दिया और मेरे ऊपर आ गई&lt;br /&gt; उसने अपनी ब्रा भी वहीं खोल दी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं उसके बूब्स चूसने लगा &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैं- आह्ह दीदी वाओ … आप बहुत सेक्सी हो! इतने सेक्सी बूब्स तो मुझे कभी नहीं मिलेंगे! &lt;br /&gt; वह बोली- नहीं मिलेंगे तो चूस ले न लौड़े आह … साला जब से गर्म कर रहा है … चुत में आग लगा दी है तूने! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; अब दीदी बी मेरा लंड चूसने लगी&lt;br /&gt; वह मेरे लंड का रेड वाला सुपाड़ा ही चूसी होगी कि मेरा निकल गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वह अपने मुँह में माल भरे हुए ही लंड को चूसती रही जिससे लंड वापस खड़ा हो गया&lt;br /&gt; अब मैंने दीदी को लिटाया उसकी पैंटी निकाली तो सामने पूरी पिंक बुर लपलप कर रही थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने किसी प्यासे कुत्ते की तरह दीदी की चूत को चाटने लगा&lt;br /&gt; दीदी से कंट्रोल नहीं हुआ&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी- लंड डाल साले ऐसे चाट कर क्या मारेगा कुत्ते! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने उसकी चुत चाट कर अपना लंड लगाया तो उसने खुद अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर चुत के छेद पर सैट कर दिया&lt;br /&gt; अब उसने गांड उठा कर इशारा किया कि पेल दे! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने दम लगा कर लंड अन्दर डाल दिया&lt;br /&gt; आह अन्दर इतना टाइट और गर्म था कि लौड़े को बुखार चढ़ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उधर लंड बुर में क्या घुसा उसकी गांड फट गई और दर्द के मारे वह तड़फ उठी&lt;br /&gt; मेरा लाल सुपाड़ा ही अभी घुसा था और मुझे जलन होने लगी थी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; एक तो उसकी चुत कुंवारी और ऊपर से मेरा लंड मोटा है&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर दर्द का अहसास करने के बाद हम दोनों ही आगे बढ़ने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी नीचे से गांड उठा कर धक्का देने लगी और तेज तेज चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी&lt;br /&gt; मैंने उनकी चूची को मुँह में भर कर चूसा और कमर हिला कर जोर का धक्का दे मारा&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मेरा आधा लंड बुर फाड़ कर अन्दर चला गया&lt;br /&gt; ‘आह्ह्ह … साले कुत्ते … आह्ह्ह … आराम से कर न बहन के लौड़े आह ओह्ह्ह … उफ्फ! &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मैंने एक और धक्का मार कर अपना पूरा लंड अन्दर डाल दिया&lt;br /&gt; दीदी अब सामान्य होने लगी और गांड उछाल-उछाल कर चुदने का मजा लेने लगी&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों की पुछ-पुछ की आवाज से रूम गूंज उठा था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; तभी दीदी को याद आया कि बाजू वाले रूम में भाई है तो हमने आवाज कम की और स्पीड तेज करते हुए आगे-पीछे करके चुदाई का मजा लेने लगे&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; कुछ देर बाद दीदी की बुर से पानी निकल गया&lt;br /&gt; मेरा निकलने वाला ही था मैंने तुरंत लंड चुत से बाहर निकाला और बाहर ही झड़ गया&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; वर्जिन लड़की चुदाई के बाद हम दोनों बहुत थक गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; दीदी ने ब्रा-पैंटी पहन ली और बेडशीट को बाथरूम में ले गई&lt;br /&gt; उसमें थोड़ा खू.न लग गया था और स्पर्म से गीला हो गया था&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; उसके बाद बाथरूम में हम दोनों ने एक बार और चुदाई की और चुपचाप आकर सो गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; हम दोनों ने उसके बाद फिर कभी सेक्स नहीं किया&lt;br /&gt; उसकी शादी हो गई और उसके भाई को कभी पता नहीं चला&lt;br /&gt; कभी-कभी आती है तो अपने पति के साथ सेक्स वाली बातें बताती है&lt;br /&gt; उसके 2 बच्चे भी हो गए&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; प्लीज वर्जिन लड़की चुदाई स्टोरी पर अपने मेल जरूर करें.</description>
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<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 17:44:52 +0300</pubDate>
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